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नैनीताल की बरसात सिर्फ बादलों, हरियाली और ठंडी हवाओं के लिए ही खास नहीं होती, बल्कि इस मौसम में यहां के बाजार पहाड़ी फलों की खुशबू और रंगों से भी भर जाते हैं. अगर आप मानसून के दौरान नैनीताल घूमने आ रहे हैं, तो पहाड़ों की इन मौसमी सौगातों का स्वाद जरूर चखें.
मानसून के मौसम में नैनीताल की खूबसूरती कई गुना बढ़ जाती है. बादलों से ढकी पहाड़ियां, हरियाली और ठंडी हवाओं के बीच स्थानीय बाजार रंग-बिरंगे पहाड़ी फलों से सज जाते हैं. मल्लीताल, तल्लीताल और आसपास के बाजारों में ताजे आड़ू, प्लम, खुमानी, नाशपाती और सेब आसानी से मिल रहे हैं, इन फलों की प्राकृतिक मिठास और ताजगी पर्यटकों को खूब पसंद आती है. बरसात में नैनीताल घूमने आने वाले लोग यहां के स्थानीय फलों का स्वाद लेकर पहाड़ों की असली पहचान से रूबरू हो सकते हैं.
नैनीताल और आसपास के पहाड़ी इलाकों में बरसात के दौरान आड़ू होता है. हल्के लाल और पीले रंग का यह फल अपनी खुशबू और रसदार स्वाद के लिए जाना जाता है. स्थानीय पहाड़ी बागानों से आने वाले ताजे आड़ू बाजारों में पर्यटकों का ध्यान खींचते हैं. पहाड़ों की ठंडी जलवायु में उगा आड़ू स्वाद में अलग ही मिठास लिए होता है. इसे सीधे खाने के अलावा लोग जूस, जैम और मिठाइयों में भी इस्तेमाल करते हैं. मानसून ट्रिप के दौरान पहाड़ी आड़ू का स्वाद जरूर लेना चाहिए.
बरसात के मौसम में नैनीताल के बाजारों में प्लम यानी आलूबुखारा भी खूब बिकता है. इसका खट्टा-मीठा स्वाद बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को पसंद आता है. गहरे लाल, बैंगनी और पीले रंग में मिलने वाला यह फल देखने में जितना आकर्षक होता है, स्वाद में भी उतना ही खास होता है. पहाड़ी प्लम की ताजगी और रस इसे बाजार में मिलने वाले सामान्य फलों से अलग बनाती है. नैनीताल में यह फल रामगढ़-मुक्तेश्वर में सबसे ज्यादा उगता है, स्थानीय लोग इसे नमक-मिर्च के साथ भी खाते हैं. नैनीताल आएं तो प्लम का स्वाद आपकी यात्रा को और यादगार बना सकता है.
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खुमानी यानी एप्रिकॉट पहाड़ी इलाकों का बेहद लोकप्रिय मौसमी फल है. बरसात के आसपास इसके पेड़ों पर पीले और नारंगी रंग के छोटे-छोटे फल नजर आते हैं. इसका स्वाद हल्का मीठा और बेहद रसीला होता है. नैनीताल के आसपास के गांवों और स्थानीय बाजारों में खुमानी आसानी से मिल जाती है. कई परिवार इसे सुखाकर भी रखते हैं, ताकि लंबे समय तक इसका स्वाद लिया जा सके. खुमानी से जैम, चटनी और मिठाइयां भी बनाई जाती हैं. अगर आप नैनीताल आ रहे हैं तो जरूर खुमानी का स्वाद चखें.
बरसात के मौसम में पहाड़ी नाशपाती भी बाजारों में खूब नजर आती है. आकार में छोटी लेकिन स्वाद में बेहद मीठी और रसदार नाशपाती स्थानीय लोगों के साथ पर्यटकों की भी पसंद होती है. पहाड़ी क्षेत्रों की मिट्टी और मौसम में उगी नाशपाती की खुशबू अलग ही होती है. नैनीताल के मुक्तेश्वर, रामगढ़ के इलाकों में नाशपाती प्रमुखता से उगाई जाती है, वहीं पहाड़ी नूण के साथ इसे खाने का मजा दोगुना हो जाता है. अगर आप नैनीताल आ रहे हैं तो जरूर इस पहाड़ी फल का स्वाद लें.
सेब का नाम आते ही पहाड़ों की तस्वीर सामने आ जाती है. नैनीताल और कुमाऊं क्षेत्र में अलग-अलग मौसम में सेब की कई किस्में देखने को मिलती हैं. बरसात के दौरान बाजारों में मिलने वाले स्थानीय सेब आकार में भले ही छोटे हों, लेकिन उनका स्वाद बेहद खास होता है. इनकी मिठास और कुरकुरापन लोगों को खूब पसंद आता है, स्थानीय पहाड़ी क्षेत्रों में स्थित बागानों से आने वाले ये सेब ताजे और खुशबूदार होते हैं. नैनीताल की यात्रा में इन पहाड़ी सेब का स्वाद जरूर लें.
हिसालु पहाड़ों में मिलने वाला एक जंगली फल है, जो बरसात के मौसम में खास तौर पर दिखाई देता है. पीले और नारंगी रंग का यह छोटा फल स्वाद में हल्का खट्टा-मीठा होता है.<br />नैनीताल के मुक्तेश्वर निवासी नीरज बताते हैं कि पहाड़ी ढलानों और जंगलों के आसपास उगने वाला हिसालु स्थानीय लोगों के बचपन की यादों से जुड़ा हुआ है. इसे ताजा तोड़ा हुआ खाने का आनंद अलग ही होता है. कई जगहों पर स्थानीय लोग इसे बाजारों में भी बेचते हैं. नैनीताल के आसपास घूमते समय अगर हिसालु मिल जाए, तो इसका स्वाद जरूर चखें.
किलमोड़ा पहाड़ों का एक ऐसा जंगली फल है, जिसका स्वाद और पहचान दोनों बेहद अलग हैं. गहरे बैंगनी या बैंगनी रंग का यह फल बरसात के मौसम में पहाड़ी जंगलों और ढलानों पर दिखाई देता है. नीरज बताते हैं कि स्थानीय लोग इसे नमक या मसाले के साथ खाना पसंद करते हैं. किलमोड़ा का स्वाद हल्का खट्टा और कसैला होता है, जो इसे दूसरे फलों से अलग बनाता है. यह फल पहाड़ी जीवनशैली और प्रकृति से जुड़े स्वाद का प्रतीक माना जाता है.
घिंघारु पहाड़ी क्षेत्रों में मिलने वाला छोटा लेकिन बेहद खास जंगली फल है. इसका रंग लाल या गहरा लाल होता है और यह स्वाद में हल्का खट्टा-मीठा लगता है. बरसात के मौसम में पहाड़ों के जंगलों और गांवों के आसपास घिंघारु के पेड़ दिखाई देते हैं. स्थानीय लोग इसे बचपन से खाते आए हैं और इसे पहाड़ों की देसी सौगात मानते हैं. इसकी खुशबू और स्वाद में पहाड़ी मिट्टी की अलग पहचान महसूस होती है. नैनीताल ट्रीप के दौरान घिंघारु जैसे फलों को चखना पहाड़ी संस्कृति को करीब से जानने का अवसर देता है.