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नौकरी पाने के लिए स्टूडेंट्स बड़ी मेहनत और लगन से पढ़ाई लिखाई करते हैं. इसके बाद भी कई लोग नौकरी पाने में सफल नहीं हो पाते हैं. इससे बहुत से स्टूडेंट्स निराश हो जाते हैं और कई बार तो डिप्रेशन के भी शिकार होने लगते हैं. ऐसे में समय के हिसाब से लोगों को अपने एक प्लान के साथ दूसरे प्लान के लिए भी मानसिक रूप से तैयार रहना चाहिए.
देशभर में तमाम युवा अपनी पसंदीदा नौकरी पाने के लिए तमाम तरह के प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करते हैं. परीक्षा में आप तभी सफल माने जाते हैं जब आप उन सीमित सीटों पर अपनी जगह बनाने में सफल होते हैं. वैकेंसी ज्यादा होने पर और भी ज्यादा लोग सफल लोगों की गिनती में शामिल हो सकते हैं लेकिन, सीमित वैकेंसी में अपनी जगह बनाना ही परीक्षा है. तमाम प्रतियोगी परीक्षाओं का पैटर्न भी बदल रहा है. इससे छात्रों के लिए समस्या और जटिल होती जा रही है. किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में सफलता केवल मेहनत से नहीं, बल्कि सही रणनीति, अनुशासन और उचित मार्गदर्शन से मिलती है. इसी उद्देश्य से पलामू में छात्रों और अभिभावकों के लिए करियर काउंसिलिंग कार्यक्रम का आयोजन किया गया.
दरअसल, कार्यक्रम के दौरान भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी ऋत्विक मेहता ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को सफलता के कई महत्वपूर्ण मंत्र दिए. उन्होंने कहा कि यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा की तैयारी करने वाले छात्रों को केवल एक लक्ष्य पर निर्भर नहीं रहना चाहिए, बल्कि प्लान A के साथ हमेशा प्लान B भी तैयार रखना चाहिए. इससे यदि किसी कारणवश पहली योजना सफल नहीं होती है तो दूसरा विकल्प करियर को आगे बढ़ाने में मददगार साबित होता है.
उन्होंने कहा कि यूपीएससी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को बीपीएससी, जेपीएससी और अन्य प्रतिष्ठित सरकारी परीक्षाओं में भी शामिल होना चाहिए. कई बार अच्छी तैयारी होने के बावजूद अंतिम चयन नहीं हो पाता, लेकिन वही तैयारी दूसरी परीक्षाओं में सफलता का रास्ता खोल देती है. इसलिए एक ही परीक्षा तक खुद को सीमित रखना उचित नहीं है.
उन्होंने कहा कि काउंसिलिंग के दौरान छात्रों ने सबसे अधिक सवाल सिलेबस मैनेजमेंट, बदलते परीक्षा पैटर्न, कॉन्सेप्ट क्लियर करने और करंट अफेयर्स की तैयारी को लेकर पूछे. इस पर आईएएस ऋत्विक मेहता ने बताया कि यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा के लिए इतिहास, भूगोल, भारतीय राजव्यवस्था, अर्थव्यवस्था और पर्यावरण जैसे विषयों पर मजबूत पकड़ बनाना बेहद जरूरी है. इन विषयों की तैयारी के लिए सबसे पहले एनसीईआरटी की किताबों को अच्छी तरह पढ़ें और भारतीय राजव्यवस्था के लिए एम. लक्ष्मीकांत जैसी प्रमाणिक पुस्तकों का अध्ययन करें.
उन्होंने आगे कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में केवल पढ़ना ही पर्याप्त नहीं है. नियमित मॉक टेस्ट, उत्तर लेखन (Answer Writing) और पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों का अभ्यास सफलता की संभावना को काफी बढ़ा देता है. इसके साथ ही प्रतिदिन अखबार पढ़ने की आदत विकसित करें और करंट अफेयर्स के लिए मासिक कंपाइलेशन का भी अध्ययन करें. इससे समसामयिक घटनाओं की बेहतर समझ विकसित होती है, जो प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा दोनों में उपयोगी साबित होती है.
आईएएस ऋत्विक मेहता ने आगे कहा कि लिखित परीक्षा के साथ-साथ इंटरव्यू में अनुशासन, व्यक्तित्व और आत्मविश्वास भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है. उन्होंने छात्रों से कहा कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता. सही दिशा, निरंतर अभ्यास, धैर्य और वैकल्पिक योजना के साथ आगे बढ़ने वाले अभ्यर्थियों के सफल होने की संभावना कहीं अधिक होती है. उन्होंने युवाओं से अपील की कि लक्ष्य बड़ा रखें, लेकिन परिस्थितियों को देखते हुए विकल्प भी तैयार रखें. यही रणनीति भविष्य में निश्चित सफलता की मजबूत नींव बनती है.
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