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Latehar Sugga Fall In Monsoon: मानसून में लातेहार जिले का सुग्गा बांध फॉल अपने रौद्र रूप में है. 200 फीट की ऊंचाई से गिरता पानी पर्यटकों को आकर्षित कर रहा है, पर फिसलन के कारण सावधानी बरतने की सलाह दी गई है. हालांकि इस मौसम में यहां की खूबसूरती देखते ही बनती है.
मानसून आते ही प्राकृतिक धरोहरों की खूबसूरती बढ़ जाती है. झारखंड भी इसमें पीछे नहीं है. यहां कई जलप्रपात हैं जो बारिश के मौसम में विकराल रूप ले लेते हैं. इसी क्रम में लातेहार जिले में मानसून का असर अब जिले की नदियों और जलप्रपातों पर साफ दिखाई देने लगा है. बारिश के कारण जिले की लगभग सभी प्रमुख नदियां उफान पर हैं. नदी-नालों में पानी का बहाव तेज हो गया है. वहीं, प्रसिद्ध सुग्गा बांध फॉल भी इन दिनों अपने रौद्र रूप में नजर आ रहा है.
इन दिनों सुग्गा बांध फॉल में पानी का तीव्र बहाव देखने को मिल रहा है. तेज बहाव और ऊंचाई से गिरता पानी लोगों को रोमांचित कर रहा है. चट्टानों के बीच से गुजरती नदी की तेज धार जब बड़े-बड़े पत्थरों से टकराती है, तो पानी की ऊंची लहरें उठती हैं. तेज धार के कारण पूरे इलाके में पानी की गर्जना जैसी आवाज सुनाई दे रही है. फॉल का यह विकराल रूप दूर से ही दिखाई देता है.
स्थानीय लोग बताते हैं कि सुग्गा बांध फॉल में इन दिनों नदी का बहाव इतना तेज है कि पानी चट्टानों से टकराकर तेज आवाज पैदा कर रहा है. फॉल से पहले ही नदी की धार बड़े-बड़े पत्थरों से टकराती है और इसके बाद करीब 200 फीट की ऊंचाई से नीचे गिरती है. पानी की तेज गर्जना काफी दूर तक सुनाई देती है. इस प्राकृतिक नजारे को देखकर लोगों के रोंगटे खड़े हो जा रहे हैं. हालांकि, यही खूबसूरत और विकराल दृश्य पर्यटकों को आकर्षित भी कर रहा है.
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बता दें कि सुग्गा बांध फॉल की सबसे खास बात इसकी प्राकृतिक बनावट है. पत्थरों और चट्टानों के बीच से बहती नदी की तेज धार आगे जाकर करीब 200 फीट नीचे गिरती है. फॉल के आसपास बड़ी संख्या में विशाल चट्टानें मौजूद हैं. मानसून के दौरान जब बारिश का पानी नदी में बढ़ता है, तो फॉल का स्वरूप और भी आकर्षक हो जाता है. इस समय पानी की तेज धार और ऊंचाई से गिरता जल पर्यटकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है.
सुग्गा बांध फॉल लातेहार जिले के गारू प्रखंड में स्थित एक प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है. प्राकृतिक सुंदरता से घिरा यह स्थान सालभर पर्यटकों को आकर्षित करता है, लेकिन मानसून में यहां का नजारा अलग ही दिखाई देता है. बारिश के बाद जंगल, पहाड़, चट्टान और तेज बहती नदी मिलकर बेहद खूबसूरत दृश्य बनाते हैं. इन दिनों फॉल के विकराल रूप को देखने के लिए स्थानीय लोगों के साथ पर्यटकों की भी भीड़ पहुंच रही है.
सुग्गा बांध फॉल में बढ़ते जलस्तर और फिसलन को देखते हुए विभाग की ओर से पर्यटकों को सावधान करने के लिए नोटिस बोर्ड लगाया गया है. इसमें लोगों को पानी के नजदीक नहीं जाने की सलाह दी गई है. फॉल क्षेत्र में मौजूद चट्टानें बारिश के कारण फिसलन भरी हो जाती हैं, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है. ऐसे में पर्यटकों को सुरक्षित दूरी बनाए रखनी चाहिए और किसी भी स्थिति में तेज बहाव वाले पानी या चट्टानों के पास जाने से बचना चाहिए.
इस बांध फॉल तक पहुंचने के लिए सड़क मार्ग ही प्रमुख साधन है. यह फॉल गारू-महुआडांड़ मुख्य सड़क मार्ग के किनारे स्थित है. गारू प्रखंड मुख्यालय से इसकी दूरी करीब 30 किलोमीटर है, जबकि महुआडांड़ से यह लगभग 20 किलोमीटर दूर है. वहीं, लातेहार जिला मुख्यालय से सुग्गा बांध की दूरी करीब 70 किलोमीटर है. सड़क मार्ग से आसानी से यहां पहुंचा जा सकता है. मानसून में रास्ते और आसपास की हरियाली भी पर्यटकों को आकर्षित करती है.