Last Updated:
Save Arhar From Wilt Disease: अरहर की फसल का उत्पादन अच्छा होने पर कमाई बढ़िया होती है लेकिन इसमें उखठा रोग का काफी खतरा रहता है. कृषि वैज्ञानिक डॉ. दिलीप पांडे ने इसके समाधान के तौर पर बीज उपचार करने और फसल चक्र अपनाने की सलाह दी.
पलामू. अरहर की फसल किसानों के लिए फायदे का सौदा है. पलामू की अरहर अपनी बेहतरीन गुणवत्ता और खास स्वाद के कारण अलग पहचान रखती है. पलामू जिले के किसान बड़े पैमाने पर इसकी खेती करते हैं और यह नकदी फसल के रूप में अच्छी आमदनी का जरिया भी है. हालांकि, अरहर की खेती में उखठा (विल्ट) रोग किसानों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने आता है. समय रहते उचित प्रबंधन नहीं करने पर यह रोग फसल की पैदावार को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है.
फूल आने के समय बढ़ जाता है खतरा
कृषि वैज्ञानिक डॉ. दिलीप पांडे ने बताया कि अरहर की फसल में उखठा रोग का प्रकोप मुख्य रूप से फूल आने की अवस्था में अधिक देखने को मिलता है. इस दौरान पौधे अचानक मुरझाने लगते हैं और धीरे-धीरे पूरी तरह सूख जाते हैं. किसानों की भाषा में इसे उखठा रोग कहा जाता है. यह रोग मुख्य रूप से फफूंद (फंगल संक्रमण) के कारण फैलता है, जो मिट्टी के माध्यम से पौधों की जड़ों पर हमला करता है.
बीज उपचार से मिलती है प्रभावी सुरक्षा
उखठा रोग से बचाव के लिए बुआई से पहले बीज उपचार करना बेहद जरूरी है. इसके लिए प्रति किलोग्राम बीज में दो ग्राम बेविस्टिन (Carbendazim) मिलाकर उपचार करने की सलाह दी जाती है. बीज उपचार से फफूंद का प्रभाव काफी हद तक कम हो जाता है और पौधे शुरुआती अवस्था से ही स्वस्थ विकास करते हैं. यह कम लागत वाला उपाय किसानों को बड़े नुकसान से बचा सकता है.
बार-बार रोग हो तो अपनाएं फसल चक्र
उन्होंने यह भी बताया कि अगर किसी खेत में लगातार कई वर्षों से उखठा रोग की समस्या बनी हुई है, तो केवल दवा के भरोसे रहने के बजाय फसल चक्र अपनाना अधिक लाभकारी माना जाता है. ऐसे खेतों में लगातार अरहर लगाने के बजाय कम से कम तीन वर्षों तक मक्का, बाजरा, तिलहन या अन्य मोटे अनाज की खेती की जानी चाहिए. इससे मिट्टी में मौजूद रोग पैदा करने वाले फफूंद का प्रभाव धीरे-धीरे कम हो जाता है और अगली बार अरहर की खेती में रोग का खतरा भी घट जाता है.
सही तकनीक से बढ़ेगी पैदावार और मुनाफा
अरहर की फसल में बीज उपचार, फसल चक्र और खेत की नियमित निगरानी जैसी वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाकर किसान उखठा रोग पर प्रभावी नियंत्रण पा सकते हैं. इससे न केवल फसल सुरक्षित रहती है, बल्कि उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में वृद्धि होती है. पलामू जैसे क्षेत्र, जहां अरहर की विशेष पहचान है, वहां वैज्ञानिक खेती अपनाकर किसान बेहतर उपज के साथ अधिक मुनाफा भी कमा सकते हैं.
About the Author
बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें