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झारखंड में खरीफ 2026 की शुरुआत इस बार सुस्त रही है। इसका सबसे बड़ा कारण बारिश की कमी बन रही है। 19 जुलाई तक राज्य में सामान्य से 38 प्रतिशत कम वर्षा रिकॉर्ड की गई है। हालात ऐसे हैं कि तय लक्ष्य के मुकाबले अब तक केवल 18.06 प्रतिशत फसल ही लग पाई है। बात धान रोपनी की स्थिति की करें तो यह और भी कमजोर है। राज्य में औसतन 13.7 प्रतिशत के आसपास ही रोपनी हो सकी है। कई जिलों में किसान अब भी अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं। जिससे खेतों में कामकाज की गति धीमी बनी हुई है। आमतौर पर इस समय तक रोपनी तेजी पकड़ लेती है, लेकिन इस बार खेतों में नमी की कमी साफ नजर आ रही है। धान रोपनी से जुड़ी तस्वीरें देखें… पांच में तीन प्रमंडल के हालात खराब राज्य के प्रमंडलों में हालात एक जैसे नहीं हैं। उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल में स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक बनी हुई है। यहां केवल 14 प्रतिशत खेतों में ही फसल लग पाई है। चतरा जिला सबसे ज्यादा प्रभावित है, जहां 68 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज की गई है। पलामू प्रमंडल भी मुश्किल दौर से गुजर रहा है। गढ़वा में 71, पलामू में 62 और लातेहार में करीब 57 प्रतिशत तक बारिश की कमी है। इसके उलट कोल्हान प्रमंडल ने कुछ हद तक स्थिति संभाली है। यहां कम बारिश के बावजूद पूर्वी सिंहभूम और सरायकेला में अपेक्षाकृत बेहतर रोपनी हुई है। दक्षिणी छोटानागपुर में भी हालात सामान्य से नीचे हैं, जबकि संताल परगना में स्थिति गंभीर होते हुए भी कुछ सुधार की उम्मीद जताई जा रही है। बारिश नहीं हुई तो उत्पादन पर पड़ेगा सीधा असर धान रोपनी की धीमी रफ्तार अब चिंता का कारण बनती जा रही है। कई जिलों में रोपनी 10 प्रतिशत से भी नीचे है, जबकि कुछ जगहों पर यह 20 प्रतिशत तक पहुंची है। जिन इलाकों में जमीन में नमी थोड़ी बेहतर है, वहां किसान काम कर पा रहे हैं। ज्यादातर क्षेत्रों में खेत खाली पड़े हैं। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अगले एक-दो हफ्तों में अच्छी बारिश नहीं हुई, तो इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ेगा। इससे न सिर्फ किसानों की आय प्रभावित होगी, बल्कि राज्य की खाद्य सुरक्षा पर भी दबाव बढ़ सकता है। फिलहाल किसानों की नजर आसमान पर टिकी है। वे जल्द अच्छी बारिश की उम्मीद कर रहे हैं।
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