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जोरहाट IAF AN-32 क्रैश: क्‍यों जांबाजों का काल बन रहे हैं ऐसे...


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IAF AN-32 क्रैश: क्‍यों जांबाजों का काल बन रहे हैं ऐसे मिशन, जानें एक-एक बात

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Jorhat IAF AN-32 Crash: जोरहाट में भारतीय वायुसेना के AN-32 एयरक्राफ्ट क्रैश के बाद एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं. आखिर AN-32 जैसे एयरक्राफ्ट किन हालात में उड़ान भरते हैं और ऐसे मिशन इतने चुनौतीपूर्ण क्यों माने जाते हैं? भारतीय वायुसेना के पूर्व एयर मार्शल ने उस बातों का खुलासा किया है, जिसकी वजह से मिशंस पर गए एयरक्राफ्ट लगातार हादसे का शिकार हो रहे हैं.

IAF AN-32 क्रैश: क्‍यों जांबाजों का काल बन रहे हैं ऐसे मिशन, जानें एक-एक बातZoom

असम के जोरहाट में भारतीय वायुसेना का एयरक्राफ्ट एएन-32 क्रैश हो गया है.

Jorhat IAF AN-32 Crash: असम के जोरहट एयरफोर्स स्‍टैशन पर लैंडिंग के दौरान भारतीय वायुसेना का एएन-32 प्‍लेन क्रैश हो गया है. इस क्रैश में भारतीय वायुसेना के पांच जांबाज शहीद हो गए हैं. शहीदों में स्क्वाड्रन लीडर प्रशांत सिंह, फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार, सार्जेंट जितेंद्र शर्मा, अग्निवीर वायु खेमाराम कुमावत और दानिश आलम के नाम शामिल हैं. इस हादसे के बाद एक बार उन कारणों को लेकर बहस छिड़ गई है, जिनकी वजह से मिशन के दौरान प्‍लेन क्रैश हो रहे हैं.

भारतीय वायुसेना में एयर मार्शल रहे एक वरिष्‍ठ अधिकारी का कहना है कि एएन-32 एयरक्राफ्ट पिछले चार दशकों से भारतीय वायुसेना की ट्रांसपोर्ट फ्लीट की रीढ़ रहा है. 1980 के दशक के मध्य में भारतीय वायुसेना में शामिल होने वाला यह एयरक्राफ्ट तब से लेकर आज तक लद्दाख, पूर्वोत्तर भारत, अंडमान-निकोबार सहित देश के अन्य हिस्सों में अपने मिशन्‍स को सफलतापूर्वक पूरा करता आया है. जोरहाट में भी AN-32 एयरक्राफ्ट ने अपने अलग-अलग ऑपरेशंस को अब तक सफलतापूर्वक अंजाम दिया है.

आखिर क्‍या हो सकते हैं हादसे के कारण?

  1. हादसे की संभावित वजहों को लेकर पूर्व एयर मार्शल का कहना है कि किसी भी फ्लाइट के दो सबसे अहम फेज ऑफ और लैंडिंग होते है. दुनिया भर में लगभग 90 प्रतिशत एयरक्राफ्ट दुर्घटनाएं इन्हीं दो फेज के दौरान होती हैं.
  2. इसकी सबसे बड़ी वजह है कि टेकऑफ और लैंडिंग के दौरान एयरक्राफ्ट अपनी परफॉर्मेंस कैपेसिटी की लिमिट के बेहद करीब काम कर रहा होता है. एयरक्राफ्ट की स्‍पीड कम होती है और पायलट को बेहद सीमित सयम में कई अहम फैसले लेने पड़ते हैं.
  3. लैंडिंग के दौरान यदि कोई गंभीर तकनीकी खराबी, इमरजेंसी सिचुएशन या कंट्रोल से संबंधित कोई दिक्‍कत सामने आ जाए तो पायलट के पास प्रतिक्रिया देने के लिए बहुत कम समय होता है. जमीन के करीब होने और स्‍पीड कम होने की वजह से दुर्घटना का खतरा काफी बढ़ जाता है.
  4. इसके अलावा, जोरहाट सहित पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र में उड़ान भरना सामान्य एयरक्राफ्टन ऑपरेशन जैसा नहीं होता है. मिलिट्री फ्लाइट्स और और कमर्शियल फ्लाइट्स में सबसे बड़ा अंतर यही है कि मिलिट्री एयरक्राफ्ट उन इलाकों में जाते हैं जहां सामान्य पैसेंजर एयरक्राफ्ट नहीं जाते हैं.
  5. AN-32 जैसे एयरक्राफ्ट घाटियों, पहाड़ों और दुर्गम इलाकों में उड़ान भरते हैं, जहां कई बार रडार कवरेज भी नहीं होता है. मौसम तेजी से बदलने, बादल आने, बारिश होने या विजिबिलिटी कम होने की स्थिति में फ्लाइट ऑपेशन बेहद मुश्किल हो जाता है.
  6. ऐसे हालात में पायलटों को संकरी घाटियों के बीच से गुजरते हुए छोटे एयरस्ट्रिप तक पहुंचना पड़ता है. कई बार रनवे पूरी तरह डेवलप भी नहीं होते हैं. यही कारण है कि इस तरह के मिशंस को बेहद चुनौतीपूर्ण माना जाता है.

छोटी गलती भी बन सकती है बड़ा खतरा

पूर्व एयर मार्शल के अनुसार, पूर्वोत्तर और पहाड़ी इलाकों में मौजूद कई एयरस्ट्रिप केवल 3,000 से 3,500 फीट लंबे होते हैं. कुछ जगहों पर केवल एक दिशा से ही एयरक्राफ्ट को उतारा जा सकता है. ऐसी स्थिति में पायलट के पास गलती सुधारने की बहुत कम गुंजाइश होती है. यदि एयरक्राफ्ट तय लैंडिंग प्‍वाइंट से आगे उतरता है तो रनवे की लंबाई कम पड़ सकती है. यदि वह तय स्थान से पहले नीचे आ जाए तो पेड़ों और पहाडि़यों से टकराने का खतरा पैदा हो जाता है. यही वजह है कि इन इलाकों में लैंडिंग को बेहद चुनौतीपूर्ण माना जाता है.

बादल और घाटियां भी बन सकती हैं जोखिम

पूर्व एयर मार्शल ने पुराने हादसों का भी जिक्र करते हुए बताया कि पहाड़ी क्षेत्रों में खराब मौसम और घने बादलों के बीच उड़ान भरना हमेशा चुनौतीपूर्ण रहता है. कई बार विजिबिलिटी इतनी कम हो जाती है कि घाटियों की पहचान करना मुश्किल हो जाता है. कुछ पुराने मामलों में एयरक्राफ्ट गलत घाटी में दाखिल हो गए. हालांकि पायलट्स को ऐसी परिस्थितियों से बाहर निकलने के लिए ट्रेंड किया जाता है. उन्‍हें उन सुरक्षित रास्‍तों के बारे में बताया जाता है, जहां से सुरक्षित बाहर निकला जा सकता है. लेकिन कुछ घाटियां ऐसी भी होती हैं जहां गलती की गुंजाइश ना के बराबर भी नहीं होती है.

किसना सुरक्षित है आईएएफ का एएन-32 एयरक्राफ्ट
पूर्व एयर मार्शल के अनुसार, केवल दुर्घटनाओं के आधार पर एएन-32 को असुरक्षित नहीं एयरक्राफ्ट कहा जा सकता है. यह एयरक्राफ्ट वर्षों से भारतीय वायुसेना के सबसे भरोसेमंद ट्रांसपोर्ट विमानों में शामिल रहा है. इसका इस्तेमाल जवानों और हथियारों के साथ-साथ राशन, दवाइयों और अन्य जरूरी सामग्री को दूरदराज के इलाकों तक पहुंचाने में किया जाता रहा है. इसके अलावा यह एयरक्राफ्ट पैरा-असॉल्ट मिशन और सर्च एंड रेस्क्यू सहित अन्य कई मिशंस के लिए इस्‍तेमाल‍ किया जाता रहा है. समय के साथ इन एयरक्राफ्ट्स को मॉर्डन इक्‍यूपमेंट्स और नए एवियोनिक्स सिस्टम से भी लैस किया गया है.

क्‍या हो सकती हैं जोरहाट में एएन-32 क्रैश की वजह
फिलहाल जोरहाट में हुए एएन-32 क्रैश की असल वजहों का पता जांच के बाद ही चल सकेगा. भारतीय वायुसेना सहित संबंधित एजेंसियों के अधिकारी क्रैश साइट पर पहुंच चुके हैं. मलवे से एयरक्राफ्ट के ब्‍लैक बॉक्‍स को खोजने की कवायद शुरू हो चुकी है. साथ ही, एयरक्राफ्ट के मलवे के सैंपल को भी इकट्ठा किया जा रहा है. जल्‍द ही पायलट और एयर ट्रैफिक कंट्रोल सेंटर के बीच हुई बातचीत की पड़ताल भी की जाएगी. इन सभी पहलुओं की जांच के बाद ही एएन-32 के क्रैश की वजहों के बारे में पता चल सकेगा.

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Anoop Kumar MishraAssistant Editor

Anoop Kumar Mishra is currently serving as Assistant Editor at News18 Hindi Digital, where he leads coverage of strategic domains including aviation, defence, paramilitary forces, international security affairs…और पढ़ें



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