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चित्रकूट कृषि विभाग के द्वारा चित्रकूट के मऊ के सुरौंधा गांव में संचालित एक कथित अवैध खाद फैक्टरी पर छापेमारी कर कार्रवाई की गई है. वहां छापेमारी के दौरान मौके से भारी मात्रा में संदिग्ध खाद, निर्माण सामग्री तथा करीब 1000 खाली खाद की बोरियां बरामद हुईं थी. जिसमें जांच के दौरान पाया गया था कि सस्ती अथवा नकली खाद को भारत डीएपी के लेबल लगे बोरों में भरकर नकली डीएपी के रूप में तैयार किया जा रहा था. कार्रवाई के दौरान कुछ खाली बोरियां दुकान के पीछे से नदी में फेंक दी गईं
चित्रकूटः अगर आप भी किसान है और आप अपने खेतों के लिए खाद ले रहे है तो आप को सावधान होने की जरूरत है. चित्रकूट में अभी हाल ही में प्राइवेट दुकान से नकली खाद बरामद कर कार्यवाई की है. ऐसे ने अगर आप भी प्राइवेट दुकान से खेतों के लिए खाद ले रहे है,तो आप इन तरीकों से असली और नकली खाद की आसानी से पहचान कर सकते है. और आप अपने खेतों के लिए नकली खाद लेने से बच सकते है.
अवैध खाद फैक्ट्री पर मारे गए छापे
आप को बता दे कि अभी चार दिन पहले चित्रकूट कृषि विभाग के द्वारा चित्रकूट के मऊ के सुरौंधा गांव में संचालित एक कथित अवैध खाद फैक्टरी पर छापेमारी कर कार्रवाई की गई है. वहां छापेमारी के दौरान मौके से भारी मात्रा में संदिग्ध खाद, निर्माण सामग्री तथा करीब 1000 खाली खाद की बोरियां बरामद हुईं थी. जिसमें जांच के दौरान पाया गया था कि सस्ती अथवा नकली खाद को भारत डीएपी के लेबल लगे बोरों में भरकर नकली डीएपी के रूप में तैयार किया जा रहा था. कार्रवाई के दौरान कुछ खाली बोरियां दुकान के पीछे से नदी में फेंक दी गईं, जिन्हें प्रशासन ने ग्रामीणों की मदद से बरामद कर अपने कब्जे में ले लिया था.जिस पर जिला कृषि अधिकारी आर.के. वर्मा अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और खाद के नमूने लेकर गोदाम को सील कर दिया था.
खाद खरीदते समय दे ध्यान
वही इस संबंध में जिला कृषि अधिकारी आर.के. वर्मा ने लोकल 18 को जानकारी में बताया कि किसानों को खाद खरीदते समय कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए. उनके अनुसार असली डीएपी के दाने मजबूत और कठोर होते हैं, यदि उन्हें नाखून से कुरेदा जाए तो वे आसानी से नहीं टूटते है. इसके साथ ही खाद के कुछ दानों को हाथ में लेकर उसमें थोड़ा चुना मिलाकर रगड़ने पर तेज गंध महसूस होती है, जो उसकी असली पहचान का एक संकेत हो सकता है. वहीं हाथ में लेकर फूंक मारने पर दानों पर हल्की नमी भी दिखाई देती है. इससे यह समझ आता है कि यह खाद असली है.
उन्होंने किसानों से अपील की कि खाद हमेशा अधिकृत और लाइसेंसधारी विक्रेताओं से ही खरीदें. पैकिंग पर संदेह हो तो तुरंत कृषि विभाग को सूचना दें.विभाग द्वारा जिले की खाद दुकानों की लगातार निगरानी की जा रही है और संदिग्ध मामलों में सख्त कार्रवाई की जा रही है.उनका कहना है कि नकली खाद का उपयोग करने से फसलों को अपेक्षित पोषण नहीं मिल पाता, जिससे उत्पादन प्रभावित होता है. इतना ही नहीं, किसानों का पैसा भी बेकार चला जाता है.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …
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