आज के दौर में बाल झड़ना केवल बढ़ती उम्र की समस्या नहीं रह गया है. बदलती जीवनशैली, बढ़ता तनाव, पोषण की कमी और प्रदूषण के कारण कम उम्र के लोग भी हेयर फॉल से परेशान हैं. इस समस्या को लेकर होम्योपैथिक फिजिशियन डॉ. रिद्धी पांडे ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि सही कारण की पहचान कर होम्योपैथी के साथ आधुनिक एडवांस उपचार अपनाने से कई मामलों में अच्छे परिणाम देखने को मिलते हैं.
हर 10 में से एक व्यक्ति बाल झड़ने की समस्या से परेशान
होम्योपैथिक फिजिशियन डॉ. रिद्धी पांडे ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि वर्तमान समय में बाल झड़ने की समस्या बेहद आम हो चुकी है. उन्होंने कि बदलती लाइफस्टाइल, बढ़ता मानसिक तनाव, अनियमित खानपान और पर्यावरणीय बदलावों का सीधा असर बालों की सेहत पर पड़ रहा है. उन्होंने बताया कि उनके पास आने वाले मरीजों में बड़ी संख्या ऐसे लोगों की होती है, जो अत्यधिक हेयर फॉल या बाल पतले होने की शिकायत लेकर पहुंचते हैं.
महिलाओं में पोषण की कमी भी बड़ी वजह
डॉ. पांडे ने बताया कि महिलाओं में आयरन और हीमोग्लोबिन की कमी के कारण बाल झड़ने की समस्या अधिक देखने को मिलती है. कई बार लोग पर्याप्त भोजन करने के बावजूद शरीर में पोषक तत्वों का सही तरीके से अवशोषण नहीं हो पाता, जिससे बाल कमजोर होने लगते हैं, ऐसे मामलों में केवल बाहरी उपचार ही नहीं, बल्कि शरीर के भीतर की कमी को दूर करना भी जरूरी होता है.
होम्योपैथी के साथ एडवांस ट्रीटमेंट का सहारा
उन्होंने बताया कि होम्योपैथी में बालों की समस्या के लिए कई प्रभावी दवाएं उपलब्ध हैं. हालांकि जिन मरीजों के सिर में बालों के बीच गैप बनने लगे हों या वे जल्दी परिणाम चाहते हों, उनके लिए केवल दवा पर्याप्त नहीं होती, ऐसे मामलों में होम्योपैथिक उपचार के साथ एडवांस तकनीकों का भी उपयोग किया जाता है, ताकि बेहतर और अपेक्षाकृत तेज परिणाम मिल सकें.
माइक्रोनीडलिंग और ग्रोथ फैक्टर थेरेपी से बढ़ सकता है फायदा
डॉ. रिद्धी पांडे ने बताया कि जिन मरीजों में बाल काफी कम हो चुके होते हैं, उनके लिए माइक्रोनीडलिंग जैसी तकनीक अपनाई जाती है. इस प्रक्रिया के दौरान मरीज के अपने रक्त से प्राप्त प्लेटलेट्स और ग्रोथ फैक्टर्स का उपयोग किया जाता है. उन्होंने कहा कि इससे त्वचा में कोलेजन और प्रोटीन बनने की प्रक्रिया को बढ़ावा मिलता है, जिससे नए बालों की ग्रोथ और पुराने बालों की मजबूती में मदद मिल सकती है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह प्रक्रिया पारंपरिक सर्जिकल हेयर ट्रांसप्लांट जैसी नहीं होती, बल्कि माइक्रोनीडलिंग के जरिए त्वचा की ऊपरी परत तक काम किया जाता है.
पतले बालों के लिए ओजोन थेरेपी भी विकल्प
डॉक्टर ने बताया कि जिन मरीजों में बाल झड़ने के साथ-साथ बाल बेहद पतले हो गए हों, खासकर टेलोजन एफ्लुवियम जैसी स्थिति में, वहां ओजोन सेशन का उपयोग किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि इससे बालों की थिकनेस बेहतर करने में मदद मिलती है और स्कैल्प की गुणवत्ता में सुधार देखने को मिलता है.
3 से 4 महीने में 6 सेशन की जरूरत
डॉ. पांडे ने बताया कि बालों से जुड़े एडवांस उपचारों में धैर्य रखना बेहद जरूरी है. सामान्य तौर पर अच्छे परिणाम के लिए 3 से 4 महीने के भीतर कम से कम 6 सेशन लेने की सलाह दी जाती है. उन्होंने कहा कि मरीज के अपने रक्त से प्राप्त ग्रोथ फैक्टर्स का उपयोग प्रभावी माना जाता है और कई मामलों में इससे सकारात्मक परिणाम देखने को मिलते हैं.