कोडरमा. अक्सर कहा जाता है कि अगर लक्ष्य बड़ा हो, तो छोटी मंजिलों तक पहुंचना अपेक्षाकृत आसान हो जाता है. इस कहावत को झुमरी तिलैया के अमित प्रकाश ने सच साबित कर दिखाया है. यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे अमित प्रकाश ने अपने पहले ही प्रयास में बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) की 70वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में सफलता हासिल कर ग्रामीण विकास पदाधिकारी बनने का गौरव प्राप्त किया है. उन्होंने 496वीं रैंक हासिल कर अपने परिवार और जिले का नाम रोशन किया है.
दो बार यूपीएससी में मिली असफलता, पहले प्रयास में बीपीएससी हुए पास
झुमरी तिलैया शहर के मुख्य डाकघर के सामने रहने वाले जेरॉक्स और स्टेशनरी दुकान संचालक राजेंद्र प्रसाद गुप्ता और रेखा देवी के पुत्र अमित प्रकाश ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा कैलाश राय सरस्वती विद्या मंदिर से पूरी की. उन्होंने वर्ष 2018 में मैट्रिक और 2020 में इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण की. इसके बाद स्नातक और स्नातकोत्तर की पढ़ाई जेजे कॉलेज से वर्ष 2025 में पूरी की.
लोकल 18 से विशेष बातचीत में अमित ने बताया कि वर्ष 2024 से उन्होंने घर पर रहकर यूपीएससी की तैयारी शुरू की थी. उन्होंने दो बार यूपीएससी की परीक्षा भी दी, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी. हालांकि, इन प्रयासों ने उनके ज्ञान और तैयारी को इतना मजबूत बना दिया कि बीपीएससी में पहले ही प्रयास में सफलता मिल गई.
घर में रहकर सेल्फ स्टडी और ऑनलाइन स्टडी मैटेरियल से की तैयारी
उन्होंने बताया कि सिविल सेवा में जाने की प्रेरणा उन्हें फिल्मों और वास्तविक जीवन के कई अधिकारियों की प्रेरणादायक कहानियों से मिली. उनका उद्देश्य जरूरतमंद लोगों की सेवा करना और सरकार की विकास योजनाओं को आम लोगों तक पहुंचाने में योगदान देना है. सफलता के पीछे का राज बताते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने किसी बड़े शहर में जाकर कोचिंग नहीं की. उनकी पूरी तैयारी सेल्फ स्टडी और ऑनलाइन अध्ययन सामग्री के माध्यम से हुई.
वे आगे कहते हैं कि शुरुआत में वह एक सप्ताह के लिए पटना भी गए थे. लेकिन वहां जाकर महसूस हुआ कि जो विषय पढ़ाए जा रहे हैं, उनकी तैयारी घर पर रहकर भी की जा सकती है. इसके बाद वे वापस कोडरमा लौट आए और पढ़ाई के साथ-साथ पिता की जेरॉक्स एवं स्टेशनरी दुकान में भी सहयोग देने लगे.
घंटे के हिसाब से नहीं, लक्ष्य निर्धारित करके पढ़ना है जरूरी
अमित प्रकाश सुबह 9 से 10 बजे तक और शाम 7 से 9 बजे तक दुकान में पिता का हाथ बंटाते थे, जबकि दिन का अधिकांश समय पढ़ाई को देते थे. उन्होंने बताया कि वह घंटों के हिसाब से नहीं, बल्कि रोजाना लक्ष्य निर्धारित कर पढ़ाई करते थे. जब तक तय लक्ष्य पूरा नहीं होता था, तब तक पढ़ाई जारी रखते थे.
प्रतियोगी परीक्षाओं में पूरे सिलेबस के पीछे भागने की बजाय उन महत्वपूर्ण विषयों पर ध्यान देना चाहिए, जहां से प्रश्न पूछे जाने की अधिक संभावना होती है. करंट अफेयर्स को उन्होंने सबसे चुनौतीपूर्ण विषय बताया और कहा कि इसमें आत्मविश्वास बनाए रखना बेहद जरूरी होता है.
एआई और बड़ी बहन के सहयोग से मिली सफलता
अमित कहते हैं कि मुख्य परीक्षा की तैयारी के दौरान उन्होंने उत्तर लेखन का अभ्यास भी किया. कुछ कोचिंग संस्थानों से मूल्यांकन कराया, लेकिन अपेक्षित मार्गदर्शन नहीं मिला. इसके बाद उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और चैटजीपीटी की मदद से अपने उत्तर लेखन कौशल को बेहतर बनाया.
वे अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, परिवार और विशेष रूप से अपनी बड़ी बहन शिल्पी गुप्ता को देते हैं. शिल्पी भी सिविल सेवा की तैयारी कर रही हैं और जेपीएससी के इंटरव्यू तक पहुंच चुकी हैं. उन्होंने कहा कि बड़ी बहन के मार्गदर्शन और सहयोग ने उनकी तैयारी को अधिक मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.