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The reality is that more than 2,000 teachers are deputed in just...


रांची22 घंटे पहले

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शिक्षा विभाग को भेजा गया पत्र - Dainik Bhaskar

शिक्षा विभाग को भेजा गया पत्र

निर्वाचन आयोग ने दावा किया है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में किसी भी शिक्षक को नही लगाया जाएगा। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने इस संबंध में शुक्रवार को स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव को पत्र लिखा है। इसमें कहा है कि शिक्षकों का सबसे महत्वपूर्ण काम शिक्षण है।

विद्यार्थियों के हितों को देखते हुए पहले बीएलओ के रूप में कार्यरत सभी शिक्षकों को इस काम से मुक्त कर दिया गया है। बीएलओ के पद पर शिक्षकों की जगह अन्य कर्मचारियों को प्रतिनियुक्त किया गया है। केवल कुछ स्थानों पर विशेष परिस्थिति में ही शिक्षकों से बीएलओ का काम लिया जा रहा है। लेकिन सच्चाई इसके विपरीत है।

रांची समेत राज्य के सभी जिलों में अभी भी बड़े पैमाने पर शिक्षक बीएलओ का काम कर रहे हैं। सिर्फ रांची जिले में ही 2000 से अधिक शिक्षक इस काम में लगे हैं। इसके अलावा शिक्षक सुपरवाइजर की भी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। इन्हें हटाए बिना इन्हें एसआईआर के लिए वॉलेंटियर बना दिया है। ऐसे में वे पढ़ाई के साथ चुनावी जिम्मेदारी का दोहरा बोझ झेल रहे हैं।

इधर, बोर्ड परीक्षा में 10% से ज्यादा खराब रिजल्ट पर कार्रवाई का निर्देश

स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने राज्य के सभी जिलों के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि बोर्ड परीक्षा में 10 प्रतिशत से अधिक खराब परिणाम देने वाले स्कूलों के शिक्षकों की जवाबदेही तय कर कार्रवाई की जाए। इस निर्देश के बाद राज्य के विभिन्न जिलों में कार्रवाई शुरू कर दी गई है। ऐसे में शिक्षकों के सामने दोहरी चुनौती है। एक ओर चुनाव आयोग के निर्देश पर उन्हें लंबे समय तक चुनाव से जुड़े काम करने पड़ते हैं। ऐसे में वे स्कूलों में समय नहीं दे पाते।

एसआईआर-2026 का यह है कार्यक्रम

30 जून से 29 जुलाई तक घर-घर गणना

5 अगस्त को प्रारूप मतदाता सूची का प्रकाशन

5 अगस्त से 4 सितंबर तक दावा एवं आपत्ति

7 अक्टूबर: अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन

रांची जिले के हर विस क्षेत्र में 300 से अधिक की प्रतिनियुक्ति

रांची जिला के अंतर्गत सात विधानसभा क्षेत्र हैं। इसमें रांची, हटिया, सिल्ली, मांडर, कांके, खिजरी और तमाड़ विधान सभा क्षेत्र शामिल हैं। प्रत्येक विधानसभा में तीन सौ से अधिक शिक्षक एसआईआर के लिए प्रतिनियुक्त हैं। यानी सात विधानसभा में 2,000 से अधिक शिक्षक सेवा दे रहे हैं। इसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। क्योंकि शिक्षक पढ़ाने के बजाय एसआईआर के काम में लगे हैं।



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