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Jamshedpur: जमशेदपुर की लक्ष्मी पांडे ने साल 2015 में अपने भाई किशन दुबे को खो दिया. देश की रक्षा करते हुए वे शहीद हो गए थे. हालांकि लक्ष्मी ने तब से लेकर आज तक रक्षाबंधन की परंपरा को जीवित रखा. वे तब से अपने भाई की बटालियन 119 के सभी जवानों के लिए राखी भेजती हैं, जहां उनके भाई तैनात थे.
जमशेदपुर. रक्षाबंधन भारत के सबसे पवित्र और भावनात्मक त्योहारों में से एक है. यह पर्व भाई-बहन के अटूट प्रेम, विश्वास और स्नेह का प्रतीक माना जाता है. इस खास मौके पर जमशेदपुर की एक बहन की कहानी लोगों को भावुक कर देती है. यह कहानी है लक्ष्मी पांडे की, जो अपने शहीद भाई किशन दुबे की याद को आज भी जीवित रखे हुए हैं. उनके भाई भले ही इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन बहन का प्यार आज भी उतना ही मजबूत है, जितना पहले था.
शहीद हो गए थे भाई
किशन दुबे भारतीय सेना की 119 बटालियन में तैनात थे. 9 जुलाई 2015 को जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में आतंकवादियों के साथ हुई एक मुठभेड़ में उन्होंने बहादुरी का परिचय दिया था. मुठभेड़ के दौरान उन्होंने तीन आतंकवादियों को मार गिराया, लेकिन इसी दौरान आतंकियों की गोली उनकी बाईं आंख में लग गई. गंभीर रूप से घायल होने के बाद उन्होंने देश की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया और शहीद हो गए. उनकी वीरता को आज भी लोग सम्मान और गर्व के साथ याद करते हैं.
नहीं छोड़ी राखी की परंपरा
अपने भाई के शहीद होने के बाद भी लक्ष्मी पांडे ने रक्षाबंधन की परंपरा को नहीं छोड़ा. पिछले 10 वर्षों से वह हर साल अपने भाई की 119 बटालियन के जवानों को राखी भेजती हैं. उनके लिए पूरी बटालियन ही अब उनके भाई का परिवार बन चुकी है. लक्ष्मी का कहना है कि जब वह जवानों को राखी भेजती हैं, तो उन्हें ऐसा महसूस होता है जैसे वह अपने भाई को ही राखी बांध रही हों.
जवान देते हैं छोटी बहन सा प्यार
लक्ष्मी बताती हैं कि बटालियन के जवान भी उन्हें अपनी छोटी बहन की तरह मानते हैं. रक्षाबंधन के अवसर पर जवानों की ओर से उन्हें शुभकामनाएं, प्यार और आशीर्वाद मिलता है. कई बार बटालियन के अधिकारी और जवान उनसे संपर्क कर उनका हालचाल भी पूछते हैं. यह रिश्ता सिर्फ राखी तक सीमित नहीं है, बल्कि वर्षों से भावनाओं और सम्मान के धागे से जुड़ा हुआ है.
शहीद किशन दुबे की वीरता को देश ने भी सम्मान दिया. उन्हें मरणोपरांत विभिन्न सम्मान मिले और 1 दिसंबर 2023 को उनकी बहादुरी के लिए पुलिस पदक से भी सम्मानित किया गया. यह सम्मान उनके साहस और देशभक्ति की पहचान है.
समाज के लिए प्रेरणा
रक्षाबंधन के इस पावन पर्व पर लक्ष्मी पांडे की कहानी यह संदेश देती है कि सच्चा प्रेम और रिश्ते कभी खत्म नहीं होते. भाई भले ही शारीरिक रूप से साथ न हो, लेकिन उसकी यादें और उसके प्रति सम्मान हमेशा जीवित रहते हैं. लक्ष्मी आज भी अपने शहीद भाई को उतना ही प्यार करती हैं और हर साल राखी के माध्यम से उस रिश्ते को निभाती आ रही हैं. उनकी यह भावना पूरे समाज के लिए प्रेरणा और गर्व का विषय है.
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बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …
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