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JPSC students protest: जेपीएससी स्टूडेंट प्रोटेस्ट के बीच झारखंड CID ने पूर्व JPSC चेयरमैन एल. खियांग्ते को गिरफ्तार किया है.कभी राज्य के मुख्य सचिव रहे खियांग्ते मार्च 2025 में JPSC के चेयरमैन बने थे, लेकिन उनके कार्यकाल में हुई 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम और परीक्षा संचालन पर सवाल उठे. CID जांच के बाद उन्होंने चेयरमैन पद से इस्तीफा दिया और अब उनकी गिरफ्तारी हुई है.आइए जानते हैं कि आखिर एल. खियांग्ते कौन हैं और उन पर क्या आरोप हैं?
JPSC Student Protest, L Khiyangte,L Khiyangte arrested: जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष अरेस्ट हो गए.
JPSC students protest: झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच आज बड़ा घटनाक्रम सामने आया. झारखंड CID ने JPSC के पूर्व चेयरमैन एल. खियांग्ते को कथित परीक्षा अनियमितताओं से जुड़े मामले में गिरफ्तार कर लिया. उनकी गिरफ्तारी ऐसे समय हुई है जब हजारों छात्र JPSC और JSSC की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ रांची में आंदोलन कर रहे हैं और विधानसभा घेराव के लिए मार्च कर रहे हैं.खियांग्ते पहले झारखंड के मुख्य सचिव रह चुके हैं और फरवरी 2025 में उन्हें झारखंड लोक सेवा आयोग यानी JPSC का अध्यक्ष बनाया गया था. उनके कार्यकाल में आयोजित कई परीक्षाएं बाद में सवालों के घेरे में आईं. 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच के दौरान उनका नाम भी जांच के दायरे में आया. अब CID की गिरफ्तारी ने इस पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है.
कौन हैं एल.खियांग्ते?
एल.खियांग्ते का पूरा नाम लालबिआकतलुआंगा खियांग्ते बताया जाता है. वह 1988 बैच के झारखंड कैडर के IAS अधिकारी रहे हैं. लंबे प्रशासनिक अनुभव के कारण उन्हें राज्य के अनुभवी अधिकारियों में गिना जाता रहा है.उपलब्ध जानकारी के अनुसार उनका जन्म 26 अक्टूबर 1964 को हुआ था और वह मूल रूप से मिजोरम के आदिवासी समुदाय से आते हैं. उन्होंने इतिहास विषय से स्नातक की पढ़ाई की और इसके बाद भारतीय प्रशासनिक सेवा में चयनित हुए.उनका प्रशासनिक करियर झारखंड के साथ लंबे समय तक जुड़ा रहा. उन्होंने राज्य सरकार में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं और बाद में झारखंड के मुख्य सचिव भी बने.
झारखंड के मुख्य सचिव भी रह चुके हैं खियांग्ते
एल. खियांग्ते ने अपने प्रशासनिक करियर में जिला प्रशासन से लेकर राज्य सरकार के शीर्ष स्तर तक कई जिम्मेदारियां संभालीं. झारखंड बनने से पहले वह एकीकृत बिहार के बक्सर जिले में जिला अधिकारी यानी DM भी रह चुके थे.शुरुआती दौर में वह AGMUT कैडर का हिस्सा थे. बाद में वर्ष 2008 में अंतर-कैडर प्रतिनियुक्ति के जरिए झारखंड कैडर में आए.झारखंड सरकार में उन्होंने मुख्य सचिव, अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, परीक्षा नियंत्रक, उप विकास आयुक्त, आदिवासी कल्याण आयुक्त और प्रशासनिक प्रशिक्षण संस्थान के महानिदेशक जैसे पदों पर काम किया.वह 6 दिसंबर 2023 से 31 अक्टूबर 2024 तक झारखंड के मुख्य सचिव रहे. 31 अक्टूबर 2024 को सरकारी सेवा से रिटायर होने के बाद फरवरी 2025 में राज्य सरकार ने उन्हें JPSC का अध्यक्ष नियुक्त किया.राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने उनके नाम को मंजूरी दी थी.
फरवरी 2025 में संभाली JPSC की कमान
JPSC का अध्यक्ष पद कई महीनों से खाली था. ऐसे समय में पूर्व मुख्य सचिव एल. खियांग्ते को आयोग की कमान दी गई. उन्होंने मार्च 2025 की शुरुआत में पदभार संभाला. कुछ रिपोर्टों में कार्यभार संभालने की तारीख 6 मार्च 2025 बताई गई है.उनसे उम्मीद थी कि उनके प्रशासनिक अनुभव से राज्य में लंबित भर्ती प्रक्रियाओं को गति मिलेगी और JPSC की परीक्षाएं तय समय पर कराई जा सकेंगी लेकिन उनके कार्यकाल के दौरान आयोजित कुछ भर्ती परीक्षाएं बाद में विवादों में आ गईं. इनमें 14वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा सबसे बड़ा विवाद बनी.
14वीं JPSC परीक्षा से कैसे जुड़ा विवाद?
19 अप्रैल 2026 को 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा आयोजित की गई थी. परीक्षा और बाद में जारी परिणाम को लेकर अभ्यर्थियों ने कई गंभीर सवाल उठाए.आरोपों में परीक्षा संचालन, OMR शीट, मूल्यांकन और परिणाम प्रक्रिया में कथित अनियमितताएं शामिल थीं. इसके बाद मामला बढ़ता गया और छात्रों का विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया.जांच के दौरान CID ने JPSC कार्यालय और खियांग्ते से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की. जांच एजेंसी ने परीक्षा से संबंधित दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य खंगाले. बाद में कई लोगों को गिरफ्तार भी किया गया.
CID की छापेमारी के बाद दिया था इस्तीफा
जुलाई 2026 में JPSC कार्यालय और उनसे जुड़े ठिकानों पर CID की कार्रवाई के बाद खियांग्ते ने चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया था.उन्होंने बाद में कहा था कि उन्होंने निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए स्वेच्छा से पद छोड़ा. उनका कहना था कि अगर वह पद पर बने रहते तो सबूतों से छेड़छाड़ को लेकर सवाल उठ सकते थे.उनका इस्तीफा राज्यपाल ने स्वीकार कर लिया था. इसके बाद वह JPSC के पूर्व चेयरमैन हो गए.
उनके कार्यकाल में किन परीक्षाओं पर उठे सवाल?
एल. खियांग्ते के JPSC अध्यक्ष रहने के दौरान कई भर्ती परीक्षाएं कथित अनियमितताओं को लेकर चर्चा में आईं. इनमें 14वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा के अलावा फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर भर्ती, असिस्टेंट कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट्स भर्ती, झारखंड पात्रता परीक्षा, प्रोजेक्ट मैनेजर भर्ती, सिविल जज जूनियर डिवीजन, मेडिकल कॉलेज असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती और असिस्टेंट पब्लिक प्रॉसिक्यूटर भर्ती जैसी परीक्षाएं शामिल बताई गई हैं.
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वर्तमान में न्यूज़18 हिंदी (Network18 Digital)में असिस्टेंट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. पिछले 16 वर्षों से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. इस दौरान प्रिंट, डिजिटल और टेलीविजन मीडिया में काम कर…
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