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झारखंड की राजनीति में परिमल नाथवानी की पहचान ऐसे नेता के रूप में बन गई है, जो किसी बड़े राजनीतिक दल के सदस्य नहीं होने के बावजूद चुनाव जीतने में सफल रहे हैं. उन्हें अलग-अलग दलों के नेताओं और विधायकों का समर्थन मिलता रहा है. यही वजह है कि उनकी जीत को सिर्फ एक चुनावी जीत नहीं है.
परिमल नाथवानी
रांची: झारखंड राज्यसभा चुनाव में इस बार सबसे ज्यादा चर्चा उद्योगपति और नेता परिमल नाथवानी की रही. वो निर्दलीय उम्मीदवार थे. लेकिन उन्हें बीजेपी का सपोर्ट था. नाथवानी ने कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा को हराकर चौथी बार राज्यसभा पहुंचने का रिकॉर्ड बनाया है. उनकी जीत ने कांग्रेस को बड़ा झटका दिया है.
81 सदस्यीय झारखंड विधानसभा में जीत के लिए 28 वोट जरूरी थे. परिमल नाथवानी को 28 वैध वोट मिले. जबकि कांग्रेस के प्रणव झा को सिर्फ 20 वोट मिल सके. चुनाव में क्रॉस वोटिंग भी चर्चा का विषय रही. बताया जा रहा है कि राजद और भाकपा (माले) के कुछ विधायकों ने भी नाथवानी के पक्ष में मतदान किया.
कौन हैं परिमल नाथवानी?
परिमल नाथवानी मूल रूप से गुजरात के रहने वाले हैं. वे देश के जाने-माने उद्योगपति और कॉरपोरेट जगत की बड़ी हस्ती माने जाते हैं. कारोबार के साथ-साथ उन्होंने राजनीति में भी मजबूत पहचान बनाई है. झारखंड और आंध्र प्रदेश में विकास कामो को लेकर उनका नाम अक्सर चर्चा में रहा है.
कब-कब जीते राज्यसभा चुनाव?
- पहला कार्यकाल (2008-2014): नाथवानी का झारखंड से जुड़ाव नया नहीं है. उन्होंने पहली बार साल 2008 में झारखंड से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में राज्यसभा चुनाव जीता था. उस समय भी उन्हें अलग-अलग दलों के विधायकों का समर्थन मिला था. क्रॉस वोटिंग के जरिए उन्हें 21 वोट मिले. उन्होंने यूपीए समर्थित उम्मीदवार को हराया था.
- दूसरा कार्यकाल (2014-2020): साल 2014 में नाथवानी ने एक बार फिर झारखंड से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीत हासिल की. लगातार दूसरी बार राज्यसभा पहुंचे. इस चुनाव में भी उन्हें अलग-अलग दलों के विधायकों का समर्थन मिला.
- तीसरा कार्यकाल (2020-2026): जून 2020 में परिमल नाथवानी आंध्र प्रदेश से राज्यसभा के लिए चुने गए. वह वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार थे. इस तरह उन्होंने पहली बार झारखंड के बाहर किसी दूसरे राज्य का प्रतिनिधित्व किया.
- चौथा कार्यकाल 2026: अब उन्होंने फिर झारखंड से वापसी की है और चौथी बार राज्यसभा सदस्य बने हैं. इस तरह परिमल नाथवानी अब तक चार बार राज्यसभा चुनाव जीत चुके हैं. इनमें से तीन बार झारखंड और एक बार आंध्र प्रदेश से चुने गए हैं. झारखंड से यह उनकी तीसरी जीत है.
क्या है नाथवानी की ताकत?
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि नाथवानी की सबसे बड़ी ताकत उनकी सभी दलों के नेताओं से अच्छी रिश्तेदारी है. वर्षों से उन्होंने झारखंड में अलग-अलग राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ संपर्क बनाए रखा है. यही कारण है कि उन्हें कई बार पार्टी लाइन से हटकर भी समर्थन मिलता रहा है.
काम की चर्चा
राज्यसभा में अपने पिछले कार्यकालों के दौरान नाथवानी ने विकास, सड़क, बिजली, आदिवासी कल्याण और बुनियादी ढांचे से जुड़े मुद्दे उठाए. उन्होंने सांसद निधि से कई विकास कार्य भी कराए. गांवों में सड़क, सामुदायिक भवन और अन्य परियोजनाओं पर भी काम कराया गया.
कैसा सेट किया समीकरण?
इस चुनाव से पहले उनकी झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात भी चर्चा में रही थी. बाद में उन्हें एनडीए का समर्थन मिला और वे चुनाव जीतने में सफल रहे. अपनी जीत के बाद परिमल नाथवानी ने कहा कि यह उनका चौथा राज्यसभा कार्यकाल है और झारखंड से तीसरी जीत है. उन्होंने कहा कि उनकी संसदीय यात्रा की शुरुआत इसी राज्य से हुई थी और यहां के लोगों से उनका विशेष लगाव है.
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मनीष कुमार इस समय न्यूज18 हिंदी में बिहार, झारखंड और दिल्ली की टीम को लीड कर रहे हैं. इन राज्यों की बड़ी खबरों से लेकर खास फीचर स्टोरी तक, उनकी नजर हर अहम मुद्दे पर रहती है. उनका मुख्य उद्देश्य है कि हर जरूरी ख…और पढ़ें