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Bitter Gourd Cultivation: युवा किसान अजीत कुमार निषाद का कहना है कि उसने कुछ वर्ष पहले पारंपरिक खेती के साथ-साथ करेले की खेती शुरू की थी. शुरुआत में उसने कम क्षेत्र में खेती की, लेकिन अच्छा उत्पादन और बेहतर दाम मिलने के बाद अब उसने इसका रकबा बढ़ा दिया है. आज वह हर सीजन में अच्छी कमाई कर रहा है.
गोंडा: उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के विकासखंड झंझरी के एक युवा किसान करेले की खेती कर अच्छी कमाई कर रहा है. जहां कई किसान पारंपरिक फसलों पर निर्भर है. वहीं इस किसान ने सब्जी की खेती को अपनाकर अपनी आय में बड़ा इजाफा किया है. कम लागत और बाजार में अच्छी मांग के कारण मचान विधि करेले की खेती उसके लिए फायदे का सौदा साबित हो रही है.
युवा किसान अजीत कुमार निषाद का कहना है कि उसने कुछ वर्ष पहले पारंपरिक खेती के साथ-साथ करेले की खेती शुरू की थी. शुरुआत में उसने कम क्षेत्र में खेती की, लेकिन अच्छा उत्पादन और बेहतर दाम मिलने के बाद अब उसने इसका रकबा बढ़ा दिया है. आज वह हर सीजन में अच्छी कमाई कर रहा है.
अजीत कुमार निषाद बताते है कि उन्होंने ग्रेजुएशन तक की पढ़ाई की. उसके बाद उन्होंने सरकारी नौकरी के लिए तैयारी की. लेकिन कुछ कारण बस उनको सरकारी नौकरी नहीं मिल पाई. फिर उन्होंने अपनी किस्मत खेती किसानी में आजमाई और आज लगभग एक बीघा में करेले की खेती कर रहे हैं.
अजीत कुमार निषाद के अनुसार करेले की फसल लगभग 50 से 60 दिनों में तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है. एक बार पौधे तैयार होने के बाद कई महीनों तक लगातार उत्पादन मिलता रहता है. इससे किसानों को बार-बार फसल लगाने की जरूरत नहीं पड़ती और नियमित आय बनी रहती है.
अजीत कुमार निषाद बताते है कि लगभग एक बीघा में करेले की खेती कर रहे है. भविष्य में स्कोर आगे बढ़ाना है. एक बीघा करेले की खेती में लगभग दो से ढाई हजार रुपए की लागत लगी है. एक बीघा करेली की खेती से लगभग 50 से 60 हजार रुपए का इनकम हो रहा है.
बाजार में करेले की मांग लगभग पूरे साल बनी रहती है. गर्मी और बरसात के मौसम में इसकी मांग और बढ़ जाती है. स्थानीय मंडियों के अलावा आसपास के जिलों में भी इसकी बिक्री आसानी से हो जाती है. अच्छे दाम मिलने से किसानों को लाभ मिलता है.