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पहले बहन गई, मां-बाप भी खत्म, फिर शख्स को हो गया ब्रेन...


हम लोग अपनी छोटी-छोटी तकलीफों को लेकर कितना परेशान हो जाते हैं, लेकिन इस शख्स की कहानी सुनेंगे तो आपकी भी आंखें भर आएंगे. इस शख्स का दिलभर देना वाला वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है. उसकी जिंदगी पर मानों तकलीफों का पहाड़ टूट पड़ा. इसकी कहानी सुनकर अनायास ही मन में सवाल उठता है कि आखिर इतने दर्द के साथ यह शख्स जिंदा कैसे है. इतने दुख के बावजूद शख्स के चेहरे पर एक अजीब सी चमक थी, लेकिन आंखों में गहरी थकान भी साफ दिखाई दे रही थी. वह धीरे-धीरे अपनी जिंदगी की कहानी बता रहा था. ऐसा लग रहा था जैसे लंबे समय से दिल में दबा कोई बोझ आज शब्दों के रास्ते बाहर निकल रहा हो.

उसकी कहानी की शुरुआत ही बिछड़ने से हुई. पहले बहन चली गई. फिर मां-बाप भी दुनिया छोड़ गए. घर में सन्नाटा रह गया और जिंदगी में अकेलापन. जिन लोगों के साथ कभी घर भरा रहता था, उनके जाने के बाद उसके पास सिर्फ यादें बचीं. उसकी मुश्किलें यहीं खत्म नहीं हुईं. उसकी सेहत ने भी उसका साथ छोड़ना शुरू कर दिया. उसे मिर्गी के दौरे पड़ने लगे और फिर पता चला कि उसके दिमाग में ब्रेन ट्यूमर है. इलाज चाहिए था, लेकिन इलाज के लिए पैसे कहां से आते? जिंदगी बचाने की जद्दोजहद के बीच रोजमर्रा की जरूरतें ही सबसे बड़ी चुनौती बन गईं.

फिर एक दिन उसकी नौकरी भी चली गई. नौकरी गई तो सिर्फ आमदनी नहीं गई, उसके सिर से छत भी छिन गई. जिस कमरे में वह रहता था, वहां से भी उसे निकलना पड़ा. अब उसके पास रहने के लिए कोई ठिकाना नहीं था.

भर्रायी हुई आवाज में वह कहता है, ‘मुझे कंपनी से निकाल दिया… जिस रूम में रहते थे, वहां से भी निकाल दिया. रहने के लिए मेरे पास जगह नहीं है. मां-बाप भी नहीं हैं… बहन भी नहीं है. सब खत्म हो गए.’

शायद इन शब्दों में उसकी पूरी जिंदगी का दर्द समाया हुआ है. लेकिन सबसे ज्यादा झकझोर देने वाली बात भूख की है. उसने बताया कि सुबह से उसने कुछ नहीं खाया था. पेट में भूख थी और जेब खाली. आखिरकार उसने दोस्तों से मदद मांगी. एक दोस्त ने किसी तरह 200 रुपये दिए.

200 रुपये… शायद किसी के लिए छोटी रकम हो, लेकिन उस वक्त उसके लिए यही 200 रुपये पूरे दिन का सहारा थे. उसे लगा होगा कि अब कुछ खाना मिल जाएगा. लेकिन किस्मत ने यहां भी उसका साथ नहीं दिया. उसके मुताबिक, उसके बैंक खाते से वह 200 रुपये भी बैंक ने जीरो बैलेंस होने की वजह से काट लिए. वह पैसे, जिन्हें वह भूख मिटाने के लिए लेकर आया था, उसके हाथ में आए बिना ही चले गए.

उसकी बातों में कोई बड़ा भाषण नहीं था. कोई शिकायतों की लंबी फेहरिस्त नहीं थी. बस एक थका हुआ इंसान था, जो अपनी जिंदगी के टूटे हुए हिस्सों को जोड़ते हुए कैमरे के सामने बैठा था.

पहले बहन गई… फिर मां-बाप… फिर बीमारी… फिर नौकरी… फिर घर. अब उसके पास न परिवार का सहारा है, न नौकरी, न रहने की जगह और न ही पेट भरने के लिए पैसे. सिर में बीमारी का दर्द है और दिल में अपनों को खोने का दर्द. फिर भी वह मुस्कुरा रहा था.



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