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’56 नहीं, 50 विधायकों के नेता हैं हेमंत सोरेन’, सुप्रियो भट्टाचार्य के...


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Jharkhand Politics: झारखंड राज्यसभा चुनाव में हुई क्रॉस वोटिंग की चर्चा अब सियासी संग्राम में बदलती जा रही है. वहीं, हेमंत सोरेन की अगुवाई वाले INDIA गठबंधन के भीतर उठे सवालों को अब भाजपा खुलकर भुनाने में जुट गई है. झामुमो के महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य के यह कहने पर कि “हेमंत सोरेन अब 56 नहीं, बल्कि 50 विधायकों के नेता हैं”, भाजपा ने सरकार की कमजोरी का सार्वजनिक स्वीकारोक्ति बताया है.

'56 नहीं, 50 विधायकों के नेता हेमंत सोरेन', बयान पर झारखंड में सियासी संग्रामZoom

हेमंत सोरेन पर सुप्रियो भट्टाचार्य के बयान से गरमाई झारखंड की राजनीति, सीपी सिंह बोले- गठबंधन में सब ठीक नहीं

रांची. झारखंड राज्यसभा चुनाव के बाद सत्तारूढ़ INDIA गठबंधन में क्रॉस वोटिंग को लेकर शुरू हुआ विवाद अब खुलकर राजनीतिक बयानबाजी में बदल गया है. झामुमो के महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य के “हेमंत सोरेन अब 56 नहीं, बल्कि 50 विधायकों के नेता हैं” वाले बयान पर भाजपा के वरिष्ठ विधायक सीपी सिंह ने तीखा पलटवार किया है. उन्होंने कहा कि यह बयान खुद इस बात का प्रमाण है कि सत्ताधारी गठबंधन के भीतर गंभीर अंतर्कलह और अविश्वास पैदा हो गया है.

क्या है मामला, जानिए

बता दें कि झारखंड विधानसभा में INDIA गठबंधन (JMM + कांग्रेस + RJD + CPI(ML)) के कुल 56 विधायक हैं. राज्यसभा चुनाव में गठबंधन के पास दोनों सीटें जीतने लायक संख्या थी और इसी दम पर कांग्रेस ने प्रियंका गांधी के करीबी प्रणव झा को अपना उम्मीदवार बनाया था, लेकिन वोटिंग के दौरान कथित क्रॉस वोटिंग हुई. नतीजा यह हुआ कि कांग्रेस उम्मीदवार हार गए और भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवानी जीत गए.

“56 नहीं, 50 विधायकों के नेता”, किसने और क्यों कहा?

दरअसल, यह बयान झामुमो के महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने दिया है जो इंडिया गठबंधन के भितरखाने के असंतोष को सार्वजनिक कर रहा है. उनका कहना था कि INDIA गठबंधन के 56 विधायकों में से केवल 50 विधायकों ने गठबंधन के उम्मीदवारों के पक्ष में वोट दिया. इसलिए हेमंत सोरेन और राहुल गांधी उन्हीं 50 विधायकों के नेता हैं, जिन्होंने गठबंधन के साथ मतदान किया.ऐसे में चुनाव परिणाम में कांग्रेस उम्मीदवार को हार का सामना करना पड़ा और इसके बाद गठबंधन के भीतर क्रॉस वोटिंग को लेकर आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए.

’56 नहीं, 50 विधायक’ वाले बयान का मतलब क्या है?

राजनीति के जानकार कहते हैं कि झामुमो के महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य का यह बयान कि अब हेमंत सोरेन 56 नहीं, बल्कि 50 विधायकों के नेता हैं, इसके गहरे राजनीतिक निहितार्थ हैं. इस बयान का आशय यह था कि राज्यसभा चुनाव में गठबंधन के सभी विधायक एकजुट होकर मतदान नहीं कर सके और केवल 50 विधायकों ने गठबंधन के पक्ष में वोट दिया. यह विधानसभा की संख्या में किसी बदलाव का दावा नहीं, बल्कि राज्यसभा चुनाव में कथित क्रॉस वोटिंग पर राजनीतिक टिप्पणी थी. हालांकि विधानसभा में गठबंधन की आधिकारिक संख्या अब भी 56 ही है और “50 विधायक” की टिप्पणी को राज्यसभा चुनाव में कथित क्रॉस वोटिंग के संदर्भ में देखा जा रहा है.

सीपी सिंह ने साधा निशाना

वहीं दूसरी ओर भाजपा के वरिष्ठ विधायक सीपी सिंह ने इस बयान को लेकर झामुमो पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि “उनका घट रहा है, मेरा बढ़ रहा है.” उनके मुताबिक यह बयान साफ संकेत देता है कि सत्तारूढ़ गठबंधन में अब पहले जैसी एकजुटता नहीं बची है. उन्होंने यह भी कहा कि जिन विधायकों पर गद्दारी के आरोप लगाए जा रहे हैं, वही गठबंधन की कमजोर होती नींव को उजागर कर रहे हैं. सीपी सिंह ने इसी बयान को आधार बनाकर तंज कसा कि गठबंधन की दरार अब छिपी नहीं, बल्कि सरेआम दिखाई देने लगी है.

गठबंधन के भीतर आरोप-प्रत्यारोप

बता दें कि राज्यसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद कांग्रेस की ओर से सहयोगी दलों में आरजेडी और भाकपा माले के कुछ विधायकों पर क्रॉस वोटिंग के आरोप लगाए गए. दूसरी ओर इन दलों ने आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कांग्रेस नेतृत्व को पत्र लिखा और कहा कि उनके दोनों विधायकों ने गठबंधन के उम्मीदवार के पक्ष में ही मतदान किया. पार्टी ने उल्टा कांग्रेस के भीतर ही क्रॉस वोटिंग की आशंका जताई. लेकिन, इसके बाद भी यह विवाद महागठबंधन के भीतर जारी है और ऐसे में राज्यसभा चुनाव की क्रॉस वोटिंग अब झारखंड की सियासत में नए टकराव की वजह बन गई है.

क्या सरकार के बहुमत पर असर है?

बहरहाल, राजनीतिक बयानबाजी के बावजूद फिलहाल हेमंत सोरेन सरकार के बहुमत पर कोई संवैधानिक संकट नहीं है. विधानसभा में INDIA गठबंधन की आधिकारिक संख्या में कोई बदलाव नहीं हुआ है. हालांकि राज्यसभा चुनाव के बाद सामने आई बयानबाजी ने यह जरूर संकेत दिया है कि गठबंधन के भीतर विश्वास और समन्वय को लेकर सवाल उठ रहे हैं. आने वाले दिनों में यह विवाद झारखंड की राजनीति में और गहरा सकता है.

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Vijay jha

पत्रकारिता क्षेत्र में 22 वर्षों से कार्यरत. प्रिंट, इलेट्रॉनिक एवं डिजिटल मीडिया में महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन. नेटवर्क 18, ईटीवी, मौर्य टीवी, फोकस टीवी, न्यूज वर्ल्ड इंडिया, हमार टीवी, ब्लूक्राफ्ट डिजिट…और पढ़ें



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