पलामू: झारखंड के पलामू के साहित्यकार शिव कुमार पांडे ने अपनी अनूठी रचना के जरिए हिंदी भाषा और साहित्य की दुनिया में अलग पहचान बनाई है. उन्होंने संपूर्ण वर्णमाला शैली में रामायण की रचना की है. इसमें हिंदी वर्णमाला के सभी वर्णों और मात्राओं को शामिल किया गया है. खास बात यह है कि महज 27 शब्दों और 80 अक्षरों में रामायण का सार प्रस्तुत किया गया है. शिव कुमार पांडे की इस अनूठी रचना को कई बुद्धिजीवियों और साहित्य से जुड़े लोगों के सामने रखा गया. उनसे रचना में किसी कमी या किसी वर्ण के छूटने की संभावना तलाशने को कहा गया. इसके बावजूद कोई भी उनकी रचना में कमी नहीं निकाल पाया. रचना की यही विशेषता इसे खास बनाती है.
इस रचना की सबसे बड़ी विशेषता
शिव कुमार पांडे ने लोकल18 को बताया कि उनकी रचना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें बेहद सीमित शब्दों में रामायण के प्रमुख पात्रों, घटनाओं और कथा को समेटा गया है. इसके साथ ही हिंदी वर्णमाला के सभी वर्णों और मात्राओं को भी इसमें शामिल किया गया है. उनकी रचना में ‘दशरथ कौशल्यासुत धनुर्धर श्रीराम सुमति क्षत्रिय सञ्जय ज्ञानी गुणी भयहारी जानकीपति कैकेयी कृपा अतः झगड़ालू खर कुचेष्टा तोड़ते छली रावण घर रडग ढंग ठाठ, बाणो से फोड़ते!’ जैसे शब्दों के जरिए रामकथा का सार प्रस्तुत किया गया है. रचना में इस्तेमाल किए गए हर शब्द के पीछे भाषा और कथा, दोनों का संतुलन दिखाई देता है.
AI को भी दी चुनौती
शिव कुमार पांडे ने बताया कि उनकी रचना की कठिनाई को परखने के लिए AI को भी चुनौती दी गई. AI से भी कहा गया कि वह कम से कम शब्दों और अक्षरों में संपूर्ण हिंदी वर्णमाला को शामिल करते हुए रामायण का सार तैयार करे. शुरुआत में AI ने इस चुनौती को स्वीकार किया. उसने कम शब्दों में रामायण की कथा और हिंदी वर्णमाला के सभी वर्णों को समेटने की कोशिश की. इसके तहत AI की ओर से ‘श्रीमद रामज्ञ प्रभु, कौशल्यासुत, छली रावण-खर-विघ्न-हारी. जनकजा-धनुर्धर, क्षत्रिय-गुण-निधि, गृह-अतः रूढ़ि-झगड़ा-तोड़नकारी’ जैसी रचना प्रस्तुत की गई.
कम अक्षरों में रामायण का सार
हालांकि, शिव कुमार पांडे के मुताबिक उनकी तय की गई शर्तें काफी कठिन थीं. रचना में हिंदी वर्णमाला के सभी अक्षरों और मात्राओं का समावेश जरूरी था. साथ ही शब्दों और अक्षरों की संख्या भी निर्धारित सीमा के भीतर होनी चाहिए थी. उन्होंने बताया कि AI की ओर से प्रस्तुत रचना इन सभी कसौटियों को पूरी तरह पूरा नहीं कर सकी. इसके बाद AI ने दोबारा प्रयास किया. उसने कम शब्दों और कम अक्षरों में रामायण का सार प्रस्तुत करने की कोशिश की. हालांकि, सभी वर्णों और मात्राओं को एक साथ शामिल करने की चुनौती पूरी नहीं हो सकी.
संयुक्त वर्णों को शामिल करना सबसे बड़ी चुनौती
शिव कुमार पांडे ने बताया कि उनकी रचना में क्ष, त्र, ज्ञ और श्र जैसे संयुक्त वर्णों के साथ कई कठिन वर्णों और मात्राओं का भी इस्तेमाल किया गया है. इन्हें एक साथ शामिल करना आसान नहीं था. उन्होंने कहा कि सामान्य तौर पर कम शब्दों में रामायण का सार लिखना अपने आप में चुनौतीपूर्ण है. लेकिन जब इसके साथ हिंदी वर्णमाला के सभी वर्णों और मात्राओं को शामिल करने की शर्त जुड़ जाती है, तो यह काम और मुश्किल हो जाता है. शिव कुमार पांडे की रचना में कथा का सार भी बरकरार रखा गया है. साथ ही भाषा की शर्तों का भी ध्यान रखा गया है. यही वजह है कि यह रचना साहित्य और भाषा से जुड़े लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है.
AI ने भी मानी रचना की कठिनाई
इस चुनौती के दौरान AI ने भी माना कि सभी वर्णों और मात्राओं को शामिल करते हुए केवल 27 शब्दों और 80 अक्षरों की सीमा में रामायण का सार तैयार करना बेहद कठिन है. खासकर तब, जब रचना में संयुक्त वर्णों और कठिन मात्राओं को भी शामिल करना हो. शिव कुमार पांडे की यह रचना उनकी भाषाई कल्पनाशीलता और शब्दों के बेहतर संयोजन को दिखाती है. उन्होंने बेहद कम शब्दों में रामायण की कथा को समेटने का प्रयास किया है. साथ ही हिंदी भाषा के वर्णों को भी इसमें जगह दी है.
भाषा और रचनात्मकता का अनोखा मेल
साहित्यकार की यह रचना यह भी दिखाती है कि सीमित शब्दों में किसी बड़ी कथा को समेटना कितना चुनौतीपूर्ण हो सकता है. इसके लिए भाषा पर मजबूत पकड़ के साथ रचनात्मक सोच की भी जरूरत होती है. शिव कुमार पांडे की संपूर्ण वर्णमाला शैली की यह रामायण इसी वजह से खास मानी जा रही है. 27 शब्दों और 80 अक्षरों में रामकथा का सार प्रस्तुत करने का उनका यह प्रयास हिंदी भाषा और साहित्य के प्रति उनकी गहरी रुचि को भी दर्शाता है. उनकी रचना में कथा, भाषा, शब्द-संयोजन और रचनात्मकता का अनोखा मेल देखने को मिलता है.