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धान का बिचड़ा भी थोड़ा-थोड़ा करके लगाते रहें : डॉ. अशोक




गढ़वा | बाबू दिनेश सिंह विश्वविद्यालय, गढ़वा के कृषि व वानिकी संकाय विभाग के डीन डॉ. अशोक कुमार ने कहा है कि अलनीनो का प्रभाव अब दिखाई पड़ने लगा है। झारखंड में इस वर्ष खरीफ में अभी तक मानसूनी वर्षा में एक तिहाई से ज्यादा की कमी बताई जा रही है। कारण, मानसून ट्रफ का कमजोर होना बताया जा रहा है। साथ ही मानसून की वर्षा के लिए बंगाल की खाड़ी से लगातार नमी वाली हवाओं का आना जरूरी होता है। परंतु अभी मजबूत सिस्टम नहीं बन पा रहा है। इसलिए बादल तो बन रहे हैं, लेकिन अच्छी वर्षा का अभाव है। कुछ समय से मानसून के आगे बढ़ने की गति धीमी रही है। इसके कारण गढ़वा एवं इसके आसपास के जिलों में सामान्य से बहुत कम वर्षा हुई है। परंतु पिछले सप्ताह कहीं हल्की, तो कहीं मध्यम दर्जे की वर्षा रिकॉर्ड की गई है। पुनः अब 27 जून से अच्छी वर्षा का पूर्वानुमान है। वैसे 27 से पूर्व भी कहीं छीटपुट, तो कहीं मध्यम दर्जे की वर्षा होगी। दिन का अधिकतम तापमान 33 से 38, एवं रात का न्यूनतम तापमान 25 से 28 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है। उन्होंने कहा है कि खेत जोतने लायक स्थिति होने पर दलहन में अरहर, उर्द, मूंग, एवं तेलहन में मूंगफली और तिल और धान्य फसल में मक्का की बुवाई जल्द से जल्द करने की कोशिश करें। धान का बिचड़ा भी थोड़ा-थोड़ा करके लगाते रहें। जहां धान का बिचड़ा 14-15 दिन का हो गया हो, अच्छी वर्षा होने पर रोपाई करें। दलहन-तेलहन में बुवाई के समय प्रति एकड़ डीएपी 45 किलोग्राम, यूरिया 5 किलोग्राम, एमओपी यानी पोटाश खाद 17 किलोग्राम, सल्फर पाउडर 10 किलोग्राम, बोरेक्स पाउडर (10% वाला) 4 किलोग्राम, एवं चुना या डोलोमाइट 1.5 क्विंटल प्रयोग करें। ओल, अरबी (पेचकी/कच्चु), हल्दी एवं अदरक की फसलों में 30 दिनों बाद 30 से 40 किलो यूरिया, एवं 12 से 15 किलो एमओपी डालें। पुनः 60 दिनों बाद इतनी ही मात्रा में खाद डालें। खरीफ सब्जी की फसलों में पानी निकास की व्यवस्था बनाए रखें। डॉ. अशोक कृ​िष वैज्ञानिक गढ़वा । आप खेती-किसानी से जुड़े किस विषय पर जानकारी चाहते हैं, वॉट्सएप नंबर 8092597083 पर सिर्फ मैसेज करें।



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