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भास्कर न्यूज | सिमडेगा झारखंड के सरकारी, सहायता प्राप्त और अल्पसंख्यक विद्यालयों में पढ़ाने वाले शिक्षकों की कार्यशैली में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए झारखंड शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद ने नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की है। इसके तहत अब कोई भी शिक्षक बिना लिखित पाठ-योजना (लेसन प्लान) के कक्षा में पढ़ाई नहीं करा सकेंगे। प्रत्येक विषय के प्रत्येक अध्याय के लिए पहले से विस्तृत योजना तैयार करनी होगी और उसे प्रधानाध्यापक से अनुमोदित कराना अनिवार्य होगा। जेसीईआरटी के निदेशक शशि रंजन द्वारा जारी निर्देशों में कहा गया है कि शिक्षण प्रक्रिया को केवल पाठ्यपुस्तक तक सीमित न रखकर गतिविधि आधारित, अनुभवात्मक और दक्षता आधारित बनाया जाए। इसके लिए हर अध्याय को पढ़ाने से पहले शिक्षक को यह तय करना होगा कि छात्र क्या सीखेंगे, कौन-कौन सी गतिविधियां कराई जाएंगी, मूल्यांकन कैसे होगा और स्थानीय संदर्भों को पढ़ाई से किस प्रकार जोड़ा जाएगा। एक सप्ताह से एक माह पहले बनानी होगी योजना : नई व्यवस्था के तहत शिक्षकों को कक्षा संचालन से एक सप्ताह, पखवाड़ा या एक माह पहले पाठ-योजना तैयार करनी होगी। योजना को प्रधानाध्यापक से सत्यापित कराने के बाद ही उसे लागू किया जा सकेगा। सभी विषयों की योजनाओं को एक ही पंजी या इंडेक्स फाइल में संधारित करना होगा और कक्षा में जाते समय शिक्षक को यह फाइल साथ रखना अनिवार्य होगा। औचक निरीक्षण के दौरान अधिकारी चालू सत्र की पाठ-योजना फाइल की जांच कर सकेंगे। यदि कोई अध्याय कई दिनों तक पढ़ाया जाता है तो शिक्षक को प्रतिदिन पढ़ाए गए विषय,कराई गई गतिविधियों और विद्यार्थियों की सहभागिता का विवरण भी दर्ज करना होगा। प्रधानाध्यापकों की भूमिका भी होगी अहम: एसओपी में प्रधानाध्यापकों की जिम्मेदारी भी स्पष्ट रूप से तय की गई है। उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि शिक्षक द्वारा प्रस्तुत पाठ-योजना उसी विषय की हो, जिसे वह पढ़ाते हैं और योजना राज्य सरकार द्वारा निर्धारित प्रारूप में तैयार की गई हो। फाइल भर जाने पर उसे विद्यालय कार्यालय में सुरक्षित रखा जाएगा और नई फाइल शुरू की जाएगी। औचक निरीक्षण के दिन प्रधानाध्यापक को उसी दिन पाठ-योजना पर प्रतिहस्ताक्षर करना होगा। इससे शिक्षण कार्य की नियमित निगरानी संभव हो सकेगी। झारखंड की भाषाई विविधता को ध्यान में रखकर तैयार हुई व्यवस्था जेसीईआरटी ने माना है कि झारखंड भाषाई और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत विविध राज्य है। यहां संथाली, मुंडारी, हो, खोरठा समेत कई भाषाएं बोली जाती हैं। कई दूरस्थ विद्यालयों में शिक्षण सामग्री (टीएलएम) की कमी रहती है तथा 40 से 45 मिनट के सीमित पीरियड में बिना तैयारी के पढ़ाने से समय का समुचित उपयोग नहीं हो पाता। इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए पाठ-योजना को अनिवार्य बनाया गया है ताकि शिक्षक पहले से तैयारी कर कक्षा में जाएं और उपलब्ध समय का अधिकतम उपयोग हो सके। क्या कहते हैं जिला शिक्षा अधीक्षक जिला शिक्षा अधीक्षक दीपक कुमार राम ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप शिक्षण व्यवस्था को अधिक प्रभावी,गुणवत्तापूर् ण और परिणाम आधारित बनाने के लिए यह पहल की गई है। पाठ-योजना के माध्यम से शिक्षक पूर्व तैयारी के साथ कक्षा में जाएंगे, जिससे विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षण अनुभव मिलेगा। जिले के सभी विद्यालयों को निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जाएंगे।
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