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Chanakya Niti: चाणक्य के कड़वे सबक आज भी स्टार्टअप संस्थापकों के लिए उतने ही प्रासंगिक हैं जितने सदियों पहले थे. उनके 5 सिद्धांत हर उद्यमी के लिए बिजनेस मंत्र का काम करते हैं, जो उन्हें चुनौतियों का सामना करने और सफलता प्राप्त करने में मदद कर सकते हैं. ये सबक ना केवल व्यापारिक रणनीतियों को मजबूत करते हैं, बल्कि नेतृत्व और निर्णय लेने की क्षमता को भी निखारते हैं…
Chanakya Niti: एक एंटरप्रेन्योर को अक्सर हरफनमौला होना पड़ता है. एक साथ कई कार्यों को संभालना कोई आसान काम नहीं है. स्ट्रेटजी, रिसोर्स, लीडरशिप और एडमिनिस्ट्रेशन को मैनेज करना, एक के बाद एक निर्णय लेना कोई मजाक नहीं है. इन सभी चीजों के लिए आपको काफी एक्टिव रहना पड़ता है और लाभ-हानि समेत सभी चीजें देखनी पड़ती हैं. एक सफल एंटरप्रेन्योर बनने के लिए आचार्य चाणक्य से बेहतर कोई अच्छी सलाह नहीं दे सकता है. आचार्य चाणक्य नए एक गरीब लड़के को भारतीय इतिहास के सबसे बड़े साम्राज्य का सम्राट बनने के लिए प्रशिक्षित किया और सबसे सफल सम्राट बनाया. अगर आप बिजनेस चला रहा है तो चाणक्य नीति की यह सलाह आपको एक सफल बिजनेसमैन के रूप में स्थापित कर सकती है. आइए जानते हैं आचार्य चाणक्य के पांच शक्तिशाली व्यावसायिक सबक…
आचार्य चाणक्य अपनी नीति में कहते हैं कि एक सफल बिजनेस को चलाने के लिए सबसे पहले जरूरी है कि अपनी प्लानिंग के बारे में किसी को ना बताएं. जादूगर कभी भी प्रदर्शन करने से पहले चाल नहीं समझाते हैं और यही चीज जादू को दिलचस्प बनाए रखता है. चाणक्य से बेहतर इसे कौन जानता है? वह सुझाव देते हैं कि प्लानिंग को एग्जीक्यूट करने तक गोपनीय रखें. अगर आप एक स्टार्टअप शुरू करने जा रहे हैं, तो इस सबक को अपने दिल के करीब रखें. अगर आप अपनी प्लानिंग किसी को बता देते हैं तो सामने वाला आपके लिए खतरा बन सकता है और आपकी पूरी मेहनत मिट्टी में मिल सकती है.
सीखना एक आजीवन प्रक्रिया है. और एंटरप्रेन्योर के लिए, यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है. चाणक्य नीति, अध्याय 8 में कहते हैं कि प्रतिभाशाली व्यक्ति बनने के लिए आपको कभी भी सीखना बंद नहीं करना चाहिए. यह बात हर किसी पर लागू होती है, चाहें फिर वह गरीब घर में जन्मा हो या फिर पैसे वाले व्यक्ति के यहां. जो व्यक्ति सीखना बंद कर देता है, वह कभी आगे नहीं बढ़ पाता है. चाणक्य ने अध्याय 2 में कहा है कि एक भी दिन ऐसा ना बीतने दें जब आप एक श्लोक, आधा श्लोक, या उसका एक चौथाई या उसका एक अक्षर भी ना सीखें. सीखते रहें, जैसे एलोन मस्क और वॉरेन बफेट सीखते रहते हैं.
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चाणक्य कहते हैं कि आप अकेले सेना नहीं बन सकते. एंटरप्रेन्योरशिप का अर्थ है सहयोग. लेकिन यहां एक बात आती है कि आपका पार्टनर कौन है, यह वास्तव में मायने रखता है. चाणक्य इस बारे में काफी स्पष्ट हैं. उनका मानना है कि गलत पार्टनर एक खुले दुश्मन से ज्यादा खतरनाक हो सकता है. आप दुश्मन को आते हुए देख सकते हैं, लेकिन एक बुरा विश्वासपात्र आपको युद्ध के मोर्चे पर धकेल देता है. चाणक्य नीति के अध्याय 2 के श्लोक 6, 9 और 19 में, आचार्य किसी पर भी आंख बंद करके भरोसा करने के परिणामों का वर्णन करते हैं. जिन लोगों को आप नियुक्त करते हैं, उनसे लेकर एडमिनिस्ट्रेशन में बैठे लोगों तक, सुनिश्चित करें कि वह कंपनी का भला चाहते हैं.
अब, चाहे आप नौसिखिया हों या एक्सपीरियंस एंटरप्रेन्योर, ऐसे अवसर आएंगे जब आपको बॉस बनना होगा. सहकर्मियों या हितधारकों के साथ कठिन बातचीत होगी. ऐसी स्थितियों में, कठोरता से कार्य करना महत्वपूर्ण है. सम्मान के साथ, अपनी बात पर अड़े रहना भी महत्वपूर्ण है. चाणक्य नीति, श्लोक 10, अध्याय 9 में कहा गया है कि एक गैर-विषैला सांप भी विषैला होने का नाटक करके बच सकता है. इसलिए आवश्यकता पड़ने पर कठोरता से कार्य करना और अवसर के अनुरूप उठना महत्वपूर्ण है.
अगर आप एक स्टार्टअप चला रहे हैं और सोचे कि सब कुछ अच्छा होगा तो ऐसा नहीं है, कभी-कभी नुकसान भी होगा. अगर आप नुकसान की वजह से प्लानिंग को रोक देते हैं तो यह और भी गलत है. नुकसान होने का डर जरूर होता है लेकिन इससे लड़ने की कोशिश ना करें बल्कि इसे प्रोसेस्ड करें. कभी-कभी नुकसान आगे आने वाले बेहतर लाभ के लिए लेकर जाते हैं क्योंकि गलत होगा तो फिर आप उसे सही करेंगे और जानेंगे. आगे चलकर यह गलती फिर नहीं होगी. गलती से कभी नहीं डरना चाहिए क्योंकि गलती ही आगे लेकर जाती हैं. आपके मन में सैकड़ों विचार हो सकते हैं कि क्या गलत हो सकता है. लेकिन आप उन्हें कैसे संसाधित करते हैं यह मायने रखता है. चाणक्य के अनुसार, डर से हमला करके और उसे नष्ट करके निपटना चाहिए.