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बारिश में भी नहीं घटेगा गाय-भैंस का दूध, बस अपना लें यह...


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बारिश में भी नहीं घटेगा गाय-भैंस का दूध, बस अपना लें यह छोटा सा उपाय

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मानसून में कीचड़ और गंदगी के कारण गाय-भैंसों में खुर सड़ने का संक्रमण तेजी से फैलता है. इससे पशु दर्द के कारण चारा कम खाते हैं और दूध उत्पादन घट जाता है. इससे बचने के लिए पशुशाला को सूखा रखें, नियमित चूने का छिड़काव करें और खुरों को साफ पानी से धोएं. यह आसान उपाय पशुओं को हमेशा तंदुरुस्त रखेगा.

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देवघर: बरसात का मौसम शुरू होते ही किसानों की चिंता सिर्फ खेती तक सीमित नहीं रहती, बल्कि पशुओं की देखभाल भी बड़ी चुनौती बन जाती है. बारिश के दिनों में गांवों में जगह-जगह कीचड़, गंदगी और पानी जमा हो जाता है.ऐसे माहौल का सबसे ज्यादा असर गाय और भैंस के खुरों पर पड़ता है. पशु चिकित्सक के अनुसार मानसून में खुर सड़ने की बीमारी तेजी से फैलती है.गांव में कई किसान इसे सामान्य चोट या कांटा चुभने की समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यही लापरवाही बाद में बड़ी परेशानी खड़ी कर सकती है. इस बीमारी की वजह से पशु को चलने-फिरने में काफी तकलीफ होती है और दूध देने वाले पशुओं का दूध भी कम होने लगता है.

क्या कहती हैं पशु चिकित्सक?
देवघर कृषि विज्ञान केंद्र मे पदस्थापित पशु चिकित्सक डॉ. पूनम सोरेन ने लोकल 18 को बताया कि जब गाय या भैंस लगातार गीली और कीचड़ वाली जगह पर खड़ी रहती है तो खुरों के बीच की चमड़ी गलने लगती है.धीरे-धीरे वहां संक्रमण हो जाता है और खुर सड़ने की समस्या शुरू हो जाती है. शुरुआत में पशु हल्का लंगड़ाता है, लेकिन किसान अक्सर इस पर ध्यान नहीं देते. कुछ दिनों बाद पशु एक पैर को ऊपर उठाकर खड़ा रहने लगता है, चलने में दर्द महसूस करता है और बार-बार बैठने की कोशिश करता है.कई बार खुरों के बीच सूजन दिखाई देने लगती है और वहां से बदबू भी आने लगती है.यदि समय रहते इलाज नहीं कराया गया तो घाव गहरा हो सकता है और पशु पूरी तरह से लंगड़ा भी हो सकता है.

दूध उत्पादन में आती है कमी 
उन्होंने बताया कि इस बीमारी का सीधा असर पशु की सेहत और दूध उत्पादन पर पड़ता है.जब पशु दर्द में रहता है तो वह ठीक से चारा नहीं खाता.चारा कम खाने से शरीर कमजोर होने लगता है और दूध की मात्रा भी घट जाती है.कई किसानों को लगता है कि बारिश में दूध अपने आप कम हो गया है, जबकि असली वजह खुरों में होने वाला संक्रमण भी हो सकता है. इसलिए मानसून में पशुओं के खुरों पर विशेष ध्यान देना बेहद जरूरी है.

बीमारी से बचने के लिए अपनाये ये घरेलू उपाय 
घरेलू बचाव के बारे में डॉ. पूनम सोरेन कहती हैं कि सबसे पहले पशुशाला को साफ और सूखा रखना चाहिए. जहां पशु बांधे जाते हैं वहां पानी जमा नहीं होने देना चाहिए.यदि फर्श कच्चा है तो उस पर समय-समय पर सूखी मिट्टी या बालू डालनी चाहिए ताकि नमी कम रहे.पशुशाला और आसपास के इलाके में चूना छिड़कना भी फायदेमंद होता है. इससे गंदगी और संक्रमण फैलाने वाले जीवाणुओं की संख्या कम होती है.पशुओं के खुरों को सप्ताह में दो से तीन बार साफ पानी से धोकर अच्छी तरह सुखाना चाहिए.कई किसान खुरों की सफाई पर ध्यान नहीं देते, जबकि यही सबसे आसान और असरदार बचाव का तरीका है.

पशुओ को देते रहे हरा चारा 
सोरेन बताती हैं कि बरसात के दिनों में पशुओं को बहुत ज्यादा कीचड़ वाले स्थानों पर चराने से बचना चाहिए.यदि चराने के बाद खुरों में मिट्टी या गोबर चिपक गया हो तो उसे तुरंत साफ कर देना चाहिए. साथ ही पशुओं को संतुलित आहार देना भी जरूरी है ताकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत बनी रहे. हरा चारा, सूखा चारा और खनिज मिश्रण सही मात्रा में देने से पशु कई बीमारियों से लड़ने में सक्षम रहता है.

About the Author

Prashun Singh

मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं.



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