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दो सहयोगी मोछू और गौरव भी पकड़े गए झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान में जुटे सुरक्षा बलों को मंगलवार को सबसे बड़ी सफलता मिली। एक करोड़ रुपये के इनामी शीर्ष नक्सली मिसिर बेसरा को गिरिडीह जिले से गिरफ्तार कर लिया गया। उसके साथ रीजनल कमेटी के सदस्य व 15 लाख रुपये के इनामी नक्सली मेहनत उर्फ मोछू और गौरव उर्फ सौरभ को भी पकड़ा गया। कोबरा, सीआरपीएफ और झारखंड पुलिस की संयुक्त टीम ने सटीक खुफिया जानकारी के आधार पर जाल बिछाकर यह कार्रवाई की। करीब दो दशक से फरार चल रहा मिसिर बेसरा सुरक्षा एजेंसियों की मोस्ट वांटेड सूची में शामिल था। उसकी गिरफ्तारी के बाद अब राज्य में एक करोड़ का इनामी सिर्फ एक नक्सली असीम मंडल बचा है। मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी से सारंडा और कोल्हान क्षेत्र में नक्सली नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि यह गिरफ्तारी झारखंड में नक्सलवाद के खात्मे की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है। फिलहाल तीनों नक्सलियों को गुप्त स्थान पर रखकर पुलिस, आईबी (IB) और अन्य केंद्रीय एजेंसियां पूछताछ कर रही हैं। सुरक्षा बल जंगलों में छिपाकर रखे गए अत्याधुनिक हथियारों और आईईडी (IED) की जानकारी जुटा रहे हैं, साथ ही नक्सलियों को लॉजिस्टिक और आर्थिक मदद पहुंचाने वाले ओवरग्राउंड वर्करों की तलाश भी की जा रही है। 11 अत्याधुनिक हथियार और 1,562 कारतूस के साथ 16 नक्सलियों ने किया सरेंडर रांची | झारखंड पुलिस मुख्यालय में मंगलवार को डीजीपी तदाशा मिश्रा के सामने 16 कुख्यात नक्सलियों ने 11 अत्याधुनिक हथियारों और 1,562 गोलियों/कारतूसों के साथ आत्मसमर्पण किया। आत्मसमर्पण करने वालों में 15 लाख का इनामी संतोष भी शामिल है। डीजीपी ने कहा कि जो नक्सली हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौट रहे हैं, उन्हें राज्य सरकार की आत्मसमर्पण व पुनर्वास नीति का पूरा लाभ मिलेगा। उन्होंने शेष बचे नक्सलियों से भी जल्द सरेंडर करने की अपील की। सीआरपीएफ के आईजी साकेत कुमार सिंह ने कहा कि पुलिस की आक्रामक और सटीक रणनीति के कारण झारखंड में माओवादियों की संख्या अब बेहद कम रह गई है। उनके अनुसार राज्य में अब सिर्फ 17 नक्सली सक्रिय हैं। इनमें 10 लाख का इनामी जोनल कमांडर सालुका कायम अपने दो साथियों के साथ पोड़ाहाट में सक्रिय है, जबकि एक करोड़ का इनामी केंद्रीय कमेटी सदस्य असीम मंडल नौ साथियों के साथ पूर्वी सिंहभूम-बंगाल सीमा पर मौजूद है। जानिए… कौन है मिसिर बेसरा? पीरटांड़ के मदनडीह निवासी मिसिर बेसरा उर्फ भास्कर, भाकपा (माओवादी) का पोलित ब्यूरो सदस्य है। उस पर हत्या, आईईडी ब्लास्ट, पुलिस पर हमला और आर्म्स एक्ट के 100 से ज्यादा मामले दर्ज हैं। सारंडा, कोल्हान, पारसनाथ और ट्राइजंक्शन (झारखंड-ओडिशा-बंगाल) उसके मुख्य कार्यक्षेत्र रहे हैं। वर्ष 2003-04 में पश्चिम सिंहभूम के बिटकिलसोय और बलिबा में हुए भीषण आईईडी ब्लास्ट की साजिश उसी ने रची थी, जिसमें 55 सुरक्षाकर्मी शहीद हुए थे। साल 2009 में बिहार के लखीसराय कोर्ट परिसर पर सशस्त्र नक्सलियों ने हमला कर उसे छुड़ा लिया था, जिसके बाद से वह लगातार फरार चल रहा था। इसलिए बड़ी है यह कामयाबी नक्सली थिंक टैंक ध्वस्त: मिसिर बेसरा केवल एक कमांडर नहीं, बल्कि माओवादी केंद्रीय समिति का सक्रिय सदस्य है। वह झारखंड, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में नक्सली नेटवर्क की पूरी रणनीति तय करता था। सारंडा-कोल्हान में लाल आतंक का अंत: पिछले दो दशकों से सारंडा के जंगलों और कोल्हान क्षेत्र में समानांतर सरकार चलाने तथा आईईडी विस्फोटों से सुरक्षाबलों को निशाना बनाने की मुख्य साजिश मिसिर ही रचता था। ऑपरेशन सुदर्शन: सटीक सूचना पर घेराबंदी, बिना एक भी गोली चलाए पकड़ा गया सुरक्षा एजेंसियों को खुफिया सूचना मिली थी कि सारंडा में सुरक्षाबलों के बढ़ते दबाव के कारण मिसिर बेसरा अपने दस्ते के साथ गिरिडीह और पारसनाथ की पहाड़ियों के रास्ते किसी नए ठिकाने की तलाश में निकल रहा है। इसके बाद सुरक्षाबलों ने ‘ऑपरेशन सुदर्शन’ शुरू किया। मंगलवार देर शाम पूरे इलाके को सील कर सर्च ऑपरेशन चलाया गया। कोबरा कमांडोज ने अंधेरे का फायदा उठाते हुए नक्सली दस्ते को चारों तरफ से घेर लिया। अचानक हुई इस कार्रवाई से मिसिर बेसरा और उसके साथियों को संभलने का मौका तक नहीं मिला और उन्हें बिना कोई गोली चलाए दबोच लिया गया।
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