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देशभर के 1.3 करोड़ अपराधियों के फिंगरप्रिंट डेटाबेस से जुड़ा सिस्टम; जांच व पहचान होगी तेज
साइबर और संगठित अपराध से निपटने के लिए राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) ने पुलिस के लिए ‘अभिज्ञान’ ऐप लॉन्च किया है। यह फिंगरप्रिंट आधारित डिजिटल पहचान प्रणाली है, जिसकी मदद से किसी भी संदिग्ध व्यक्ति की पहचान महज 35 सेकेंड में की जा सकेगी। बढ़ते साइबर अपराध और डिजिटल फ्रॉड के बीच इसे पुलिस के लिए एक महत्वपूर्ण तकनीकी हथियार माना जा रहा है। हालांकि आम नागरिक इस ऐप पर सीधे शिकायत दर्ज नहीं कर सकेंगे, लेकिन इसके जरिए पुलिस की जांच पहले से अधिक तेज और सटीक होगी। बार-बार अपराध करने वालों की पहचान आसान होगी और समय रहते कार्रवाई संभव हो सकेगी। साइबर डीएसपी प्रदीप कुमार के अनुसार, अभिज्ञान ऐप 1.3 करोड़ संदिग्धों और दोष सिद्ध अपराधियों के राष्ट्रीय फिंगरप्रिंट डेटाबेस से जुड़ा है। पुलिसकर्मी स्मार्टफोन या पोर्टेबल बायोमेट्रिक डिवाइस से अंगुलियों के निशान स्कैन करेंगे और कुछ ही सेकेंड में संबंधित व्यक्ति का आपराधिक रिकॉर्ड सामने आ जाएगा।
ऐसे करेगा काम
संदिग्ध व्यक्ति के फिंगरप्रिंट को स्मार्टफोन या बायोमेट्रिक डिवाइस से स्कैन किया जाएगा।
स्कैन का मिलान केंद्रीय डेटाबेस से होगा।
कुछ ही सेकेंड में पहचान और रिकॉर्ड उपलब्ध हो जाएगा।
सड़क जांच, संदिग्धों की पहचान और अपराध अनुसंधान में इसका उपयोग किया जाएगा। क्या होंगे फायदे
अपराधियों की त्वरित पहचान
फर्जी पहचान पर रोक
पुलिस जांच में तेजी
फरार आरोपियों की गिरफ्तारी आसान
डिजिटल पुलिसिंग को बढ़ावा शिकायत के कई प्लेटफॉर्म, लेकिन जागरूकता की कमी
रांची समेत झारखंड में रोज बड़ी संख्या में साइबर अपराध की शिकायतें सामने आती हैं। रांची साइबर थाने में प्रतिदिन छोटी-बड़ी 100 से 150 शिकायतें पहुंचती हैं, जिनमें करीब 20 प्रतिशत मामलों में एफआईआर दर्ज होती हैं। वहीं हेल्पलाइन 1930 पर रोज लगभग 250 शिकायतें दर्ज की जाती हैं। इसके बावजूद अधिकांश लोगों को उपलब्ध ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जानकारी नहीं है और ठगी का शिकार होने पर वे सीधे स्थानीय थानों का रुख करते हैं। साइबर शिकायत के प्रमुख प्लेटफॉर्म
राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP): ऑनलाइन ठगी, हैकिंग और सोशल मीडिया अपराधों की शिकायत के लिए।
हेल्पलाइन 1930 : वित्तीय साइबर ठगी की तत्काल सूचना देने के लिए।
चक्षु प्लेटफॉर्म : फर्जी कॉल, स्पैम मैसेज और व्हाट्सएप फ्रॉड की शिकायत के लिए।
सीईआईआर पोर्टल (सेंट्रल इक्विपमेंट आइडेंटिटी रजिस्ट्रर) : चोरी या गुम मोबाइल के आईएमईआई ब्लॉक और ट्रैकिंग के लिए।
टैफकॉप : टेलिकाॅम एनालेटिक्स फॉर फ्रॉड मैनेजमेंट एंड कंज्यूमर प्रोटेक्शन पोर्टल (TAFCOP) फर्जी मोबाइल सिम की जांच और शिकायत के लिए है। झारखंड की पहल पड़ी धीमी
प्रतिबिंब ऐप : इसे झारखंड पुलिस को साइबर अपराध से निपटने में सहायता करने के लिए विशेष रूप से विकसित किया गया था। शुरुआत में इसका बेहतर उपयोग किया गया। लेकिन अब इसका उपयोग धीमा हो गया है।
साइबरसेफ : पोर्टल व्यक्तियों को ऑनलाइन अपनी व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा और घोटालों से बचने के बारे में शिक्षित करता था। लेकिन अब पेज ओपन ही नहीं होता। ऐप अपराधियों तक पहुंचने में पुलिस की मदद करेगा
साइबर अपराध की रोकथाम के लिए केवल शिकायत पोर्टल, ऐप और हेल्पलाइन नंबर पर्याप्त नहीं हैं। साइबर फ्रॉड की रोकथाम के लिए अपराधियों की पहचान और गिरफ्तारी बेहद जरूरी है। अभिज्ञान ऐप पुलिस को अपराधियों तक तेजी से पहुंचने में मदद कर सकती है। इससे क्रिमिनल की मैपिंग ऑल ओवर इंडिया में हो सकेगी। लेकिन पुलिस को अपना डेटा बेस स्ट्रांग करना होगा।- मुकेश चौधरी, भास्कर एक्सपर्ट अपराधियों की पहचान तेजी से की जा सकेगी
अभिज्ञान ऐप को भारत की पुलिस व्यवस्था के लिए एक बड़े तकनीकी बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। यह ऐप अपराधियों की पहचान को तेज, सटीक और डिजिटल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। हालांकि साइबर अपराध की शिकायत के लिए पहले से एनसीआरपी पोर्टल, 1930 हेल्पलाइन नंबर मौजूद हैं। – प्रदीप कुमार, साइबर डीएसपी, रांची
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