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Tax on Property Sale : अगर आप पैतृक संपत्ति को बेचकर कैश में पैसे ले लेते हैं तो इसे भी आईटीआर में दिखाना जरूरी होता है. यह बात ध्यान रखें कि संपत्ति के लेनदेन में 20 हजार से ज्यादा कैश नहीं लेना चाहिए. इन पैसों की जानकारी आईटीआर में देने जरूरी होता है और इस पर नियम के तहत कैपिटल गेन टैक्स भी चुकाना होता है.
प्रॉपर्टी बेचने पर 20 हजार से ज्यादा का कैश लेनदेन नहीं कर सकते हैं.
नई दिल्ली. इनकम टैक्स का नियम बड़ा पेचीदा है. सरकार ने भले ही टैक्स के नियमों को सरल बनाने की तमाम कोशिशें की हैं, लेकिन अभी तक आम आदमी को इसकी जानकारी होना दूर की कौड़ी है. सोशल मीडिया पर एक यूजर ने डाली पोस्ट में बताया कि उसकी मां ने पैतृक संपत्ति को बेचकर 50 लाख रुपया कैश में ले लिया. उन्हें टैक्स की जानकारी नहीं थी, लेकिन पैसे लेने के बाद समझ आया कि इस बारे में जानकारी लेना जरूरी है. जब उन्होंने यह बात एक टैक्स एक्सपर्ट को बताई तो उन्होंने इन पैसों पर टैक्स को लेकर पूरी तस्वीर साफ कर दी.
सोशल मीडिया यूजर ने बताया कि उनकी मां को टैक्स के नियमों की जानकारी नहीं थी. यही वजह है कि वे बिल्डर की बातों में आ गईं और उन्होंने पैतृक संपत्ति को बेचकर 50 लाख रुपये कैश में ले लिए. डील के समय वह अकेली थीं और बिल्डर ने उन्हें कैश में लेनदेन के लिए मना लिया. एक बार डील पूरी हो गई तो आईटीआर भरते समय उन्होंने अपने सीए को इस बारे में बताया. टैक्स एक्सपर्ट ने उन्हें पूरा नियम समझाते हुए इस पर लगने वाले इनकम टैक्स के बारे में भी जानकारी दी.
आईटीआर में इसकी जानकारी कैसे दें
टैक्स एक्सपर्ट का कहना है कि पैतृक संपत्ति बेचकर होने वाली कमाई को सामान्य इनकम के तौर पर रिपोर्ट नहीं करना होता है, बल्कि कैपिटल गेन के रूप में इसे आईटीआर में दिखाना पड़ता है. अगर करदाता ने संबंधित फाइनेंशियल ईयर में कोई और इनकम नहीं प्राप्त की है तो रिटर्न फॉर्म सिर्फ इसी इनकम के आधार पर चुना जाएगा. अगर आपकी कमाई सिर्फ कैपिटल गेन से जुड़ी है तो आईटीआर-2 फॉर्म भरने की जरूरत होती है.
पैतृक संपत्ति पर कैसे लगेगा कैपिटल गेन टैक्स
पैतृक संपत्ति पर कैपिटल गेन टैक्स की गणना करते समय इसकी लागत को भी ध्यान में रखना होता है. टैक्स एक्सपर्ट का कहना है कि बिक्री के समय मिली लागत में से उस राशि को घटाना होता है जो इसके पूर्व मालिक ने इसे खरीदते समय खर्च की थी. इसके अलावा अन्य खर्चों को शामिल करने के बाद उस राशि को मार्केट वैल्यू के हिसाब से जोड़ने के बाद बिक्री की राशि में से घटाकर वास्तविक मूल्य निकाला जाता है.
कैसे होगी टैक्स की गणना
प्रॉपर्टी के पूर्व मालिक ने इसे जितने समय तक अपने पास रखा है, उस अवधि को भी प्रॉपर्टी बेचने वाले ऑनर के होल्डिंग पीरियड में जोड़ दिया जाता है. इसेस पता चलता है कि बेचकर मिली राशि पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगेगा अथवा शॉर्ट टर्म. सामान्य तौर पर पैतृक संपत्ति को लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स के तहत रखा जाता है. इस पर मुनाफे की गणना लागत और अन्य खर्चों को निकालकर की जाती है. अगर आपकी प्रॉपर्टी 23 जुलाई, 2024 से पहले खरीदी गई है तो उस पर 20 फीसदी टैक्स लगेगा और इंडेक्सेशन यानी महंगाई दर का भी लाभ दिया जाएगा. इसके बाद की सभी संपत्तियों पर सीधे 12.5 फीसदी का ब्याज देना पड़ेगा और इस पर महंगाई की छूट नहीं मिलेगी.
कैश में लेने पर क्या होगा
इनकम टैक्स का नियम साफ कहता है कि संपत्ति के लेनदेन में 20 हजार रुपये से ज्यादा कैश में नहीं दिया जा सकता है. सेक्शन 269SS का नियम साफ कहता है कि किसी भी तरह का लेनदेन 20 हजार से ज्यादा कैश में नहीं हो सकता है. इससे ज्यादा के लेनदेन पर नोटिस आ सकता है. हालांकि, अगर आप टैक्स के नियमों के तहत इस पर भुगतान कर देते हैं तो नोटिस से बच सकते हैं लेकिन पैसे देना जरूरी होता है.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…
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