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Indian Navy Warship Commissioning: भारत अपने डिफेंस सिस्टम को लगातार अपग्रेड कर रहा है. जमीन से लेकर आसमान और समंदर तक को अभेद्य बनाया जा रहा है. समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में रविवार 21 जून 2026 का दिन काफी अहम रहा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडियन नेवी के हवाले 3 वॉरशिप किया. इन तीनों युद्धपोतों की खासियत एक-दूसरे से काफी अलग है. डिफेंस एक्सपर्ट का मानना है कि इन तीनों वॉरशिप के भारतीय नौसेना में शामिल होने से हिन्द से लेकर प्रशांत महासागर तक भारत का दबदबा होगा. इसके साथ ही चीन जैसे देशों की मनमानी पर भी नकेल कसा जा सकेगा.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन देसी वॉरशिप इंडियन नेवी को समर्पित किया है. इन तीनों की खासियत एक से बढ़कर एक हैं. इससे हिन्द महासागर से लेकर प्रशांत महासागर तक भारतीय नौसेना की ताकत बढ़ेगी. (फोटो: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फेसबुक अकाउंट से साभार)
Indian Navy Warship Commissioning: इंडियन आर्मी और एयरफोर्स के साथ ही भारतीय नौसेना को भी एडवांस वेपन सिस्टम से लैस करने की प्रक्रिया चल रही है. बदले हालात में मैरीटाइम सिक्योरिटी को दुरुस्त करना अनिवार्य हो चुका है. ईरान जंग ने पूरी दुनिया को एक बार फिर से बताया कि समुद्री ताकत का होना कितना जरूरी है. हालात को देखते हुए भारत भी अपनी नेवी को मजबूत बनाने में जुटा है. भारत का लक्ष्य आने वाले 10 साल में नेवी की पावर को नेक्स्ट लेवल तक ले जाना है. इसी टार्गेट के साथ इंडियन नेवी में एक साथ तीन वॉरशिप को शामिल किया जा रहा है. हालांकि, सुपरपावर नेवी के लिए वॉरशिप के साथ ही एयरक्राफ्ट कैरियर की भी जरूरत है, ताकि ब्लू वाटर नेवी के कॉन्सेप्ट को जमीन पर उतारा जा सके. बता दें कि भारत के पास फिलहाल दो विमानवाहक पोत (INS विक्रांत और INS विक्रमादित्य) हैं.
दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को कोलकाता में भारतीय नौसेना के तीन स्वदेशी प्लेटफॉर्म (INS दुनागिरि, INS संशोधक और INS अग्रय) को औपचारिक रूप से नौसेना में शामिल करेंगे. इस समारोह को भारत की समुद्री सैन्य क्षमता, स्वदेशी रक्षा उत्पादन और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान की दिशा में एक अहम पड़ाव माना जा रहा है. रक्षा मंत्रालय और नौसेना के अनुसार, तीनों प्लेटफॉर्म भारतीय नौसेना की डिजाइन क्षमताओं और घरेलू शिपबिल्डिंग इकोसिस्टम की बढ़ती ताकत का प्रतीक हैं. कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) में निर्मित इन तीनों पोतों को नेवी की अलग-अलग ऑपरेशनल जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. इनमें INS दुनागिरि एक अत्याधुनिक स्टील्थ गाइडेड-मिसाइल फ्रिगेट है, INS संशोधक एक सर्वेक्षण पोत है, जबकि INS अग्रय को तटीय इलाकों में पनडुब्बी रोधी अभियानों के लिए डिजाइन किया गया है. नौसेना का कहना है कि इन तीनों प्लेटफॉर्म का एक साथ शामिल होना उसकी वॉर कैपेबिलिटी, समुद्री सर्वेक्षण और तटीय सुरक्षा तंत्र को एक साथ मजबूती देगा.
| INS दुनागिरि | INS अग्रय | INS संशोधक |
| भारतीय नौसेना के आधुनिकीकरण अभियान को और मजबूती देते हुए स्वदेशी युद्धपोत INS दुनागिरि को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है. प्रोजेक्ट 17A के तहत निर्मित यह पांचवां फ्रिगेट है, जबकि गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) में बना अपनी श्रेणी का दूसरा युद्धपोत है. यह वॉरशिप अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों से लैस है. इसमें ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, सरफेस-टू-एयर मिसाइल और क्लोज-इन वेपन सिस्टम लगाए गए हैं, जो इसे समुद्री युद्ध क्षमता के लिहाज से बेहद ताकतवर बनाते हैं. INS दुनागिरि को 80 महीनों में तैयार कर नौसेना को सौंपा गया, जबकि इस परियोजना के प्रमुख पोत INS नीलगिरि को बनने में 93 महीने लगे थे. | इंडियन नेवी के तटीय रक्षा बेड़े को और मजबूत करने वाले INS अग्रय को पनडुब्बी रोधी क्षमता से लैस आधुनिक युद्धपोत के रूप में तैयार किया गया है. यह 16 युद्धपोतों वाले अर्नाला क्लास एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट कार्यक्रम का पांचवां पोत है, जिसे 2013 में मंजूरी दी गई थी. तटीय और उथले समुद्री इलाकों में अभियान के लिए डिजाइन किए गए INS अग्रय में हल्के टॉरपीडो, स्वदेशी एंटी-सबमरीन रॉकेट लॉन्चर और अत्याधुनिक सोनार सिस्टम लगाए गए हैं. यह पोत खास तौर पर उथले तटीय जलक्षेत्रों में दुश्मन पनडुब्बियों का पता लगाने और उन्हें निशाना बनाने के लिए तैयार किया गया है. पाकिस्तान नौसेना द्वारा हंगोर क्लास पनडुब्बियों सहित अपने पनडुब्बी बेड़े को लगातार मजबूत किए जाने के बीच INS अग्रय की यह क्षमता भारत की समुद्री सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है. | भारतीय नौसेना की सर्वेक्षण क्षमता को मजबूत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज कोलकाता में INS संशोधक को नौसेना में शामिल किया. यह संधायक श्रेणी के सर्वेक्षण पोत कार्यक्रम का चौथा और अंतिम जहाज है. करीब 110 मीटर लंबे और लगभग 3,300 टन वजनी इस पोत को अत्याधुनिक हाइड्रोग्राफिक सर्वे सिस्टम, ऑटोनॉमस अंडरवॉटर व्हीकल्स (AUVs) और रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल्स (ROVs) से लैस किया गया है. इन सिस्टम्स की मदद से समुद्र तल की मैपिंग, नेविगेशन चार्ट तैयार करने और समुद्री क्षेत्रों का सटीक सर्वेक्षण किया जा सकेगा. INS संशोधक के शामिल होने से हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की समुद्री निगरानी, सुरक्षित नौवहन और सामरिक सर्वेक्षण क्षमताओं को और मजबूती मिलेगी. यह पोत नौसेना के आधुनिकीकरण और स्वदेशी समुद्री बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने की दिशा में एक अहम उपलब्धि माना जा रहा है. |
INS दुनागिरि क्यों इतना खास?
INS दुनागिरि को इस कमीशनिंग का सबसे अहम आकर्षण माना जा रहा है. यह प्रोजेक्ट 17A के तहत तैयार नीलगिरि श्रेणी का स्टील्थ फ्रिगेट है और इस श्रेणी का पांचवां पोत बताया गया है. INS दुनागिरि रडार को चकमा देकर ऑपरेशन को अंजाम देने में सक्षम है. इसमें एडवांस वेपन और सेंसर सिस्टम, बेहतर स्टील्थ विशेषताएं तथा आधुनिक वॉर ऑपरेशन कैपेबिलिटी शामिल है. रिपोर्टों के मुताबिक, यह पोत ब्रह्मोस जैसी सुपरसोनिक मिसाइलों, एयर डिफेंस सिस्टम और एंटी-सबमरीन क्षमताओं से लैस है. हिंद महासागर क्षेत्र और व्यापक इंडो-पैसिफिक में बढ़ती सामरिक चुनौतियों के बीच दुनागिरि भारतीय नौसेना की ब्लू-वॉटर क्षमता को और मजबूत करेगा.
INS दुनागिरी प्रोजेक्ट 17A का पांचवां फ्रिगेट है और इस श्रेणी का दूसरा युद्धपोत है, जिसका निर्माण गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) में किया गया है. यह फ्रिगेट ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों और क्लोज-इन वेपन सिस्टम से लैस है. (फोटो: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फेसबुक अकाउंट से साभार)
INS संशोधक: समंदर का स्निफर
वहीं, INS संशोधक नौसेना के लिए हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण और मैरिटाइम मैपिंग की क्षमता बढ़ाएगा. यह पोत समुद्र तल की मैपिंग, नेविगेशन चार्टिंग, अंडरवाटर सर्वे और भविष्य के नौसैनिक अभियानों की योजना बनाने में अहम भूमिका निभाएगा. रक्षा सूत्रों के अनुसार, इस तरह के सर्वे पोत सुरक्षित नेविगेशन, सबमरीन ऑपरेशन और समुद्री डोमेन जागरूकता के लिए बेहद महत्वपूर्ण होते हैं. संशोधक के शामिल होने से भारत को समुद्री सर्वेक्षण के क्षेत्र में अधिक आत्मनिर्भरता मिलेगी और विदेशी डाटा पर निर्भरता घटेगी.
INS अग्रय 2013 में स्वीकृत 16 वॉरशिप वाले अर्नाला क्लास एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट (ASW-SWC) कार्यक्रम के तहत पांचवां पोत है. तटीय और उथले समुद्री क्षेत्रों में अभियान के लिए डिजाइन किए गए इस पोत में हल्के टॉरपीडो, स्वदेशी एंटी-सबमरीन रॉकेट लॉन्चर और अत्याधुनिक सोनार सिस्टम्स लगी हैं. (फोटो: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फेसबुक अकाउंट से साभार)
INS अग्रय: सबमरीन का काल
INS अग्रय एक एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट है, जिसे उथले तटीय जलक्षेत्रों में दुश्मन पनडुब्बियों का पता लगाने और उन्हें निष्क्रिय करने के लिए तैयार किया गया है. इसमें हल्के टॉरपीडो, एंटी-सबमरीन रॉकेट लॉन्चर और एडवांस सोनार सिस्टम लगाए गए हैं. क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वियों की बढ़ती पनडुब्बी गतिविधियों के बीच अग्रय की तैनाती भारत के तटीय सुरक्षा ढांचे को महत्वपूर्ण मजबूती देगी. विशेष रूप से ऐसे लिटोरल जोन, जहां बड़े और गहरे पानी वाले युद्धपोत अपेक्षाकृत कम प्रभावी होते हैं, वहां यह पोत उपयोगी साबित होगा.
स्वदेशी टेक्नोलॉजी की ताकत
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, इन तीनों प्लेटफॉर्म में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है और इनके निर्माण में 200 से अधिक एमएसएमई की भागीदारी रही है. इससे साफ है कि नौसेना के आधुनिकीकरण के साथ-साथ भारत का घरेलू रक्षा औद्योगिक ढांचा भी तेजी से मजबूत हो रहा है. कोलकाता का यह समारोह केवल तीन पोतों की कमीशनिंग भर नहीं होगा, बल्कि यह भारत की उस रणनीतिक दिशा का भी प्रदर्शन होगा, जिसमें स्वदेशी तकनीक, औद्योगिक क्षमता और राष्ट्रीय सुरक्षा को एक साथ आगे बढ़ाया जा रहा है.
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बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से प्रारंभिक के साथ उच्च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें