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Rice Farming Pest Control: धान की रोपाई के बाद कीट नियंत्रण पर ध्यान देना बहुत जरूरी होता है वरना सारी शुरुआती मेहनत बेकार हो जाती है. देवघर में कृषि विशेषज्ञ अंबिका कुशवाहा ने रोपाई के 20-25 दिनों में ही कीटनाशक के प्रयोग की सलाह दी. जानते हैं विस्तार से.
देवघर. मानसून का महीना किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं माना जाता है. इसी मौसम का इंतजार किसान पूरे साल करते हैं, क्योंकि धान की खेती का सबसे महत्वपूर्ण समय यही होता है. देवघर सहित आसपास के इलाकों में इन दिनों किसान धान का बिचड़ा तैयार करने से लेकर रोपाई तक के काम में पूरी तरह जुटे हुए हैं. कई खेतों में रोपाई पूरी हो चुकी है तो कई जगह अभी भी बिचड़ा बोया जा रहा है. लेकिन खेती सिर्फ रोपाई तक ही सीमित नहीं होती, बल्कि इसके बाद फसल की सही देखभाल करना सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है.
अक्सर देखा जाता है कि किसान रोपाई करने के बाद निश्चिंत हो जाते हैं, जबकि इसी समय फसल पर सबसे ज्यादा कीट और रोगों का खतरा मंडराने लगता है. अगर शुरुआत में ही सावधानी नहीं बरती गई तो कुछ ही दिनों में पूरी फसल प्रभावित हो सकती है और मेहनत के साथ-साथ लागत का भी बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है. क्या उपाय करना चाहिए, जानते हैं कृषि विशेषज्ञ से?
क्या कहते हैं कृषि विशेषज्ञ
देवघर के कृषि विशेषज्ञ अंबिका कुशवाहा ने लोकल18 के संवाददाता से बातचीत करते हुए कहा कि धान की रोपाई के बाद शुरुआती 20 से 25 दिन फसल के लिए सबसे संवेदनशील समय होता है. इस दौरान पौधे नई जगह पर अपनी जड़ मजबूत कर रहे होते हैं और तेजी से बढ़वार कर रहे होते हैं. ऐसे समय में अगर खेत में कीटों का हमला हो जाए तो पौधे कमजोर पड़ने लगते हैं. कई किसान इस समय केवल यूरिया खाद डालकर अपना काम पूरा समझ लेते हैं, लेकिन यह सबसे बड़ी गलती साबित हो सकती है.
उनका कहना है कि जब किसान पहली बार रोपाई के 20 से 25 दिन बाद यूरिया का प्रयोग करें, उसी समय खेत में कीट नियंत्रण पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए. अगर खाद के साथ कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार उपयुक्त कीटनाशक का प्रयोग कर दिया जाए तो फसल लंबे समय तक सुरक्षित रह सकती है और कीटों के हमले की संभावना काफी हद तक कम हो जाती है.
तना छेदक नामक कीट धान को पहुंचाता है नुकसान
उन्होंने बताया कि धान की फसल में सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाने वाला कीट तना छेदक (स्टेम बोरर) होता है. यह कीट बाहर से आसानी से दिखाई नहीं देता, बल्कि पौधे के तने के अंदर घुसकर उसे भीतर ही भीतर खोखला करना शुरू कर देता है. शुरुआत में किसान को इसका पता भी नहीं चलता, लेकिन धीरे-धीरे पौधे का ऊपरी हिस्सा पीला पड़ने लगता है और बाद में पूरी पत्ती तथा तना सूख जाता है.
कई बार खेत में खड़े हरे-भरे पौधों के बीच सूखे हुए पौधे साफ दिखाई देने लगते हैं. अगर समय रहते इसका नियंत्रण नहीं किया गया तो यह कीट तेजी से पूरे खेत में फैल सकता है, जिससे फसल की बढ़वार रुक जाती है और उत्पादन पर सीधा असर पड़ता है.
कृषि विभाग की सलाह पर ही करें दवा का छिड़काव
कृषि विशेषज्ञ अंबिका कुशवाहा का कहना है कि किसान किसी भी दवा का उपयोग बिना जानकारी के बिल्कुल न करें. खेत की स्थिति, कीट के प्रकोप और कृषि विभाग की सलाह के अनुसार ही दवा और उसकी सही मात्रा का चयन करें. समय पर खाद देना, खेत में पानी का सही प्रबंधन करना और शुरुआती अवस्था में कीट नियंत्रण करना ही अच्छी पैदावार की सबसे बड़ी कुंजी है.
अगर किसान इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखें तो धान की फसल स्वस्थ रहेगी, रोग और कीटों का खतरा काफी कम होगा, उत्पादन बेहतर मिलेगा और खेती से अच्छा मुनाफा भी कमाया जा सकेगा. यही वजह है कि कृषि विशेषज्ञ मानसून के इस मौसम में किसानों को रोपाई के बाद खेत की नियमित निगरानी करने और समय पर आवश्यक उपाय अपनाने की सलाह दे रहे हैं.
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बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें