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गौतम अडानी को बड़ी राहत, अमेरिका में रिश्वत-धोखाधड़ी के केस खत्म, बिजनेसमैन...


Gautam Adani News: अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी को अमेरिका में बड़ी कानूनी राहत मिली है. अमेरिका की संघीय अदालत ने बिजनेसमैन गौतम अडानी के खिलाफ दर्ज धोखाधड़ी और रिश्वतखोरी के सभी आपराधिक मामलों को खारिज कर दिया है. इस फैसले पर गौतम अडानी ने खुशी जाहिर की है. गौतम अडानी ने मंगलवार को अमेरिकी अदालत के उस फैसले का स्वागत किया. उन्होंने कहा कि उन्हें न्यायिक प्रक्रिया पर गहरा भरोसा और सम्मान है.

अमेरिकी कोर्ट से केस खत्म होने के बाद अपनी पहली प्रतिक्रिया में गौतम अडानी ने कहा कि कानूनी कार्यवाही के दौरान सच्चाई, निष्पक्षता और कानून के शासन में उनका भरोसा अटूट रहा. उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ‘मैं अमेरिकी कोर्ट के फैसले का विनम्रता और न्यायिक प्रक्रिया के प्रति गहरे सम्मान के साथ स्वागत करता हूं. इस मुश्किल दौर में सच्चाई, निष्पक्षता और कानून के शासन में हमारा भरोसा अटूट रहा.’

गौतम अडानी ने क्या कहा

गौतम अडानी ने उन लोगों का शुक्रिया अदा किया, जिन्होंने इस पूरे मामले के दौरान उन पर, न्याय व्यवस्था और भारत की न्याय देने की क्षमता पर भरोसा बनाए रखा. अडानी ने आगे कहा, ‘हम वही काम करते रहेंगे जो मायने रखता है- देश के लिए निर्माण करना, ऐसी वैल्यू बनाना जो हमारे बाद भी कायम रहे और खुद से बड़े उद्देश्य के लिए काम करना. यही हमारी प्रतिबद्धता है.’

अमेरिकी जज ने केस खत्म किया

दरअसल, अमेरिका के एक जज ने सोमवार को गौतम अडानी के खिलाफ चल रहे आपराधिक मामले को खारिज कर दिया. यह फैसला ट्रंप प्रशासन की ओर से 2024 में लगाए गए धोखाधड़ी और रिश्वतखोरी के आरोपों को हटाने की मांग के बाद आया.

कोर्ट ने क्या कहा

ब्रुकलिन की संघीय अदालत के जज निकोलस गराफिस ने ऑपचारिक रूप से प्रॉसिक्यूटर की उस मांग को औपचारिक मंजूरी दी, जिसमें अडानी पर भारतीय अधिकारियों को 26.5 करोड़ डॉलर की कथित रिश्वत देने की योजना में शामिल होने का आरोप हटाने की बात कही गई थी. आरोप था कि इस योजना का मकसद भारत में बड़े सौर ऊर्जा आपूर्ति ठेके हासिल करना था.

अडानी के वकील रॉबर्ट जिउफ्रा ने कथित तौर पर अमेरिकी न्याय विभाग के अधिकारियों से कहा था कि अगर आरोप हटा दिए जाते हैं तो अडानी अमेरिका में 10 बिलियन डॉलर का निवेश करने को तैयार होंगे. रॉबर्ट जिउफ्रा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निजी वकील भी हैं.

जज ने क्या सवाल उठाया?

जज गराफिस ने सवाल उठाया था कि क्या निवेश के वादे ने फ़ैसले को प्रभावित किया, लेकिन अंत में यह निष्कर्ष निकाला कि प्रॉसिक्यूटर के फैसले में इसकी कोई भूमिका नहीं थी. हालांकि, जज ने न्याय विभाग द्वारा केस को संभालने के तरीके की आलोचना की. उन्होंने कहा कि किसी सीनियर अधिकारी का जांचकर्ताओं और प्रॉसिक्यूटर की सलाह के बिना आरोप हटाने का फैसला लेना ‘बहुत असामान्य’ था, जबकि उन लोगों ने ही केस पर काम किया था.



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