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When Kanwar Yatra First Started: सावन शुरू होते ही देशभर में हर-हर महादेव के जयकारों के साथ कांवड़ यात्रा की धूम है. हरिद्वार, सुल्तानगंज-देवघर और गंगोत्री मुख्य कांवड़ यात्राएं हैं. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के विष की ज्वाला शांत करने के लिए भगवान शिव पर गंगाजल चढ़ाने की परंपरा शुरू हुई थी, जिसे रावण और परशुराम ने आगे बढ़ाया. कठिन नियमों, अनुशासन और अटूट श्रद्धा से भरी यह यात्रा सामाजिक एकता, सेवा भावना और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई ऊर्जा प्रदान करती है.
देश की पाठशाला.
सावन का महीना शुरू होने के साथ ही हर तरफ बोल बम और हर-हर महादेव के नारे गूंज रहे हैं. शिवभक्त कंधों पर कांवड़ लिए गंगाजल लेने निकल पड़े हैं. हरिद्वार से काशी और सुल्तानगंज से देवघर तक, आस्था का ऐसा महासैलाब उमड़ा है, जिसकी तस्वीरें देखकर आप हैरान हो जाएंगे. कंधे पर कांवड़, भगवा भेष, हर-हर महादेव के जयकारे और सैकड़ों किलोमीटर की पैदल यात्रा. कोई नंगे पैर चल रहा है. कोई दंडवत करते हुए आगे बढ़ रहा है. किसी ने 15 फीट ऊंची कांवड़ कंधे पर उठा रखी है. तो कोई दौड़ते हुए जल लेकर जा रहा है. ये कोई और नहीं भोले के भक्त हैं.
सावन शुरू हो चुका है और देश के अलग-अलग हिस्सों में ऐसी ही तस्वीर दिखाई दे रही है. सड़कें कांवड़ियों से पटी पड़ी हैं जो भोले की भक्ति में मगन हैं. वैसे तो देशभर में ना जाने कितने तरह की राजनीतिक और धार्मिक यात्राएं निकलती हैं. लेकिन कांवड़ यात्रा का बहुत ही खास महत्व है. अलग-अलग जगहों से जल भरकर श्रद्धालु भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं. हरिद्वार…गौमुख-गंगोत्री..सुल्तान गंज से देवघर…गढ़मुक्तेश्वर…प्रयागराज…काशी और सोनीपत–पानीपत–मेरठ–मुजफ्फरनगर के साथ देश के अलग-अलग हिस्सों में कांवड़ यात्राएं निकलती हैं. लेकिन तीन कांवड़ यात्राओं का खास धार्मिक महत्व है.
पहली कांवड़ यात्रा है उत्तराखंड की हरिद्वार कांवड़ यात्रा- यह देश की सबसे बड़ी कांवड़ यात्रा मानी जाती है. श्रद्धालु हर की पौड़ी से गंगाजल भरकर दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और आसपास के राज्यों के शिवालयों में जलाभिषेक करते हैं. दूसरी कांवड़ यात्रा है बिहार-झारखंड की सुल्तानगंज–देवघर कांवड़ यात्रा. ये पूर्वी भारत की सबसे बड़ी कांवड़ यात्रा है. जिसमें शिवभक्त 105 किलोमीटर की यात्रा करते हैं. श्रद्धालु सुल्तानगंज में उत्तरवाहिनी गंगा से जल भरते हैं. पैदल यात्रा कर झारखंड के देवघर में बाबा बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग पर जलाभिषेक करते हैं. इसे श्रावणी कांवड़ यात्रा भी कहा जाता है. तीसरी कांवड़ यात्रा है उत्तराखंड की गंगोत्री कांवड़ यात्रा. इसमें श्रद्धालु गंगा के उद्गम स्थल गंगोत्री से जल लेकर लंबी यात्रा करते हैं. श्रद्धालु अपने आसपास के शिवालय या फिर ज्योतिर्लिंगों पर जलाभिषेक करते हैं. इसे सबसे कठिन और अत्यंत पुण्यदायी कांवड़ यात्रा में माना जाता है.