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दुधारू पशुओं की खतरनाक बीमारी है एफएमडी, पलामू में लग रही है...


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दुधारू पशुओं की खतरनाक बीमारी है एफएमडी, पलामू में लग रही है फ्री वैक्सीन

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Palamu Cattle FMD Vaccination: पलामू में खुरपका-मुंहपका (एफएमडी) बीमारी से पशुओं को बचाने के लिए टीकाकरण अभियान शुरू हुआ है. 1 जुलाई से 29 अगस्त तक 4 लाख दुधारू पशुओं को मुफ्त वैक्सीन लगेगी. इस बीमारी से ग्रस्त होने पर पशु बहुत तकलीफ में आ जाते हैं इसलिए उन्हें वैक्सीन जरूर लगवाएं और अगर समस्या हो जाए तो इस प्रकार उनका ध्यान रखें.

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पलामू. आज के समय में कई किसान पशुपालन कर अच्छी कमाई करते हैं. वहीं कई इलाकों में ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले दुधारू पशुओं को खुरपका-मुंहपका (एफएमडी) जैसी गंभीर बीमारी हो जाती है जिससे पशु बहुत तकलीफ में आ जाते हैं. इससे बचाने के लिए पलामू में बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियान शुरू हो गया है. यह बीमारी पशुओं के लिए गंभीर समस्या है. दरअसल, एफएमडी दुधारू पशुओं की सबसे खतरनाक संक्रामक बीमारियों में गिनी जाती है.

इस बीमारी में पशु के मुंह, जीभ और खुर में घाव हो जाते हैं, जिससे उनका खाना-पीना और चलना-फिरना मुश्किल हो जाता है. बीमारी बढ़ने पर दूध उत्पादन तेजी से घट जाता है और पशु कमजोर होने लगता है. गर्भवती पशुओं में यह बीमारी गर्भपात (एबॉर्शन) का कारण भी बन सकती है, जिससे पशुपालकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है.

शुरू हुआ वैक्सीनेशन अभियान
पलामू जिले के जिला पशुपालन पदाधिकारी प्रभाकर सिन्हा ने बताया कि भारत सरकार के एफएमडी राउंड-6 अभियान के तहत 1 जुलाई से 29 अगस्त तक जिले के करीब 4 लाख दुधारू पशुओं को निशुल्क वैक्सीन लगाई जाएगी. टीकाकरण से पहले हर पशु की टैगिंग की जाएगी, ताकि उसका पूरा रिकॉर्ड तैयार हो सके और भविष्य में भी नियमित निगरानी रखी जा सके. सरकार का लक्ष्य इस बीमारी को जड़ से खत्म करना है.

खुरपका-मुंहपका से घट जाता है दूध उत्पादन
उन्होंने आगे बताया कि इस बीमारी की शुरुआत हल्के बुखार से होती है, जो बढ़कर 105 डिग्री तक पहुंच सकता है. इसमें पशु के मुंह से बहुत अधिक लार निकलने लगती है. वह खाना-पीना और जुगाली करना छोड़ देता है. बाद में जीभ और मुंह में छाले पड़ जाते हैं और खुर में सूजन और सड़न शुरू हो जाती है. समय पर इलाज नहीं मिलने पर घाव गंभीर हो सकते हैं और उनमें संक्रमण भी फैल सकता है.

घरेलू उपाय केवल शुरुआती राहत, इलाज जरूरी
उन्होंने कहा कि शुरुआती लक्षण दिखने पर एक मग पानी में थोड़ी मात्रा में पोटेशियम परमैंगनेट मिलाकर हल्का गुलाबी घोल तैयार करें और उससे पशु के मुंह व जीभ की सफाई करें. इसके बाद जीभ पर ग्लिसरीन लगाने से कुछ राहत मिलती है. खुर के घाव को पोटेशियम परमैंगनेट या फिटकरी वाले पानी से धोकर साफ किया जा सकता है और प्रभावित स्थान पर हिमेक्स क्रीम लगाने की सलाह दी जाती है. हालांकि, ये केवल प्राथमिक उपाय हैं. सही उपचार के लिए तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करना जरूरी है.

मुफ्त टीकाकरण का लाभ उठाने की अपील
पशुपालन विभाग ने सभी पशुपालकों से अपील की है कि वे अपने गाय, भैंस और दूसरे दुधारू पशुओं का निशुल्क टीकाकरण जरूर कराएं. समय पर लगने वाला यह टीका न केवल पशुओं को गंभीर बीमारी से बचाएगा, बल्कि दूध उत्पादन, पशुओं की सेहत और किसानों की आय को भी सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.

About the Author

Raina Shukla

बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें



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