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Maruti India : जापान के साथ मजबूत रिश्‍ते का हॉलमार्क है मारुति,...


नई दिल्‍ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जापान के पीएम सनाए तकायची के साथ मिलकर हरियाणा के खारखोदा में मारुति सुजुकी के 35 हजार करोड़ के नए उत्‍पादन प्‍लान का उद्घाटन किया है. जापान ने इस कंपनी में 70 हजार करोड़ के निवेश का ऐलान किया है, जिसमें से 35 हजार करोड़ की लागत वाली यूनिट का उद्घाटन भी हो चुका है. मारुति सुजुकी सिर्फ एक कंपनी नहीं है. यह भारत और जापान के मजबूत रिश्‍तों का हॉलमार्क है, जो पिछले 45 साल से अपने भरोसे को बनाए हुए हैं. 2 जुलाई को एक और प्‍लांट की शुरुआत ने एक बार फिर दोनों देशों के रिश्‍तों और इस कंपनी के इतिहास को ताजा कर दिया, जिसकी शुरुआत साल 1981 में हुई थी.

मारुति एक समय सरकारी कंपनी थी, जिसकी स्‍थापना साल 1981 में मारुति उद्योग लिमिटेड (Maruti Udyog Limited) के रूप में की गई थी. इसका मकसद देश के आम लोगों के लिए छोटी और किफायती कार बनाना था और इस उद्देश्‍य को पूरा करने में साथ निभाने साल 1982 में जापान भी जुड़ गया. तब जापान की कंपनी सुजुकी मोटर कॉरपोरेशन के साथ एक संयुक्‍त उद्यम के रूप में इस कंपनी ने अपना सफर मारुति-सुजुकी के नाम से शुरू किया. शुरुआत में सुजुकी की इस कंपनी में 26 फीसदी हिस्‍सेदारी थी. आज यह हिस्‍सेदारी बढ़कर 58.53 फीसदी पहुंच चुकी है. सरकार ने भी अपनी हिस्‍सेदारी धीरे-धीरे कम कर दी और आज कंपनी की 41.47 फीसदी हिस्‍सेदारी पब्लिक शेयरहोल्‍डर्स, म्‍यूचुअल फंड, देसी-विदेशी संस्‍थागत निवेशकों की है.

कब आई पहली बार और किसने खरीदी
मारुति और सुजुकी ने मिलकर साल 1983 में पहली मारुति 800 कार को लॉन्‍च किया. तत्‍कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इस पहली कार को दिल्‍ली के ग्राहक हरपाल सिंह को खुद सौंपी थी. यह कार छोटी तो थी, लेकिन इसका धमाका बहुत बड़ा हुआ और भारतीय ऑटोमोबाइल इतिहास की सबसे ज्‍यादा बिकने वाली कार बन गई. साल 1983 से 1990 तक इस कार का जलवा देशभर में दिखने लगा और कंपनी के पास खरीदारों की लंबी वेटिंग लिस्‍ट बन गई.

उदारीकरण ने बनाए नए मौके
साल 1991 में जब भारत में उदारीकरण शुरू हुआ तो तमाम विदेशी कंपनियों ने यहां कदम रखे. प्रतिस्‍पर्धा बढ़ी तो मारुति-सुजुकी ने भी अपना विस्‍तार करना शुरू किया. विदेशी कंपनियों से मुकाबला करने के लिए मारुति ने साल 1990 से 2000 के बीच अपने कई मॉडल उतारे, जिसमें ज्‍यादातर को भारतीय ग्राहकों ने काफी पसंद किया. इस दौरान Maruti Omni, Gypsy, Maruti Zen और Maruti Esteem जैसी कारों ने इस कंपनी को देशभर में स्‍थापित कर दिया.

सरकार ने बेच दी अपनी हिस्‍सेदारी
कंपनी जब देभ में पूरी तरह स्‍थापित हो गई तो सरकार ने अपनी हिस्‍सेदारी बेचनी शुरू कर दी और साल 2003 में पहला आईपीओ उतारा गया. इसके बाद कंपनी बाजार में नए नाम से लिस्‍ट हुई और इसका नाम बदलकर मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड (Maruti Suzuki India Limited) कर दिया गया. इसी दौरान कंपनी ने मारुति स्विफ्ट और डिजायर जैसे मॉडल भी लॉन्‍च किए जो आज तक इसके सुपरहिट मॉडल बने हुए हैं.

2010 से शुरू हुई एसयूवी की दौड़
साल 2010 के पहले तक देश में हैचबैक और प्रीमियम हैचबैक कारों का जलवा था, लेकिन इसके बाद एसयूवी की दौड़ शुरू हुई. मारुति ने इस प्रतिस्‍पर्धा में भी ब्रेजा और अर्टिगा जैसी कारों के बलबूते बड़ा बाजार हासिल किया. साल 2020 के बाद तो एसयूवी का पोर्टफोलियो लगातार बढ़ने लगा और कंपनी ने हाइब्रिड व इलेक्ट्रिक खंड में भी प्रवेश किया. इस दौरान निर्यात में लगातार ग्रोथ दिखने लगी तो कंपनी का हौसला भी बढ़ गया. देश के भीतर और बाहर बढ़ती डिमांड को पूरा करने के लिए नई उत्‍पादन यूनिट भी लगा दी. वित्‍तवर्ष 2026 में कंपनी ने करीब 24 लाख कारों का उत्‍पादन किया है.

2018 के बाद से बढ़ी चुनौती
मारुति का एक समय भारतीय बाजार पर एकछत्र राज था. साल 2018 तक भी देश के कुल बाजार में से 50 फीसदी से अधिक हिस्‍सेदारी इसी कंपनी की थी. इसके बाद ह्यूंडई, टाटा और महिंद्रा ने कड़ी चुनौती दी और बाजार हिस्‍सेदारी लगातार घटने लगी. आज कंपनी का मार्केट कैप करीब 4.5 लाख करोड़ रुपये है, जबकि बाजार हिस्‍सेदारी 40 फीसदी के आसपास बनी हुई है. कंपनी में 20 हजार से ज्‍यादा कर्मचारी काम करते हैं, जबकि इसके वाहन 100 से ज्‍यादा देशों में निर्यात किए जाते हैं. यही वजह है कि कंपनी ने अपनी उत्‍पादन क्षमता का लगातार विस्‍तार करने पर जोर दिया है.

4 में तीन प्‍लांट सिर्फ हरियाणा में
कंपनी ने देशभर में 4 उत्‍पादन प्‍लांट स्‍थापित किए हैं, जिसमें से तीन तो सिर्फ हरियाणा में ही लगाए हैं. एक उत्‍पादन प्‍लांट गुजरात में लगा है. हरियाणा के तीनों प्‍लांट गुरुग्राम, मानेसर और खारखोदा में हैं. फिलहाल कंपनी का फोकस ई-कार बनाने और हाइब्रिड मॉडल विकसित करने पर है. नई उत्‍पादन यूनिट लगाने के साथ ही कंपनी ने अपनी उत्‍पादन क्षमता को बढ़ाकर सालाना 40 लाख करने का लक्ष्‍य रखा है. कंपनी का लक्ष्‍य है कि भारत को ग्‍लोबल एक्‍सपोर्ट का हब बनाया जाए. कंपनी अपने विशाल डीलर नेटवर्क और कम मेंटेनेंस के बूते आज भी घरेलू बाजार पर राज करती है.



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