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मगरमच्छ दिखा तो हीरो बनने की कोशिश न करें, एक गलती पड़...


बहराइच: जहां एक ओर जनपद बहराइच में मगरमच्छ की घटना किसी से छिपी नहीं है, नदी किनारे हाथ धोने गए 12 वर्षीय सुनील को बीती 16 जुलाई को मगरमच्छ ने अपना निवाला बना लिया और जिंदा चबा गया, तो वहीं छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले के बावा मोहतरा गांव में गंगाराम नाम का एक मगरमच्छ 130 साल तक तालाब में रहा, लेकिन उसने किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया. आखिर ऐसा कैसे? अगर आप भी नदी के किनारे जा रहे हैं या आपका घर नदी के आसपास है तो मगरमच्छ से सुरक्षा और सावधानी के बारे में जरूर जान लें, ताकि जान बचाई जा सके.

मानसून में नदियों का जलस्तर बढ़ते ही शुरू होता है खतरा

मानसून के मौसम में तराई क्षेत्रों में घाघरा आदि नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ने लगता है और नदियां छिछली होकर किसानों के खेतों और कई बार गांवों तक फैल जाती हैं. ऐसे में जब नदियां फैलती हैं तो इनमें रहने वाले जलीय जीव, मछली, मगरमच्छ आदि भी नए इलाकों में पहुंचने लगते हैं.

कई बार ये छिछले पानी के सहारे आबादी के किनारे जाकर घात लगाए रहते हैं और मौका पाकर हमला कर देते हैं. मानसून के दौरान जलस्तर बढ़ने पर धान के खेतों, जलकुंभी या घनी झाड़ियों में पानी जमा होने के कारण मगरमच्छ अक्सर इंसानी बस्तियों, खेतों या छिछले पानी वाले इलाकों में आ जाते हैं.

मानसून में क्यों ज्यादा सक्रिय हो जाते हैं मगरमच्छ

नदियों और तालाबों का जलस्तर बढ़ने से मगरमच्छ नए और छिछले पानी वाले इलाकों जैसे धान के खेत और नालों में आसानी से पहुंच जाते हैं. भोजन की तलाश और सुरक्षित ठिकाने की तलाश में इस दौरान इनकी सक्रियता बढ़ सकती है.

पानी के बहाव के साथ ये भोजन और सुरक्षित स्थान की तलाश में नए क्षेत्रों तक पहुंच जाते हैं. घनी जलकुंभी, झाड़ियों और मटमैले पानी में ये खुद को आसानी से छिपा लेते हैं, जिससे इन्हें भांप पाना मुश्किल हो जाता है. पानी में या उसके ठीक किनारे अचानक और तेजी से हमला करने की इनकी क्षमता होती है.

मगरमच्छ से बचने के लिए अपनाएं ये सावधानियां

कतर्नियाघाट वन अधिकारी अपूर्व दीक्षित ने जानकारी देते हुए बताया कि ऐसी स्थिति में मगरमच्छ या अन्य वन्यजीवों से सुरक्षा के लिए सबसे जरूरी है कि सुरक्षित दूरी बनाए रखें. मगरमच्छ दिखने पर उसके पास जाने या फोटो और वीडियो बनाने का प्रयास बिल्कुल न करें. इनके झपटने की क्षमता बेहद तेज होती है.

मानसून के दौरान बच्चों को नदियों, छिछले गड्ढों, तालाबों या जलभराव वाले क्षेत्रों में नहाने या खेलने न दें. ऐसे किसी भी स्थान पर जाने से बचें, जहां पानी के किनारे जलकुंभी, घनी झाड़ियां या ऊंची घास उगी हो.

सुबह शाम पानी के किनारे जाने से बचें

शाम या सुबह जब उजाला कम होता है, उस समय पानी के स्रोतों के पास जाने से बचना चाहिए. कम रोशनी में मगरमच्छ को देख पाना मुश्किल हो सकता है. इसलिए नदी, तालाब या जलभराव वाले क्षेत्रों के आसपास अतिरिक्त सावधानी बरतना जरूरी है.

मगरमच्छ दिखे तो खुद भगाने की कोशिश न करें

अगर आबादी वाले इलाके के आसपास मगरमच्छ दिखाई दे तो सबसे पहले इसकी सूचना वन विभाग को तुरंत दें. वन विभाग की टीम मौके पर पहुंचकर लोगों को सतर्क करती है और जरूरत के अनुसार रेस्क्यू की कार्रवाई करती है.

गांव में अक्सर लोग मगरमच्छ दिखने पर खुद ही उसे भगाने का प्रयास करने लगते हैं, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं करना चाहिए. मगरमच्छ के पास जाने या उसे घेरने से हमला होने का खतरा बढ़ सकता है. तुरंत स्थानीय वन विभाग की टीम या संबंधित हेल्पलाइन से संपर्क करें, ताकि विशेषज्ञ टीम सुरक्षित तरीके से उसे रेस्क्यू कर सके.

सावधानी बरतकर टाला जा सकता है बड़ा हादसा

मानसून के दौरान नदियों, तालाबों और जलभराव वाले क्षेत्रों के आसपास अतिरिक्त सतर्कता बेहद जरूरी है. मगरमच्छ या किसी अन्य वन्यजीव को देखकर उससे दूरी बनाए रखना, बच्चों को पानी वाले क्षेत्रों से दूर रखना और वन विभाग को सूचना देना ही सबसे सुरक्षित तरीका है. इन सावधानियों को अपनाकर मगरमच्छ से होने वाले हादसों का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है.



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