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भास्कर एक्सक्लूिसव जिले में मानसून के जोर पकड़ते ही सर्पदंश की घटनाओं में अप्रत्याशित बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ताजा आंकड़े देखें तो जून महीने में सर्पदंश के 22 और जुलाई में 33 मामले सामने आए थे। वहीं, अगस्त के महज 10 दिनों में ही 23 लोग सांप के काटने का शिकार हुए। इनमें से जरीडीह की एक महिला और एक बच्चे की जान भी जा चुकी है। हालांकि आंकड़ों में कई सीएचसी, एसडीएच और रेफरल की रिपोर्ट भेजे भी नहीं गए हैं, इस वजह से यह आंकड़े कम हैं। सही रिपोर्ट आने के बाद यह आंकड़े बढ़ भी सकते हैं। सोमवार को सदर अस्पताल में चंडीपुर निवासी गोपी चंद्र महतो के 11 वर्षीय पुत्र नरेंद्र कुमार को सर्पदंश से पीड़ित अवस्था में भर्ती कराया गया। वहीं नौ अगस्त की देर रात को पुलिस लाइन निवासी पीके महतो (21) को सांप ने डसा था। दोनों मरीजों की गंभीर स्थिति को देखते हुए प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए रिम्स रांची रेफर कर दिया गया। सदर अस्पताल में आने वाले पीड़ितों में सबसे अधिक संख्या महिलाओं और बच्चों की है। सर्पदंश पर शांत व स्थिर रहे, ओझा-गुणी से दूर रहें जनरल फिजिशियन डॉ. मदन प्रकाश ने बताया कि सर्पदंश के बाद पहले 60 मिनट गोल्डन आवर बेहद कीमती होते हैं। इस अवधी में झाड़-फूंक में समय न गवाएं। सर्पदंश के बाद प्राय: मरीज अशांत हो जाते हैं, ऐसे में उन्हें स्थिर और शांत रखें। चूंकि घबराहट और डर से हृदय गति तेज होती है, जिससे जहर भी शरीर में तेजी से फैलता है। कभी भी अपने से सांप डसने वाली जगह पर ब्लेड का ना चीरा लगाएं और ना ही मुंह से जहर चूसने की कोशिश करें। मरीज को अस्पताल पहुंचने तक सोने ना दें और प्रयास करें कि मरीज को तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल में एंटी वेनम इंजेक्शन दिलाएं। लक्षण अनुसार डोज दिया जाता है। डॉ. मदन प्रकाश, जनरल फिजिशियन जून महीने में भीषण गर्मी के बाद जुलाई और अगस्त में हुई मूसलाधार बारिश से खेतों और जमीन के बिलों में पानी भर जाते हैं। इससे बचने के लिए सांप सुरक्षित व सूखे ठिकानों की तलाश में रिहायशी इलाकों के मकानों, झोपड़ियों और मवेशियों के छप्परों में शरण लेते हैं। सबसे ज्यादा सर्प दंश की घटना अंधेरे में फर्श पर सोने के कारण हो रही है। ग्रामीण व अर्द्ध-शहरी इलाकों में बिजली कटौती और जमीन पर सोने की आदत के कारण लोग अनजाने में सांपों पर पैर रख देते हैं, जिससे अपनी बचाव में सांप डंस लेते हैं। घरों के आसपास उगी जंगली झाड़ियों, लकड़ियों के ढेर और जमा कचरे में सांप आसानी से छिप जाते हैं। सर्पदंश से बचाव के उपाय : सर्पदंश से बचाव के लिए रोशनी का उपयोग करना चाहिए। रात के समय घर से बाहर निकलते समय टॉर्च या मोबाइल लाइट का उपयोग अवश्य करें। कभी भी जमीन पर सोने से बचें, रात में फर्श पर सोने के बजाय खाट या पलंग का इस्तेमाल करें और मच्छरदानी लगाकर सोएं। घर के आसपास लकड़ियों का ढेर, झाड़ियां और जलजमाव नहीं होने दें। घर से बाहर खेतों या झाड़ियों में जाते समय मोटे जूते और लंबे कपड़े पहने। सुरक्षित जगह की तलाश में रहते हैं सांप भास्कर एक्सपर्ट
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