बोकारो. प्रतिभा किसी संसाधन की मोहताज नहीं होती. बोकारो जिले के कसमार प्रखंड स्थित प्लस टू उच्च विद्यालय दांतू के 12वीं विज्ञान के चार विद्यार्थियों ने यह साबित कर दिखाया है. विद्यालय के पूनम पाल, आलोक कुमार, परी कुमारी और भीम नायक ने मिलकर एक स्मार्ट सोलर ड्रायर तैयार किया है, जो फल, सब्जियों, पत्तियों और कृषि उत्पादों को स्वच्छ और जल्दी सुखाने में सक्षम है.
स्मार्ट सोलर ड्रायर के निर्माण में शामिल छात्र आलोक कुमार ने बताया कि उन्हें इसका आइडिया दांतू गांव की स्थानीय परिस्थितियों को देखकर आया. गांव के कई किसान और विक्रेता फल-सब्जियों को सुरक्षित रखने में परेशानी झेलते हैं. अक्सर उनके उत्पाद खराब हो जाते हैं और उन्हें खुले में धूल और गंदगी के बीच चीजें सुखाना पड़ता है.
सीनियर्स से मिली प्रेरणा
ऐसे में इसी समस्या का समाधान खोजने के लिए उन्होंने अपने सहपाठियों के साथ चर्चा की और एक ऐसा उपकरण बनाने का निर्णय लिया, जो सूरज की ऊर्जा का उपयोग कर उत्पादों को स्वच्छ और तेज गति से सुखा सके. ऐसे में विद्यालय में पहले भी सीनियर विद्यार्थियों द्वारा सोलर ट्री समेत कई सौर ऊर्जा आधारित परियोजनाएं बनाई जा चुकी थीं, जिससे उन्हें प्रेरणा मिली.
विद्यार्थियों के कई महीनों तक लगातार रिसर्च और एक्सपेरिमेंट के बाद यह स्मार्ट सोलर ड्रायर तैयार हो सका. यह उपकरण सूर्य की रोशनी की ऊर्जा और तापमान को मेंटेन कर फल, सब्जियां, चिप्स, हर्बल पत्तियां और अन्य उत्पादों को हाइजीनिक तरीके से सुखाता है.
इसकी विशेषता यह है कि यह पूरी तरह से ऑटोमेटिक है और अलग-अलग उत्पादों के अनुसार तापमान सेट करने की सुविधा भी उपलब्ध कराता है. वहीं खराब मौसम की स्थिति में उत्पादों को सुरक्षित रखने में यह मददगार साबित हो सकता है.
छोटे किसानों की आय बढ़ाने का लक्ष्य
छात्रा पूनम पाल ने बताया कि वर्तमान मॉडल में एक बार में लगभग 5 से 6 किलोग्राम सामग्री को सुखाया जा सकता है. उनका उद्देश्य इस तकनीक को गांव के छोटे और सीमांत किसानों तक पहुंचाना है.
उन्होंने आगे बताया कि मोरिंगा (सहजन) की पत्तियों, नीम की पत्तियों और अन्य औषधीय पौधों को सुखाकर उनका पाउडर तैयार किया जा सकता है, जिसे आयुर्वेदिक उत्पादों के रूप में बाजार में बेचा जा सकता है. इससे किसानों के लिए आय का नया स्रोत विकसित हो सकता है.
सौर ऊर्जा और सेंसर तकनीक का उपयोग
आलोक कुमार के अनुसार, इस स्मार्ट सोलर ड्रायर में 50 वाट का सोलर पैनल, ट्रांसपेरेंट ग्लास युक्त बॉक्स, सेंसर, आर्डुइनो, फैन, एलसीडी डिस्प्ले (Arduino) और कीपैड का उपयोग किया गया है. इन तकनीकों की मदद से उत्पादों को नियंत्रित तापमान पर वैज्ञानिक तरीके से सुखाया जा सकता है.
वहीं इस परियोजना को सफल बनाने में स्कूल के शिक्षक अनिमेष का महत्वपूर्ण सहयोग मिला. विद्यार्थियों को इस नवाचार के लिए फेलोशिप के माध्यम से आर्थिक सहायता भी मिली. पूरे मॉडल को तैयार करने में लगभग 11 हजार रुपये की लागत आई है.
भविष्य में एआई आधारित मॉडल बनाने की तैयारी
आखिर में विद्यार्थियों ने कहा कि उनका लक्ष्य भविष्य में इस स्मार्ट सोलर ड्रायर को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित तकनीक से और अधिक उन्नत बनाना है, जो बड़े स्तर पर हर किसी के काम आ सके. फिलहाल भी स्टूडेंट्स का यह प्रयास सराहनीय है और किसानों के बड़े काम का साबित हो सकता है.