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Jharkhand Rajya Sabha Election 2026: राज्यसभा चुनाव में एनडीए समर्थित परिमल नथवानी को 28 वोट मिले. जबकि एनडीए के पास मात्र 24 मत थे. वहीं कांग्रेस के प्रणव झा को 28 मत रहते हुए भी मात्र 19 वोट मिले. महागठबंधन के 3 वोट रद्द किए गए. वहीं क्रॉस वोटिंग से गठबंधन में दरार के संकेत मिलने शुरु हो गए हैं. जानिए इस चुनाव में महागठबंधन के साथ किसने खेला किया?
झारखंड राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के साथ महागठबंधन के साथी ने ही खेला कर दिया. काबला
रांची: एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवानी ने झारखंड की सत्ता पर काबिज महागठबंधन को आखिर कैसे पटखनी दी? झारखंड के इस राज्यसभा चुनाव परिणाम ने अचानक वहां की सियासत को बेहद गर्म कर दिया है. हर कोई यही सोच रहा है कि प्रचंड बहुमत होने के बावजूद कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा को हार का मुंह क्यों देखना पड़ा? आइए इस पूरी रिपोर्ट में समझते हैं वोटों का वह गणित जिसने कांग्रेस की रणनीति को पूरी तरह फेल कर दिया. इस चुनाव में एनडीए समर्थित नथवानी को पूरे 28 मत मिले. जबकि कांग्रेस के प्रणव झा को महज 19 मतों से ही संतोष करना पड़ा. जबकि महागठबंधन के पाले से पड़े 3 वोट अमान्य घोषित कर दिए गए.
आखिर वो कौन से विधायक थे, जिन्होंने पाला बदला?
परिमल नथवानी इससे पहले भी दो बार राज्यसभा का चुनाव जीत चुके हैं. एक बार दक्षिण भारत (आंध्र प्रदेश) से और एक बार झारखंड से. गुरुवार को हुए इस कांटे के मुकाबले में नथवानी ने एक बार फिर खुद को राजनीति का माहिर खिलाड़ी साबित कर दिया. झारखंड विधानसभा की मौजूदा स्थिति को देखें तो 81 सदस्यीय सदन में महागठबंधन के पास 56 विधायकों का भारी बहुमत था. जबकि एनडीए के पास केवल 24 विधायक थे. यानी एनडीए जीत के जरूरी जादुई आंकड़े (28 वोट) से 4 मत दूर था. इसके बावजूद नथवानी को 28 वोट मिल गए. अब सवाल उठ रहा है कि महागठबंधन के वो विधायक कौन हैं, जिन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार को वोट नहीं दिया और एनडीए का साथ दिया?
विधानसभा का संख्या बल और सीटों का गणित
81 सदस्यों वाली झारखंड विधानसभा में राज्यसभा की एक सीट सीधे जीतने के लिए प्रथम वरीयता के 28 वोटों का जादुई आंकड़ा आवश्यक था. सत्ताधारी महागठबंधन के पास कुल 56 विधायक थे. जिनमें झामुमो यानी JMM के 34, कांग्रेस के 16, राजद के 4 और भाकपा माले के 2 विधायक शामिल हैं. भारी बहुमत होने के कारण झामुमो ने अपने प्रत्याशी बैद्यनाथ राम को 30 वोट दिलाकर पहली सीट पर शानदार जीत दर्ज करा दी. पहली सीट निकालने के बाद भी महागठबंधन के पास कांग्रेस के प्रणव झा के लिए पूरे 26 वोट बचने चाहिए थे. झामुमो के बचे हुए 4 वोट और कांग्रेस(16), राजद(4) माले(2) के वोट मिलाकर. लेकिन प्रणव झा को सिर्फ 19 वोट मिले. जबकि एनडीए के 24 वोटों के साथ मिलकर परिमल नथवानी 28 वोटों के साथ राज्यसभा पहुंच गए.
जेएमएम, राजद या भाकपा माले…किसने किया खेला?
चुनाव परिणाम सामने आने के बाद झारखंड के कांग्रेस प्रभारी राजू ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने सीधे झामुमो की तरफ इशारा करते हुए कहा कि इस चुनाव परिणाम का गठबंधन पर भी असर पड़ सकता है. उन्होंने साफ तौर पर कहा कि हमारे गठबंधन के साथियों ने कांग्रेस को वोट नहीं दिया है. दूसरी तरफ राजद ने अपनी तरफ से सफाई देते हुए दावा किया है कि उनके सभी 4 विधायक एकजुट थे. उन्होंने पूरी वफादारी से प्रणव झा को ही वोट दिया था. राजद का कहना है कि गड़बड़ी कहां हुई. यह अब बड़ी जांच का विषय है.
किन विधायकों के मत हुए रद्द और कहां फंसा पेंच?
संख्या बल रहने के बाद भी कांग्रेस की यह हार साफ संकेत दे रही है कि महागठबंधन के कुनबे में बड़ी सेंधमारी हुई है. बीजेपी अपनी पर्दे के पीछे की रणनीति में पूरी तरह सफल रही है. अगर हम आंकड़ों को समझें तो झामुमो के प्रत्याशी बैद्यनाथ राम ने 30 मत प्राप्त किए. झामुमो के बचे हुए 4 विधायकों ने अगर कांग्रेस को वोट किया होता तो कांग्रेस की अपनी 16 सीटों को मिलाकर यह संख्या 20 होती. लेकिन प्रणव झा को केवल 19 वोट मिले. इसका मतलब या तो झामुमो के उन बचे हुए 4 विधायकों में से 3 के मत रद्द हो गए और सिर्फ 1 मत कांग्रेस को मिला. या फिर कांग्रेस के अपने ही खेमे में क्रॉस-वोटिंग हुई.
अगर बात राजद और भाकपा माले के 6 विधायकों की करें और उन्हें कांग्रेस के 16 वोटों में जोड़ा जाए तो यह संख्या 22 होती है. लेकिन वोटिंग में मात्र 19 मत मिलना यह साफ करता है कि विधायकों ने या तो जानबूझकर अपने वोट रद्द कराए या फिर एनडीए प्रत्याशी के पक्ष में क्रॉस-वोटिंग कर दी. अब इसे एनडीए की रणनीति कहें या महागठबंधन के भीतर का खेला? लेकिन कांग्रेस इस बार संख्या बल के इस सियासी चक्रव्यूह में बुरी तरह फंस गई है.
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मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें