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Jamshedpur Success Story: जमशेदपुर की सरिता और नंदिनी अपनी हस्तशिल्प कला से देश-विदेश में पहचान बना रही हैं. वे डोकरा आर्ट, सोहराय पेंटिंग और कॉपर वायर फोटो फ्रेम बनाती हैं, जो झारखंड की संस्कृति दर्शाते हैं. आइये जानते हैं दोनों सहेलियों की सफलता के बारे में.
जमशेदपुर: झारखंड में जमशेदपुर की दो सहेलियां सरिता और नंदिनी अपनी मेहनत, रचनात्मक सोच और अनोखे हुनर के दम पर आज एक अलग पहचान बना रही हैं. दोनों ने यह साबित कर दिया है कि अगर सोच नई हो और कुछ करने का जुनून हो, तो साधारण चीजों को भी खास बनाया जा सकता है. यही वजह है कि उनके हाथों से बने उत्पाद अब सिर्फ शहर या राज्य तक सीमित नहीं हैं, बल्कि देश के साथ-साथ विदेशों तक भी पहुंच रहे हैं.
सरिता और नंदिनी कई तरह की हस्तशिल्प वस्तुएं तैयार करती हैं. इनमें डोकरा आर्ट से बनी ज्वेलरी, सोहराय पेंटिंग, सजावटी सामान और गिफ्ट आइटम शामिल हैं. उनकी बनाई गई हर वस्तु में झारखंड की संस्कृति और कला की झलक दिखाई देती है. इसकी सबसे खास बात यह है कि वह ऐसी चीजों का इस्तेमाल करती हैं, जिन्हें आमतौर पर लोग साधारण समझते हैं, लेकिन अपनी कलाकारी से उन्हें बेहद आकर्षक बना देती हैं.
पेंटिग का हर कोई हो जाता है दीवाना
बता दें कि दोनों कलाकार पत्थरों पर भी खूबसूरत पेंटिंग करती हैं. नदी किनारे या आसपास मिलने वाले साधारण पत्थरों को रंगों और डिजाइनों की मदद से आकर्षक सजावटी वस्तुओं में बदल देती हैं. इन पत्थरों पर बनाई गई कलाकृतियां लोगों को काफी पसंद आ रही है. घर की सजावट से लेकर उपहार देने तक के लिए लोग इन्हें खरीदना पसंद करते हैं.
वहीं, उनके काम की सबसे खास और अनोखी पहचान कॉपर वायर से बने फोटो फ्रेम हैं. यह एक ऐसी कला है, जिसे सीखने के लिए आमतौर पर विशेष प्रशिक्षण की जरूरत होती है, लेकिन सरिता और नंदिनी ने इस कला को किसी संस्थान से नहीं सीखा. उन्होंने यूट्यूब पर वीडियो देखकर इसकी बारीकियां समझीं और लगातार अभ्यास करके खुद को इस कला में निपुण बनाया. आज वे कॉपर वायर से इतने सुंदर और आकर्षक फोटो फ्रेम तैयार कर रही हैं कि देखने वाले उनकी तारीफ किए बिना नहीं रहते.
इसके अलावा इन फोटो फ्रेमों की मांग लगातार बढ़ रही है. लोग इन्हें जन्मदिन, शादी, सालगिरह और अन्य खास अवसरों पर उपहार के रूप में खरीद रहे हैं. वहीं, कई लोग अपने घरों और कार्यालयों को सजाने के लिए भी इनका इस्तेमाल कर रहे हैं. उनकी बनाई गई वस्तुएं हाथ से तैयार होती हैं. इसलिए हर उत्पाद की अपनी अलग खूबसूरती और पहचान होती है.
कला के जरिए सहेलियां बनीं हैं आत्मनिर्भर
सरिता और नंदिनी की सफलता यह दिखाती है कि आज के समय में इंटरनेट और नई तकनीक का सही उपयोग करके कोई भी नया हुनर सीख सकता है. दोनों सहेलियां अपनी कला के जरिए न केवल आत्मनिर्भर बनी हैं. बल्कि झारखंड की पारंपरिक कला और संस्कृति को देश-विदेश तक पहुंचाने का काम भी कर रही हैं. उनकी यह उपलब्धि युवाओं के लिए प्रेरणा का एक शानदार उदाहरण है.
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बृजेंद्र प्रताप सिंह डिजिटल-टीवी मीडिया में (2021) लगभग 5 सालों से सक्रिय हैं. मेट्रो न्यूज 24 टीवी चैनल मुंबई, ईटीवी भारत डेस्क, दैनिक भास्कर डिजिटल डेस्क के अनुभव के साथ 14 मई 2024 से Hindi.News18.com में स…और पढ़ें