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देवघर के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित नंद किशोर मुदगल के अनुसार वर्ष 2026 का सावन माह 30 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त को श्रावण पूर्णिमा और रक्षाबंधन के दिन समाप्त होगा. इस बार सावन कई शुभ संयोगों के कारण विशेष माना जा रहा है. पूरे महीने में चार सावन सोमवार पड़ेंगे, जो भगवान शिव की पूजा के लिए अत्यंत फलदायी माने जाते हैं. 17 अगस्त को नागपंचमी और सोमवार का दुर्लभ संयोग बनेगा. वहीं प्रदोष व्रत भी सोमवार को पड़ रहा है. सावन की शुरुआत आयुष्मान योग में होने से इसका धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व और बढ़ गया है.
देवघर : भगवान भोलेनाथ के भक्तों के लिए सावन का महीना साल का सबसे पवित्र और इंतजार वाला समय माना जाता है. जैसे ही सावन की शुरुआत होती है, मंदिरों में घंटियों की गूंज सुनाई देने लगती है, शिवालयों में जलाभिषेक का दौर शुरू हो जाता है और हर तरफ “बोल बम” के जयकारे सुनाई देने लगते हैं. साल 2026 का सावन भी कुछ खास रहने वाला है. इस बार सावन महीने में ऐसे कई दुर्लभ और शुभ संयोग बन रहे हैं, जिन्हें ज्योतिष की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. यही वजह है कि इस बार का सावन शिव भक्तों के लिए विशेष फलदायी माना जा रहा है.कब हो रही सावन की शुरुआत क्या खास योग बन रहा है जानते है देवघर के ज्योतिषाचार्य से?
क्या कहते है देवघर के ज्योतिषाचार्य
देवघर के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित नंद किशोर मुदगल ने लोकल 18 से बातचीत करते हुए बताया कि वर्ष 2026 में सावन महीने की शुरुआत 30 जुलाई से होने जा रही है. हालांकि पंचांग के अनुसार सावन माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि 29 जुलाई की रात से ही प्रारंभ हो जाएगी, लेकिन उदयातिथि की मान्यता के कारण सावन का पहला दिन 30 जुलाई को माना जाएगा. वहीं इस पवित्र महीने का समापन 28 अगस्त को श्रावण पूर्णिमा के दिन होगा. खास बात यह है कि इसी दिन रक्षाबंधन का पर्व भी मनाया जाएगा, जिससे इस दिन का महत्व और भी बढ़ जाता है.
सावन मे पड़ रहे चार सोमवार
ज्योतिषाचार्य जी बताते हैं कि इस बार सावन में कुल चार सोमवार पड़ रहे हैं. सावन सोमवार का व्रत भगवान शिव को अत्यंत प्रिय माना जाता है. मान्यता है कि सावन सोमवार को श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत रखने तथा शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र अर्पित करने से भगवान भोलेनाथ की विशेष कृपा प्राप्त होती है. चार सोमवार होने के कारण भक्तों को पूरे महीने शिव आराधना का भरपूर अवसर मिलेगा.
सावन मे बन रहा खास संयोग
इस बार सावन की सबसे बड़ी खासियत नागपंचमी को लेकर भी है. वर्ष 2026 में नागपंचमी 17 अगस्त को मनाई जाएगी और संयोग से यह दिन सोमवार पड़ रहा है. नागपंचमी और सावन सोमवार का एक साथ पड़ना बेहद शुभ माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान शिव और नाग देवता दोनों की पूजा करने से जीवन में सुख, समृद्धि और शांति का आशीर्वाद मिलता है. ऐसे दुर्लभ संयोग बहुत कम देखने को मिलते हैं.इतना ही नहीं, इस बार सावन में पड़ने वाला प्रदोष व्रत भी सोमवार के दिन ही आ रहा है. सोमवार का प्रदोष व्रत भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और संध्या काल में शिव पूजा करने से व्यक्ति के कष्ट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. इसलिए इस बार का प्रदोष व्रत शिव भक्तों के लिए विशेष महत्व रखेगा.
आयुष्मान योग मे होगा सावन की शुरुआत
सावन 2026 की शुरुआत भी एक बेहद शुभ योग, आयुष्मान योग, में होने जा रही है. ज्योतिष शास्त्र में आयुष्मान योग को सौभाग्य, उन्नति और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है. ऐसे में सावन की शुरुआत इस शुभ योग में होना पूरे महीने की शुभता को और बढ़ाने वाला माना जा रहा है. वहीं रक्षाबंधन के दिन भद्रा का साया नहीं रहने से बहनों को राखी बांधने के लिए पूरे दिन शुभ मुहूर्त का लाभ मिलेगा. कुल मिलाकर कहा जाए तो साल 2026 का सावन केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि ज्योतिषीय दृष्टि से भी बेहद खास और शुभ संयोगों से भरा रहने वाला है, जिसका लाभ करोड़ों शिव भक्तों को मिलने की उम्मीद है.
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8 वर्षों से पत्रकारिता में अग्रसर. इलाहबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नालिस्म की पढ़ाई. अमर उजाला, दैनिक जागरण और सहारा समय संस्थान में बतौर रिपोर्टर, उपसंपादक औऱ ब्यूरो चीफ दायित्व का अनुभव. क्राइम, खेल, …और पढ़ें