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भास्कर न्यूज | गिरिडीह उसरी नदी से पाइपलाइन के माध्यम से पानी लेकर फैक्ट्री तक पहुंचाने की प्रस्तावित योजना के खिलाफ रविवार को ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। गंगापुर गांव से चतरो मोड़ तक बड़ी संख्या में महिला-पुरुषों ने सड़कों पर उतरकर विशाल पैदल मार्च निकाला। यह मार्च भाकपा (माले), असंगठित मजदूर मोर्चा, झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामस), अखिल भारतीय किसान महासभा और एक आवाज प्रदूषण के खिलाफ संगठन के संयुक्त बैनर तले ‘उसरी बचाओ अभियान’के तहत आयोजित किया गया। मार्च के दौरान पूरा इलाका “उसरी फॉल बचाओ”, “पानी चोर सावधान” और “प्रकृति बचाओ” जैसे गगनभेदी नारों से गूंज उठा। पैदल मार्च का नेतृत्व कर रहे माले नेता राजेश सिन्हा, कन्हाई पांडेय और दीपक गोस्वामी ने कहा कि उसरी नदी के अस्तित्व पर आज बड़ा खतरा मंडरा रहा है। गंगापुर से चतरो स्थित बालमुकुंद फैक्ट्री तक सड़क किनारे पाइपलाइन बिछाने के लिए धड़ल्ले से गड्ढे खोदे जा रहे हैं। उन्होंने दो टूक चेतावनी दी कि गिरिडीह की लाइफलाइन और धरोहर उसरी फॉल को किसी भी कीमत पर बर्बाद नहीं होने दिया जाएगा। इसके लिए ग्रामीण अब आर-पार की लड़ाई लड़ेंगे। अगर इस काम को तुरंत नहीं रोका गया, तो उपायुक्त (डीसी), वन विभाग, डीवीसी, पथ निर्माण विभाग और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के समक्ष उग्र आंदोलन किया जाएगा। इस विरोध प्रदर्शन में मुख्य रूप से शुभांकर कुमार, पूजा मुर्मू, मसूदन कोल, विजय विशाल, सनातन साव, शिकू मरांडी, प्रकाश टुडू, अरुण साव, बबलू चंद्रवंशी, आजाद, आलम, प्रदीप राय, अनुज राय, अजय तुरी, सविनाथ राय सहित भारी संख्या में स्थानीय ग्रामीण और विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ता उपस्थित थे। आरोप- वादे से मुकरा फैक्ट्री प्रबंधन मार्च के दौरान कन्हाई पांडेय ने आरोप लगाया कि फैक्ट्री प्रबंधन ने स्थानीय गांवों के विकास समेत शिक्षा, स्वास्थ्य और पेयजल सुविधा उपलब्ध कराने का बड़ा वादा किया था, लेकिन आज तक एक भी वादा पूरा नहीं किया गया। वादे पूरे करने के बजाय अब नदी के पानी को ही पाइप के जरिए फैक्ट्री ले जाने की तैयारी है, जिसका ग्रामीण हर स्तर पर पुरजोर विरोध करेंगे। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई, तो इस आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
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