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‘हमारे बच्चे दलित के हाथ का खाना नहीं खाएंगे’: दलित महिला बनी...


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दलित महिला बनी रसोइया, तो पूरे गांव ने आंगनवाड़ी पर जड़ दिया ताला

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प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस कप्तानों ने ग्रामीणों के साथ कई दौर की विधिक और कूटनीतिक बैठकें कीं. अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझाने का कड़ा प्रयास किया कि कानूनन जाति के आधार पर किसी का विरोध करना एक गंभीर अपराध है. प्रशासन की इन तमाम बार-बार की कोशिशों और मान-मनौव्वल के बावजूद ग्रामीण अपनी रूढ़िवादी जिद पर अड़े रहे.

दलित महिला बनी रसोइया, तो पूरे गांव ने आंगनवाड़ी पर जड़ दिया तालाZoom

आंगनवाड़ी में दलित रसोइये की एंट्री का ग्रामीणों ने बहिष्कार किया है. (सांकेतिक तस्वीर)

भुवनेश्वर: बलांगीर ज़िले में एक दलित महिला को रसोइया के तौर पर नियुक्त किए जाने के विरोध में ग्रामीणों ने आंगनवाड़ी केंद्र पर ताला लगा दिया. यह घटना बलांगीर ज़िले के मुरीबहाल ब्लॉक के घुसुरामुंडा आंगनवाड़ी केंद्र में हुई. खबरों के अनुसार, हाल ही में घुसुरामुंडा आंगनवाड़ी केंद्र में पुन्या हरिपाल नाम की एक दलित महिला को नया रसोइया नियुक्त किया गया था.

लेकिन, स्थानीय आदिवासी समुदाय के लोगों ने इस नियुक्ति का कड़ा विरोध किया और दलित रसोइए के हाथ का बना खाना अपने बच्चों को खिलाने से इनकार कर दिया. उन्होंने पिछले चार दिनों से आंगनवाड़ी केंद्र पर ताला लगा रखा है, जिससे कामकाज ठप हो गया है.

इस घटना के बाद, CDPO पूर्णिमा बैथारू, मुरीबहाल के तहसीलदार जगदीश करतामी और IIC बुलु मुंडा ने समस्या सुलझाने के लिए ग्रामीणों से बातचीत की. प्रशासन की बार-बार कोशिशों के बावजूद ग्रामीण अपनी बात पर अड़े रहे और अब तक कोई समाधान नहीं निकल पाया है. आंगनवाड़ी केंद्र अभी भी बंद है और इलाके में तनाव बना हुआ है. इस घटना ने जाति-आधारित भेदभाव को लेकर चिंता बढ़ा दी है.

रसोइया पुन्या हरिपाल ने कहा, “मुझे 15 दिन पहले नियुक्त किया गया था. लेकिन, ग्रामीण जाति के आधार पर आपत्ति जता रहे हैं और अपने बच्चों को आंगनवाड़ी केंद्र नहीं भेज रहे हैं. हालांकि प्रशासनिक अधिकारियों ने ग्रामीणों से बातचीत की, लेकिन अब तक कोई सकारात्मक नतीजा नहीं निकला है.”



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