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मेरठः अलीगढ़ का भोला कांवड़ में अपनी बेटी और भांजी को बैठा...


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अलीगढ़ के रहने वाले भोले ने लोकल 18 से बताया कि अबकी बार हरिद्वार से उन्होंने दो कांवड़ एक साथ उठाई है. जिसमें की एक कांवड़ में जहां उनकी बेटी और दूसरे जगह बेटी के बराबर जल है. वहीं दूसरी में उनकी भांजी और उसके बराबर जल है. वह हरिद्वार से पैदल यात्रा करते हुए अपने गृह जनपद अलीगढ़ तक जा रहे हैं. जिसमें कि उनके साथ महत्वपूर्ण भूमिका उनके पत्नी निभा रही है.

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मेरठः पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ में भी अब कांवड़ यात्रा के अनोखे रंग देखने को मिल रहे हैं. जिसमें भोले भक्त कावड़िए बम बम भोले के जयकारों के साथ हरिद्वार, गंगोत्री, ऋषिकेश से जल लेकर अपने-अपने गृह जनपद जाते हुए दिखाई दे रहे हैं. ऐसे में हर बार देखने को मिलता है कि कोई भोले अपने माता-पिता को हरिद्वार, ऋषिकेश के दर्शन कराकर लाते है. तो कोई भोली भी अपनी मां या पिता को ऐसे ही दर्शन करा कर अपने गृह जनपद जाते हुए दिखाई देती है. लेकिन अबकी बार मेरठ में कुछ अलग ही नजारा देखने को मिला. जब अलीगढ़ के रहने वाले भोले अपनी भांजी व और बेटी को कांवड़ में बिठाकर अपने गृह जनपद लेकर जा रहे थे.

हरिद्वार से अलीगढ़ तक कर रहे हैं पैदल यात्रा

लोकल 18 से खास बातचीत करते हुए अलीगढ़ के रहने वाले भोले ने बताया कि अबकी बार हरिद्वार से उन्होंने दो कांवड़ एक साथ उठाई है. जिसमें की एक कांवड़ में जहां उनकी बेटी और दूसरे जगह बेटी के बराबर जल है. वहीं दूसरी में उनकी भांजी और उसके बराबर जल है. वह हरिद्वार से पैदल यात्रा करते हुए अपने गृह जनपद अलीगढ़ तक जा रहे हैं. जिसमें कि उनके साथ महत्वपूर्ण भूमिका उनके पत्नी निभा रही है. उन्होंने बताया कि उनका उद्देश्य यही है कि लोग नारी शक्ति के सम्मान को समझें और अपने धर्म का सम्मान करते हुए धर्म की रक्षा के लिए आगे आए.

इस तरह कर रहे हैं कांवड़ यात्रा

उन्होंने बताया कि वह एक साथ दोनों कांवड़ को लेकर जा रहे हैं. जहां पहले कांवड़ में भांजी को लेकर वह कुछ दूरी तक जाते हैं. उसके पश्चात फिर अपनी बेटी को लेकर आते हैं. इसी तरह से निरंतर वह अपने कांवड़ यात्रा के संचालन को आगे बढ़ते जा रहे हैं. उन्होंने बताया कि इसमें भोले बाबा की भी विशेष कृपा है. कि वह हरिद्वार से मेरठ तक इसी तरीके से कांवड़ लेकर आ रहे हैं. लेकिन उन्हें बिल्कुल भी थकान महसूस नहीं हुई है.

पिछले साल अपनी मां को कराई थी यात्रा

भोले ने बताया कि अपनी मां को हरिद्वार के दर्शन कराकर इसी तरह से कांवड़ में बिठाकर अपने गृह जनपद तक लेकर गए थे. उस साल उन्होंने माता-पिता के सम्मान के लिए कांवड़ उठाई थी. जिससे कि युवा पीढ़ी अपने माता-पिता के कठिन परिश्रम को समझ सके. बताते चलें कि अब धीरे-धीरे मेरठ में यात्रियों की संख्या में इजाफा देखने को मिल रहा है. इसी वजह से मेरठ प्रशासन द्वारा भी जहां तीन अगस्त से 12 अगस्त तक स्कूलों को बंद कर दिया गया है. वहीं विभिन्न रूट को भी डायवर्ट कर दिया गया है. जिससे कि भोले भक्त को दिक्कत ना हो.

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Rajneesh Kumar Yadav

Rajnish Kumar Yadav is a digital journalist and content publisher with over seven years of experience in print and digital media. He is currently working with News18 Digital (Local18) as a Content Publisher, wh…

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