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मानिकपुर तहसील के मारकुंडी, हेला, उमरी, सरहट और डोडामाफी समेत कई गांवों की जहां करीब 15 वर्ष पहले तक लोगों के लिए संचार के साधन बेहद सीमित थे. उस समय ग्रामीण अपने रिश्तेदारों और परिचितों तक संदेश पहुंचाने के लिए डाकघर या जिला मुख्यालय का सहारा लेते थे. फोन पर बात करने के लिए उन्हें कई किलोमीटर दूर शहर जाना पड़ता था, बैंकिंग सेवाएं भी आसान नहीं थीं, पैसा निकालने या खाते की जानकारी लेने के लिए लोगों को घंटों बैंकों की लंबी कतारों में खड़ा रहना पड़ता था. हालांकि अब के आधुनिक युग ने इन गांवों की तस्वीर बदल दी है.
चित्रकूटः पाठा क्षेत्र कभी डकैतों और पिछड़ेपन के लिए जाना जाता था. यहां के कई गांव ऐसे थे,जहां मोबाइल नेटवर्क तक की पहुंच नहीं थी और लोग सरकारी योजनाओं तथा आधुनिक सुविधाओं से काफी दूर थे, लेकिन समय के साथ अब इस क्षेत्र की तस्वीर बदल रही है. डिजिटल तकनीक की पहुंच बढ़ने के साथ गांवों में इंटरनेट, मोबाइल नेटवर्क, साइबर कैफे और डिजिटल लाइब्रेरी जैसी सुविधाएं विकसित हुई हैं,जिससे ग्रामीणों के जीवन में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है.
डिजिटल से कैसे बदली जिंदगी
हम बात कर रहे हैं मानिकपुर तहसील के मारकुंडी, हेला, उमरी, सरहट और डोडामाफी समेत कई गांवों की जहां करीब 15 वर्ष पहले तक लोगों के लिए संचार के साधन बेहद सीमित थे. उस समय ग्रामीण अपने रिश्तेदारों और परिचितों तक संदेश पहुंचाने के लिए डाकघर या जिला मुख्यालय का सहारा लेते थे. फोन पर बात करने के लिए उन्हें कई किलोमीटर दूर शहर जाना पड़ता था, बैंकिंग सेवाएं भी आसान नहीं थीं, पैसा निकालने या खाते की जानकारी लेने के लिए लोगों को घंटों बैंकों की लंबी कतारों में खड़ा रहना पड़ता था. हालांकि अब के आधुनिक युग ने इन गांवों की तस्वीर बदल दी है. अब अधिकांश ग्रामीण स्मार्टफोन और इंटरनेट से जुड़ चुके हैं. गांवों में कॉमन सर्विस सेंटर और साइबर कैफे खुल चुके हैं, जहां लोगों को ऑनलाइन आवेदन, दस्तावेज प्रिंट कराने और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने जैसी सुविधाएं आसानी से मिल रही हैं, डिजिटल बैंकिंग के जरिए लोग घर बैठे अपने खाते की जानकारी प्राप्त कर रहे हैं और ऑनलाइन लेनदेन भी कर रहे हैं.
शिक्षा के क्षेत्र में लाई क्रांति
जानकारी के लिए बता दे कि इस डिजिटल बदलाव का सबसे बड़ा असर ग्रामीण क्षेत्र के शिक्षा में दिखाई दे रहा है. जहां अब गांवों के सरकारी स्कूलों में ऑनलाइन माध्यम से पढ़ाई कराई जा रही है. स्कूलों में टीवी स्क्रीन और इंटरनेट की मदद से बच्चों को आधुनिक तरीके से शिक्षा दी जा रही है, जिससे उनकी पढ़ाई पहले की तुलना में अधिक रोचक और प्रभावी बन गई है. और बच्चे आज आधुनिक युग से पढ़ाई कर रहे हैं. वही सरकारी स्कूल के शिक्षक आनंद कुमार गुप्ता ने लोकल 18 को जानकारी में बताया कि पहले ग्रामीण स्कूलों में इंटरनेट की सुविधा न होने के कारण शिक्षकों को केवल ब्लैकबोर्ड के सहारे पढ़ाना पड़ता था.
बच्चों को किसी विषय को समझाने के लिए चित्र या वीडियो नहीं दिखाए जा सकते थे, जिससे कई बार उन्हें समझने में कठिनाई होती थी, लेकिन अब डिजिटल संसाधनों की मदद से बच्चों को वीडियो और चित्रों के जरिए पढ़ाया जा रहा है.जिससे उनको अच्छा ज्ञान मिल रहा है. उन्होंने आगे की जानकारी में बताया कि पहले शिक्षा विभाग की सूचनाएं संकुल बैठकों के माध्यम से पहुंचती थीं, जिसमें कई दिन लग जाते थे.अब व्हाट्सएप और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए स्कूल में बैठे-बैठे ही सभी आवश्यक जानकारियां तुरंत प्राप्त हो जाती हैं, जिससे शिक्षकों का काम भी आसान हुआ है.
बैंक का काम भी आसान
वही गांव के निवासी सचिन ने लोकल 18 को जानकारी में बताते हैं कि एक समय ऐसा था जब उनके बुजुर्गों को किसी रिश्तेदार से बात करने के लिए शहर जाना पड़ता था, क्योंकि उस समय मोबाइल फोन आम लोगों की पहुंच से बाहर थे. वहीं बैंक से जुड़ा कोई भी काम कराने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता था, लेकिन आज इंटरनेट और मोबाइल तकनीक ने सब कुछ बदल दिया है.अब लोग घर बैठे ही ऑनलाइन पैसा भेज देते हैं, बैंक खाते की जानकारी घर बैठे ही पा जाते है.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें