पलामू. मानसून के सीजन आते ही वातावरण में नमी बढ़ जाती है, जिससे बैक्टीरिया और फंगस जैसे सूक्ष्म जीव तेजी से पनपते हैं. इसका सीधा असर सिर की त्वचा (स्कैल्प) पर पड़ता है. ऐसे में स्कैल्प में संक्रमण, रूसी, खुजली और बालों की जड़ों के कमजोर होने जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं. जिसके कारण इस मौसम में कई लोगों के बाल सामान्य दिनों की तुलना में अधिक झड़ने लगते हैं. ऐसे में बालों की नियमित सफाई, उचित देखभाल और संतुलित खान-पान बेहद जरूरी हो जाता है.
क्या वाकई जाता है गंजापन
वहीं, सोशल मीडिया पर कुछ तेलों के बारे में दावा किया जाता है कि इनसे गंजेपन से छुटकारा मिलता है. कई लोग इसे गंजेपन का अचूक इलाज बताते हैं. ऐसे में लोगों के मन में सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या वास्तव में इन तेलों के इस्तेमाल से गंजेपन से छुटकारा मिल सकता है या नहीं. इस संबंध में लोकल18 ने आयुर्वेद के जानकार से बात कर इसके पीछे की सच्चाई जाननी चाही.
कोई तेल नहीं दिला सकता छुटकारा
पलामू जिले के आयुर्वेद के जानकार शिव कुमार पांडे वर्षों से आयुर्वेदिक तेल और कई तरह की चीजों का निर्माण कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि कोई भी तेल पूर्ण रूप से गंजेपन से छुटकारा नहीं दिला सकता है. मुख्य रूप से आदि काल से तैयार होने वाला एक आयुर्वेदिक तेल लगभग 13 प्रकार की औषधीय जड़ी-बूटियों का मिश्रण होता है. जिसके बारे में आयुर्वेदिक ग्रंथों में भी वर्णन किया गया है.
इनका उपयोग वर्षों से बालों और सिर की त्वचा की देखभाल के लिए किया जाता रहा है. यदि इसे सही विधि और प्रमाणित औषधियों के साथ तैयार किया जाए तो यह बालों की जड़ों को पोषण देने, स्कैल्प को स्वस्थ रखने और बालों के टूटने-झड़ने की समस्या को कम करने में सहायक हो सकता है.
क्या गंजेपन का इलाज है आदिवासी तेल?
उन्होंने कहा कि किसी भी तेल को गंजेपन का चमत्कारी इलाज मानना सही नहीं होगा. यदि किसी व्यक्ति के बालों की जड़ें पूरी तरह नष्ट हो चुकी हैं, तो केवल तेल लगाने से नए बाल उगना संभव नहीं है. हालांकि, जिन लोगों की बालों की जड़ें अभी भी सक्रिय हैं और बाल कमजोर होकर झड़ रहे हैं, उनके लिए यह तेल लाभकारी हो सकता है. इसलिए गंजेपन का कारण जाने बिना किसी भी तेल को रामबाण इलाज मानना उचित नहीं है.
मस्तिष्क को ठंडक और रक्त संचार में हो सकता है लाभ
उन्होंने बताया कि आयुर्वेदिक तेल में मौजूद प्राकृतिक तत्व सिर की त्वचा को पोषण देने के साथ-साथ मस्तिष्क को ठंडक पहुंचाने में भी मदद कर सकते हैं. नियमित रूप से सप्ताह में एक या दो बार सिर की हल्की मालिश करने से स्कैल्प में रक्त संचार बेहतर हो सकता है, जिससे बालों की गुणवत्ता बनाए रखने में सहायता मिलती है. हालांकि, इसका प्रभाव व्यक्ति की शारीरिक स्थिति और बालों की समस्या पर निर्भर करता है.
विशेषज्ञ की सलाह जरूरी
आगे कहा कि बाल झड़ने या गंजेपन की समस्या होने पर केवल सोशल मीडिया के दावों पर भरोसा न करें. अगर समस्या लगातार बनी रहे तो त्वचा रोग विशेषज्ञ या आयुर्वेद चिकित्सक से परामर्श लेकर ही किसी तेल या उपचार का उपयोग करें. संतुलित आहार, पर्याप्त नींद, तनाव पर नियंत्रण और बालों की नियमित देखभाल ही लंबे समय तक स्वस्थ बालों का सबसे प्रभावी उपाय है. आप अपने डॉक्टर से सलाह लेकर इसका इस्तेमाल कर सकते हैं.