भास्कर न्यूज |गिरिडीह कृषि प्रधान जिला गिरिडीह में धान की खेती को अधिक लाभकारी, कम लागत वाली और पर्यावरण के अनुकूल बनाने के उद्देश्य से कृषि विभाग द्वारा किसानों के बीच नैनो यूरिया, नैनो डीएपी एवं जैव उत्पादों के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। कृषि विभाग के अनुसार नैनो यूरिया और नैनो डीएपी कम लागत, आसान परिवहन, 80 प्रतिशत से अधिक पोषक तत्व दक्षता तथा बेहतर अवशोषण के कारण किसानों के लिए लाभकारी साबित हो रहे हैं। इनका उपयोग फसलों की हरियाली, जड़ों के विकास और पैदावार में वृद्धि करता है। विभाग ने किसानों से आधुनिक तकनीकों को अपनाकर कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त करने का आह्वान किया। कृषि सलाहकार मधुकर कुमार ने बताया कि धान की फसल में रोपाई के 35वें और 45वें दिन इफको नैनो यूरिया का 5 मिली प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करने से पौधों की वृद्धि तेज होती है। इससे जड़ें मजबूत होती हैं, अधिक कल्ले निकलते हैं और दानों की गुणवत्ता में सुधार होता है।नैनो डीएपी और नैनो यूरिया के संतुलित उपयोग से पारंपरिक रासायनिक उर्वरकों पर 25 से 50 प्रतिशत तक निर्भरता कम की जा सकती है। इससे उत्पादन लागत घटती है, मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनी रहती है और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलता है। जिला कृषि पदाधिकारी आशुतोष तिवारी ने कहा कि लगातार रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। ऐसे में नैनो उर्वरकों और जैव उत्पादों का संतुलित उपयोग टिकाऊ खेती की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने किसानों से वैज्ञानिक सलाह के अनुसार उर्वरकों का प्रयोग करने की अपील करते हुए कहा कि इससे मिट्टी का स्वास्थ्य बेहतर रहेगा और फसलों को आवश्यक पोषक तत्व अधिक प्रभावी ढंग से मिलेंगे। आप खेती-किसानी से जुड़े किस विषय पर जानकारी चाहते हैं, वॉट्सएप नंबर 7 004690495 पर सिर्फ मैसेज करें।
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