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jehanabad bihar police candidate dheeraj eight times failure succeed in 9th time...


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Success Story: 8 बार की असफलता के बाद भी धीरज ने हार नहीं मानी. गरीबी और परेशानियों के आगे घुटने कभी नहीं टेका. 9वीं दफा में बिहार पुलिस में सफलता पाई. जिस वक्त उनका बिहार पुलिस का मेरिट लिस्ट आया उस वक्त वो बाज़ार में मटका कुल्फी बेच रहे थे. धीरज ने कहा कि सफलता का कोई शॉर्ट कट नहीं होता है. आपको निरंतर मेहनत करनी होती है.

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जहानाबाद:  करत करत अभ्यास ते, जड़मत होत सुजान…यह कहावत बहुत ही प्रासंगिक है. इसे चरितार्थ कर दिखाया है जहानाबाद के लाल धीरज कुमार ने. 8 बार की असफलता के बाद भी धीरज ने हार नहीं मानी. गरीबी और परेशानियों के आगे घुटने कभी नहीं टेका और 9वीं दफा में बिहार पुलिस में सफलता पाई. जिस वक्त उनका बिहार पुलिस का मेरिट लिस्ट आया, उस वक्त वो बाज़ार में मटका कुल्फी बेच रहे थे. उन्हें किसी और से बिहार पुलिस में सफलता की शोर के बारे में जानकारी प्राप्त हुई. आज वो बहुत ही खुश हैं. इसका श्रेय अपने परिवार को दे रहे हैं.

दिन में मटका कुल्फी बेचना, रात में पढ़ाई
दरअसल, धीरज कुमार जहानाबाद जिला मुख्यालय से 25 किमी दूर हुलासगंज प्रखंड के रहने वाले हैं. शादी भी हो चुकी है. अभी 3 बच्चों और पत्नी की जिम्मेदारी कंधों पर है. माता पिता दोनों बीमार रहते हैं. ग्रेजुएट धीरज का सपना शुरू से सरकारी नौकरी प्राप्त करने को था. हालांकि, घर परिवार से आर्थिक रूप से काफी कमजोर था. कुछ करने की ललक शुरू से ही थी. इसके लिए वो दिन रात भी मेहनत करने को रहता तो कर गुजरते. शादी हो गई तो घर की जिम्मेदारी बहुत अधिक बढ़ गई. ऐसे में पैसा भी नहीं और परिवार का भी देखभाल करना था.

धीरज के संघर्ष की कहानी
अब ऐसे में क्या किया जाए? घर, पत्नी और परिवार के अन्य सदस्य से लगातार सुनने को मिले. पिता कहते कि बाहर चले जाओ, तो कुछ कमाई होगी. माता जी भी कुछ ऐसी ही बातें कहते. हां, बीच में कुछ वक्त के लिए बाहर कमाने को गया, लेकिन फिर हम घर वापस आ गए. जुनून था कि सरकारी नौकरी प्राप्त करनी है. ग्रेजुएशन के बाद 8 बार अलग अलग नौकरी के लिए परीक्षा दी, लेकिन असफलता ही हाथ लगी. पैसे भी खर्च हुआ करता. पत्नी भी गुस्सा करती. ऐसे में अंततः एक गाड़ी खरीदी और उससे लहसुन, सर्फ और साबुन गली गली घूमकर बेचने लगा.

9वीं बार में मिली बिहार पुलिस में सफलता 
कुछ सालों तक ऐसा करके अपना जीवन यापन किया. गर्मियों में मटका कुल्फी भी बेच लेता. इससे कुछ पैसे हो जाते, जिससे घर और अपना खर्च दोनों किसी तरह हो जाता. हमने 9वीं बार भी हर बार की तरह सपना लिए, बिहार पुलिस का फॉर्म भरा और फिर जो हुआ उसने हमारी पैरों तले जमीन खिसका दिया. जिस वक्त परीक्षा का परिणाम आया तो हम लहसुन बेच रहे थे. जिस वक्त मेरिट लिस्ट बनी तो उस वक्त कुल्फी बेच रहे थे. अब बिहार पुलिस में चयन पाकर बहुत खुश हूं. हमारी मेहनत रंग लाई है.

‘शॉर्ट कट नहीं, मेहनत ही सफलता का रास्ता’ 
लोकल 18 से धीरज ने कहा कि हमें तब तक हार नहीं माननी चाहिए जब तक हम सफल न हो जाएं. यह हमारी कहानी बहुत संघर्ष की सफलता है. 8 बार असफल होने के बाद मिली कामयाबी है. अन्य बच्चों को भी यही कहूंगा कि बस मेहनत करते जाइए दूसरा कोई शॉर्ट कट का रास्ता नहीं है.

About the Author

Amit ranjan

मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें



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