Last Updated:
लखीमपुर खीरी में स्वयं सहायता समूह महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रहा है. माया प्रेरणा समूह की महिलाएं कैंटीन चलाकर आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं. राम बेटी बताती हैं कि शुरुआत आसान नहीं थी. सीमित संसाधनों के साथ काम शुरू किया गया, लेकिन समूह की सभी महिलाओं ने मिलकर मेहनत की धीरे-धीरे लोगों का विश्वास बढ़ा और कैंटीन में ग्राहकों की संख्या भी लगातार बढ़ती चली गई. आज उनकी कैंटीन में प्रतिदिन बड़ी संख्या में कर्मचारी और आम लोग नाश्ता और चाय का आनंद लेने पहुंचते हैं.
लखीमपुर खीरीः उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में स्वयं सहायता समूह महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता का मजबूत माध्यम बनकर उभरा है. कभी घर की चारदिवारी तक सीमित रहने वाली महिलाएं आज अपने हुनर और मेहनत के दम पर न सिर्फ परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं, बल्कि समाज में अपनी अलग पहचान भी बना रही हैं. जिले में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत गठित स्वयं सहायता समूह महिलाओं को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने का सफल काम कर रहे हैं.
इसी कड़ी में लखीमपुर खीरी के माया प्रेरणा स्वयं सहायता समूह की महिलाएं अपनी मेहनत से सफलता की नई कहानी लिख रही हैं. समूह की सदस्य राम बेटी ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2017 में स्वयं सहायता समूह से जुड़कर अपने जीवन की नई शुरुआत की थी. शुरुआत में उन्हें छोटे-छोटे बचत कार्यों और समूह संचालन की जानकारी दी गई इसके बाद वर्ष 2018 में उन्होंने कैंटीन का संचालन शुरू किया, जो आज उनकी आमदनी का प्रमुख साधन बन चुका है.
सीमित संसाधनो से शुरू किया काम
राम बेटी बताती हैं कि शुरुआत आसान नहीं थी. सीमित संसाधनों के साथ काम शुरू किया गया, लेकिन समूह की सभी महिलाओं ने मिलकर मेहनत की धीरे-धीरे लोगों का विश्वास बढ़ा और कैंटीन में ग्राहकों की संख्या भी लगातार बढ़ती चली गई. आज उनकी कैंटीन में प्रतिदिन बड़ी संख्या में कर्मचारी और आम लोग नाश्ता और चाय का आनंद लेने पहुंचते हैं. उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में विकास भवन परिसर में उनकी कैंटीन संचालित हो रही है. यहां सुबह से लेकर शाम तक चाय, नाश्ता और स्वादिष्ट पराठों की अच्छी मांग रहती है खासतौर पर पनीर पराठा और आलू पराठा लोगों की पहली पसंद बने हुए हैं. इसके अलावा चाय की बिक्री भी काफी अच्छी होती है, जिससे समूह को नियमित और अच्छा मुनाफा प्राप्त हो रहा है.
अलग अलग काम करती हैं समूह की महिलाएं
राम बेटी के अनुसार उनके माया प्रेरणा स्वयं सहायता समूह में कुल 11 महिलाएं शामिल हैं. सभी महिलाएं अपनी-अपनी जिम्मेदारियों के अनुसार अलग-अलग कार्य करती हैं. उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उनके जीवन में बड़ा बदलाव आया है पहले परिवार की जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन आज वे अपनी मेहनत से आय अर्जित कर रही हैं। इससे बच्चों की पढ़ाई, घर के खर्च और भविष्य की जरूरतों को पूरा करने में काफी मदद मिल रही है. आर्थिक आत्मनिर्भरता के साथ-साथ उनका आत्मविश्वास भी पहले से कहीं अधिक बढ़ा है.
स्वयं सहायता समूह से बदली जिंदगी
राम बेटी का कहना है कि यदि महिलाओं को सही मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और अवसर मिले तो वे किसी भी क्षेत्र में सफलता हासिल कर सकती हैं. स्वयं सहायता समूह ने उन्हें केवल रोजगार ही नहीं दिया, बल्कि नेतृत्व, टीमवर्क और आत्मविश्वास भी सिखाया है. आज वे अन्य महिलाओं को भी समूह से जुड़कर स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रेरित करती हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में स्वयं सहायता समूह महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का प्रभावी माध्यम बनते जा रहे हैं छोटे-छोटे व्यवसायों के जरिए महिलाएं अपने परिवार की आय बढ़ाने के साथ-साथ समाज में नई पहचान भी बना रही हैं. माया प्रेरणा स्वयं सहायता समूह इसकी एक प्रेरणादायक मिसाल है, जहां 11 महिलाओं की मेहनत ने एक छोटे से प्रयास को सफल व्यवसाय में बदल दिया है. आज यह कैंटीन सिर्फ चाय और पराठे बेचने का केंद्र नहीं है, बल्कि यह महिलाओं की मेहनत, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता का प्रतीक बन चुकी है.
About the Author
मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें