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फतवा, जान की धमकी और देश निकाला… तस्लीमा नसरीन के 5 बड़े...


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Taslima Nasrin Controversies : बांग्लादेश की निर्वासित लेखिका तस्लीमा नसरीन करीब 20 साल बाद कोलकाता लौट रही हैं. उनकी वापसी के साथ एक बार फिर उन विवादों की चर्चा तेज हो गई है, जिन्होंने उनकी पूरी जिंदगी बदल दी. अब बंगाल में बदले राजनीतिक माहौल में उनकी वापसी को अभिव्यक्ति की आजादी और कट्टरवाद के खिलाफ प्रतीकात्मक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है.

तस्लीमा नसरीन के 5 बड़े विवाद, कैसे एक किताब ने बदल दी पूरी जिंदगीZoom

बांग्लादेश की निर्वासित लेखिका तस्लीमा नसरीन करीब 20 साल बाद कोलकाता लौट रही हैं. (फाइल फोटो- फेसबुक)

बांग्लादेश की निर्वासित लेखिका तस्लीमा नसरीन करीब दो दशक बाद एक बार फिर कोलकाता लौटने जा रही हैं. एक अगस्त को रवींद्र सदन में आयोजित कट्टरपंथ विरोधी साहित्यिक कार्यक्रम में उनकी मौजूदगी सिर्फ साहित्यिक आयोजन नहीं, बल्कि एक बड़े राजनीतिक और वैचारिक संदेश के तौर पर भी देखी जा रही है.तस्लीमा ने जिस शहर को कभी अपना दूसरा घर कहा था, उसी शहर से 2007 में उन्हें हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद जाना पड़ा था. अब बदले राजनीतिक माहौल में उनकी वापसी ने एक बार फिर उन विवादों को चर्चा में ला दिया है, जिन्होंने तस्लीमा नसरीन की पूरी जिंदगी बदल दी.

तस्लीमा नसरीन का सबसे बड़ा और चर्चित विवाद 1993 में प्रकाशित उनके उपन्यास ‘लज्जा’ से जुड़ा है. यह उपन्यास बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हुए कथित अत्याचारों पर आधारित था. किताब प्रकाशित होते ही बांग्लादेश में कट्टरपंथी संगठनों ने जबरदस्त विरोध शुरू कर दिया. सरकार ने किताब पर प्रतिबंध लगा दिया और तस्लीमा के खिलाफ कई इस्लामी संगठनों ने फतवे जारी कर दिए. उन्हें खुलेआम जान से मारने की धमकियां मिलने लगीं. आखिरकार 1994 में उन्हें अपना देश छोड़ना पड़ा और तब से वह निर्वासन का जीवन जी रही हैं.

तस्लीमा नसरीन ने अपने लेखों और साक्षात्कारों में कई बार धर्म और खासकर धार्मिक कट्टरता की आलोचना की. उन्होंने महिलाओं के अधिकारों और समान नागरिक अधिकारों की जोरदार वकालत की. उनके बयानों को लेकर कई मुस्लिम संगठनों ने तीखा विरोध किया. एक समय तो उनके सिर पर इनाम तक घोषित कर दिया गया. उन्हें लगातार सुरक्षा के बीच रहना पड़ा और कई देशों में शरण लेनी पड़ी. तस्लीमा हमेशा यह कहती रही हैं कि उनका विरोध किसी धर्म से नहीं बल्कि धार्मिक कट्टरता से है.

2004 में भारत आने के बाद तस्लीमा ने कोलकाता को अपना घर बनाया था. लेकिन 2007 में उनकी आत्मकथा ‘द्विखंडित’ के कुछ हिस्सों को लेकर पश्चिम बंगाल में भारी विवाद खड़ा हो गया. मुस्लिम संगठनों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए. कोलकाता की सड़कों पर हिंसा भड़क गई और हालात इतने बिगड़ गए कि सेना तक बुलानी पड़ी. तत्कालीन वाम मोर्चा सरकार ने कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए तस्लीमा से कोलकाता छोड़ने को कहा. पहले उन्हें जयपुर भेजा गया, फिर दिल्ली लाया गया, जहां कुछ समय तक उन्हें सुरक्षित स्थान पर रखा गया. यह घटना अभिव्यक्ति की आजादी बनाम कानून-व्यवस्था की बहस का बड़ा मुद्दा बन गई.

तस्लीमा नसरीन की आत्मकथाओं की श्रृंखला भी लगातार विवादों में रही. उनकी किताबों ‘उत्ताल हवा’, ‘का’, ‘द्विखंडित’ और अन्य संस्मरणों में कई साहित्यकारों, बुद्धिजीवियों और सार्वजनिक हस्तियों का जिक्र था. इन किताबों में किए गए निजी खुलासों पर कई लोगों ने आपत्ति जताई. कुछ पुस्तकों पर प्रतिबंध भी लगा और अदालतों तक मामले पहुंचे. आलोचकों ने उन पर निजी जीवन को सनसनीखेज बनाने का आरोप लगाया, जबकि तस्लीमा ने इसे सच लिखने का अधिकार बताया.

पिछले कुछ वर्षों में तस्लीमा नसरीन सोशल मीडिया पर भी कई बार विवादों में घिरीं. उन्होंने महिलाओं के अधिकार, हिजाब, धार्मिक प्रतीकों, इस्लामी कट्टरवाद और दक्षिण एशिया की राजनीति पर कई तीखी टिप्पणियां कीं. उनके कई पोस्टों का समर्थन भी हुआ और विरोध भी. कई बार उनके बयानों को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी बहस छिड़ी. बावजूद इसके तस्लीमा अपने विचारों पर कायम रहीं और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को सर्वोच्च अधिकार बताती रहीं.

करीब 20 साल बाद तस्लीमा नसरीन की कोलकाता वापसी सिर्फ एक साहित्यिक कार्यक्रम नहीं मानी जा रही. आयोजकों का कहना है कि यह धार्मिक कट्टरता के खिलाफ आवाज उठाने वालों के सम्मान का कार्यक्रम है. वहीं भाजपा इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की जीत और पुराने राजनीतिक दौर से अलग नए पश्चिम बंगाल का प्रतीक बता रही है. दूसरी ओर राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तस्लीमा की वापसी एक बार फिर पश्चिम बंगाल में धर्मनिरपेक्षता, अभिव्यक्ति की आजादी और पहचान की राजनीति पर नई बहस छेड़ सकती है.

About the Author

Saad Omar

<strong>साद बिन उमर</strong> मीडिया इंडस्ट्री में 15 साल से अधिक के अनुभव वाले सीनियर पत्रकार हैं. वह अभी News18 Hindi (hindi.news18.com) से जुड़े हैं, जहां वे होम पेज डेस्क पर काम करते हैं.

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