गिरिडीह शहरवासियों को रोजाना लगने वाले लंबे जाम और भारी वाहनों के दबाव से जल्द ही राहत मिलने वाली है। गिरिडीह-डुमरी सड़क पर जोरापहाड़ी से बेंगाबाद के महुआर तक बनने वाले 24 किलोमीटर लंबे एनएच-114ए बाईपास का निर्माण कार्य अक्टूबर से शुरू हो जाएगा। बाईपास चालू होते ही भारी गाड़ियां शहर के बाहर से ही गुजर जाएंगी, जिससे शहर की सड़कों पर ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह सुधर जाएगी। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की ओर से वन विभाग को जल्द ही करीब 30 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए जा रहे हैं। फंड मिलते ही वन विभाग निर्माण के लिए एनओसी (मंजूरी) जारी कर देगा। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, सितंबर तक कागजी प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। करीब 438 करोड़ रुपए की इस परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण का काम पूरा हो चुका है। बिहार के गया की रमिया कंस्ट्रक्शन कंपनी को इसके निर्माण की जिम्मेदारी दी गई है, जिसने साइट चयन और कैंप ऑफिस बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। गिरिडीह और बेंगाबाद क्षेत्र के 25 से ज्यादा गांवों को मिलेगा राष्ट्रीय राजमार्ग का नेटवर्क यह बाईपास गिरिडीह और बेंगाबाद क्षेत्र के दो दर्जन से अधिक गांवों को सीधे नेशनल हाईवे से जोड़ेगा। इसके तहत गिरिडीह अंचल के चमरखो, कजरो, जगमनरायडीह, चेपो, गुजियाडीह, पहाड़पुर, हीराडीह, मनियामारी, नावाडीह, पिंडाटांड़, जीतपुर, करहरबारी, मोहनपुर, दिल्लीबाद, सोनबहियार, उंद्रो, बदगुंदाखुर्द, पोखरिया और गपाई गांव सीधे राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क से जुड़ेंगे। वहीं बेंगाबाद अंचल के महुआर, खूंटाबांध, मदनाटांड़, मोतीलेदा, खरटी, बिजली बथान और करमाटांड़ गांवों को भी इस बाईपास सड़क का सीधा लाभ मिलेगा। निर्माण की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है: परियोजना निदेशक सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के परियोजना निदेशकविवेक नंदन ने बताया कि 24 किलोमीटर बाईपास सड़क निर्माण की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। वन विभाग से मंजूरी मिलते ही अक्टूबर महीने से काम शुरू करा दिया जाएगा। यह सड़क अगले दो वर्षों में बनकर पूरी तरह तैयार हो जाएगी। जाम से मुक्ति के साथ उद्योगों और कारोबार को मिलेगी नई रफ्तार बाईपास बनने से शहर में लगने वाली गाड़ियों की लंबी कतारों से आम लोगों को निजात मिलेगी। वर्तमान में शहर के बीच से भारी वाहन गुजरने के कारण आए दिन नो-एंटी हटाने के बाद जाम की विकराल स्थिति बन जाती है। बाईपास बनने से न सिर्फ शहर का ट्रैफिक दुरुस्त होगा, बल्कि गिरिडीह के औद्योगिक क्षेत्र के लिए माल ढुलाई भी आसान होगी और गाड़ियों का समय बचेगा।
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