गुजरात में चांदीपुरा या चांदीपुरम नाम की बीमारी ने हलचल मचा रखी है. गुजरात में चांदीपुरा वायरस को लेकर चिंताजनक स्थिति सामने आई है. गुजरात में मॉनसून के दौरान चांदीपुरा वायरस के संक्रमण से कम से कम 22 बच्चों की मौत हो चुकी है. इससे बच्चों में इस दुर्लभ लेकिन जानलेवा वायरल बीमारी के फैलने को लेकर चिंता बढ़ गई है. गुजरात के स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल्ल पानशेरिया ने बताया कि जिन 184 मरीज़ों (जिनमें संदिग्ध मामले भी शामिल हैं) के ब्लड सैंपल की जांच की गई, उनमें से 35 लोग चांदीपुरा वायरस से संक्रमित पाए गए.
चांदीपुरा वायरस के मामलों में बढ़ोतरी के बाद गुजरात स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित इलाकों में निगरानी, टेस्टिंग और मॉनिटरिंग बढ़ा दी है ताकि संदिग्ध संक्रमण की जल्द पहचान हो सके और इसे और फैलने से रोका जा सके. यह वायरस सीधे बच्चों के दिमाग पर हमला करता है, जिसके कारण इस बीमारी में मौत की दर बहुत ज्यादा है. लेकिन अगर सही समय पर इलाज मिल जाए तो बच्चे को बचाया जा सकता है. चलिए जानते हैं इस वायरस के बारे में सबकुछ.
चांदीपुरा नाम कैसे पड़ा, इस वायरस से देश में कितनी मौतें हुई हैं?
इस वायरस का पहला मामला साल 1965 में महाराष्ट्र के चांदीपुरा गांव में सामने आया था. इसके बाद इस बीमारी का नाम चांदीपुरा रखा गया. उस समय मरीज़ में डेंगू जैसे लक्षण देखे गए थे. 2003 तक इस वायरस को एक आम वायरस माना जाता था और लोगों के लिए इससे ज़्यादा खतरा नहीं माना जाता था. हालांकि, 2003 में आंध्र प्रदेश में इस वायरस के ज़्यादा मामले सामने आए थे. उस समय चांदीपुरा वायरस की वजह से 183 बच्चों की मौत हो गई थी. 2004 में गुजरात में इस वायरस की वजह से 18 बच्चों की मौत हो गई थी. जिसके बाद 2005 में पश्चिम बंगाल में इस बीमारी की वजह से 49 बच्चों की मौत हो गई थी. 2024 में गुजरात में इस बीमारी ने फिर से सिर उठाया और 82 बच्चों की मौत हो गई. 1965 से यह बीमारी महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा और बिहार में देखी गई है. अभी गुजरात में 22 बच्चों की मौत हो चुकी है
चांदीपुरा वायरस क्या है?
चांदीपुरा वायरस (CHPV) एक दुर्लभ लेकिन बहुत खतरनाक वायरल संक्रमण है. इससे एक्यूट एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम (AES) होता है. यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें दिमाग में सूजन आ जाती है और यह तेज़ी से जानलेवा हो सकती है. यह वायरस रैब्डोविरिडे (Rhabdoviridae) परिवार का है और मुख्य रूप से 15 साल से कम उम्र के बच्चों को प्रभावित करता है.
चांदीपुरा वायरस कैसे फैलता है?
चांदीपुरा वायरस मुख्य रूप से मच्छरों और सैंडफ्लाई से फैलता है. चांदीपुरा वायरस फैलाने वाली मक्खी आम मक्खी से चार गुना छोटी होती है. जो मुख्य रूप से मिट्टी के घरों की दीवारों के बीच की दरारों में रहती है और बच्चों को काटती है। यह बीमारी मुख्य रूप से 0 से 14 साल की उम्र के बच्चों में देखी जाती है.
चांदीपुरा वायरस फैलाने वाली सैंडफ्लाई कहां रहती है?
सैंडफ्लाई नमी वाले माहौल में घर के अंदर मिट्टी या मिट्टी की दीवार पर रहती हैं.
सैंडफ्लाई कैसे पेदा होता है?
• सैंडफ्लाई अपने बच्चे पैदा करने के लिए अंडे देती हैं. मच्छरों की तरह, ये लार्वा/केशोटो और फिर बड़ी मक्खियों में बदल जाती हैं.
• ये सैंडफ्लाई कभी कभी आँखों से दिखाई नहीं देतीं, ये आम मक्खियों से चार गुना छोटी होती हैं.
• सैंडफ्लाई घर की अंदर और बाहर की मिट्टी की दीवारों की दरारों में और नमी वाले माहौल में अंडे देती हैं.
• गांव के इलाकों में, खासकर मिट्टी के घरों में, ये दीवारों की दरारों और दीवारों में छोटे छेदों में रहती हैं.
सैंडफ्लाई से कौन-कौन सी बीमारियां फैलती हैं?
सैंडफ्लाई चांदीपुरम और काला अजार जैसी बीमारियों को फैलाने के लिए ज़िम्मेदार हैं. चांदीपुरम बीमारी आमतौर पर 0 से 14 साल के बच्चों में देखी जाती है (कम इम्यूनिटी के कारण).
सैंडफ्लाई से फैलने वाली चांदीपुरम बीमारी के लक्षण क्या हैं?
- बच्चे को तेज़ बुखार
- डायरिया
- उल्टी
- ऐंठन
- आधा बेहोशी या बेहोशी
सैंडफ्लाई से फैलने वाली बीमारियों से बचने के लिए क्या किया जा सकता है?
1) सैंडफ्लाई से बचने के लिए घर की दीवारों के अंदर और बाहर के छेदों और दरारों को बंद कर देना चाहिए.
2) ऐसा इंतज़ाम करें कि हवा (सूरज की रोशनी) जितना हो सके घर के अंदर आए.
3) 14 साल तक के बच्चों को कीटनाशक लगी मच्छरदानी में सुलाने की आदत डालें.
4) जहाँ तक हो सके, बच्चों को घर के बाहर आँगन (फलिया में) में खुली हवा में न सोने दें.
चांदीपुरा वायरस किस मौसम में ज़्यादा फैलता है?
चांदीपुरा वायरस ज़्यादातर गांव के इलाकों में पाया जाता है. इसका मुख्य कारण मिट्टी के घर हैं. यह बीमारी ज़्यादातर मानसून के मौसम में अपना सिर उठाती है. क्योंकि मानसून के दौरान सैंडफ्लाई ज़्यादा एक्टिव होती हैं. हालांकि, यह बीमारी सिर्फ़ गांवों में बच्चों में ही नहीं फैलती है. साल 2024 में अहमदाबाद, सूरत और राजकोट में भी चांदीपुरा बीमारी के मामले सामने आए थे. इस साल यानी 2026 में अहमदाबाद में चांदीपुरा बीमारी से एक मौत की खबर है.
चांदीपुरा वायरस कितना खतरनाक है?
एक रिपोर्ट के मुताबिक, 31 जुलाई 2024 तक गुजरात में चांदीपुरा के 148 संदिग्ध मामले सामने आए थे. जिनमें से 140 मामले गुजरात से, 4 मामले मध्य प्रदेश से, 3 मामले राजस्थान से, 1 मामला महाराष्ट्र से था. जिनमें से कुल 59 मरीज़ों की मौत हो गई. जिनमें से 51 मरीज़ों की मौत चांदीपुरा से होने की पुष्टि हुई. इससे अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि यह वायरस कितना खतरनाक है और अगर तुरंत इलाज न मिले तो मौत हो सकती है. डॉक्टरों के मुताबिक, यह वायरस बच्चे के दिमाग पर हमला करता है. अगर वायरस बच्चे के दिमाग तक नहीं पहुंचता है, तो हो सकता है कि वह बच जाए. अगर वायरस बच्चे के दिमाग के 60-70 प्रतिशत हिस्से तक पहुंच जाता है, तो उसे बचाना मुश्किल हो जाता है.