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Unique Love Story: दरभंगा के कल्याण भास्कर और नेपाल की सुगंधा वर्मा की मुलाकात सोशल मीडिया से हुई थी. धीरे-धीरे ये दोस्ती, प्यार और फिर शादी में बदली लेकिन दोनों के जीवन में ऐसा समय भी आया जब सुगंधा को न भारत और न ही नेपाल का सिटिजन माना जा रहा था. इस कठिन दौर में भी दोनों ने एक-दूसरे का हाथ थामे रखा और आज दो बच्चों के साथ खुशहाल जीवन जी रहे हैं.
जमशेदपुर. कहते हैं कि सच्चा प्यार न रंग देखता है, न जात-पात, न दूरी और न ही देशों की सीमाएं. जब दो दिल एक-दूसरे के लिए धड़कने लगते हैं, तो हर मुश्किल रास्ता भी आसान हो जाता है. ऐसी ही एक प्रेरणादायक प्रेम कहानी है दरभंगा, बिहार के रहने वाले कल्याण भास्कर और नेपाल की सुगंधा वर्मा की, जिन्होंने अपने प्यार और विश्वास के दम पर कई चुनौतियों को पार कर एक नई मिसाल कायम की.
सोशल मीडिया से मिले थे
कल्याण भास्कर पिछले नौ वर्षों से जमशेदपुर स्थित एक्सएलआरआई में सस्टेनेबिलिटी एंड पब्लिक पॉलिसी के प्रोफेसर हैं. वहीं, सुगंधा वर्मा पिछले 15 वर्षों से कोल इंडिया में अपनी सेवाएं दे रही हैं. दोनों की मुलाकात वर्षों पहले सोशल मीडिया के माध्यम से हुई थी. शुरुआती बातचीत धीरे-धीरे दोस्ती में बदली और फिर यह दोस्ती गहरे प्रेम में बदल गई. अलग-अलग देशों में रहने के बावजूद दोनों के बीच विश्वास और समझ का रिश्ता लगातार मजबूत होता गया.
कई वर्षों तक एक-दूसरे को समझने के बाद दोनों ने अपने रिश्ते को नया नाम देने का फैसला किया. 12 दिसंबर 2014 को दोनों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ विवाह किया और जून 2015 में कोलकाता में कोर्ट मैरिज भी कर ली. यह शादी भारत-नेपाल मैत्री संधि के प्रावधानों के तहत हुई थी. परिवार और दोस्तों ने भी इस रिश्ते को भरपूर समर्थन दिया.
न यहां की नागरिक, न नेपाल की
हालांकि, शादी के बाद उनकी जिंदगी में एक ऐसा दौर आया, जिसने दोनों की परीक्षा ले ली. नागरिकता से जुड़ी कानूनी प्रक्रिया के दौरान पता चला कि सुगंधा की भारतीय नागरिकता की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई थी. वर्ष 2017 से 2018 के बीच लगभग एक वर्ष तक वह ऐसी स्थिति में रहीं, जब उन्हें न भारत का नागरिक माना जा रहा था और न ही नेपाल का. इस कारण वह ‘स्टेटलेस सिटिजन’ की स्थिति में पहुंच गईं. यह समय उनके लिए बेहद तनावपूर्ण था. कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों की कमी के कारण रोजमर्रा के कामों से लेकर प्रशासनिक प्रक्रियाओं तक में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा.
हमेशा दिया पत्नी का साथ
इस कठिन दौर में कल्याण ने हर कदम पर अपनी पत्नी का साथ दिया. दोनों ने धैर्य, विश्वास और कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए सभी चुनौतियों का सामना किया. आखिरकार समय के साथ सारी बाधाएं दूर हुईं और सुगंधा को जरूरी अधिकार मिले. इस संघर्ष ने उनके रिश्ते को और अधिक मजबूत बना दिया.
आज यह दंपति खुशहाल जीवन जी रहा है. उनकी नौ वर्ष की बेटी ईशान्वी और पांच वर्ष का बेटा राघव उनके जीवन की सबसे बड़ी खुशियां हैं. कल्याण और सुगंधा की कहानी यह साबित करती है कि सच्चा प्यार किसी सीमा, भाषा या नागरिकता का मोहताज नहीं होता. अगर रिश्ते में विश्वास, धैर्य और समर्पण हो, तो हर मुश्किल को पार किया जा सकता है.
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बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें