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मानसून में दुधारू पशुओं पर मंडरा रहा चमोकन बीमारी का खतरा, जानें...


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Chamokan Disease in Cattle: पलामू में मानसून के दौरान दुधारू पशुओं में चमोकन बीमारी का खतरा बढ़ गया है. पशु विशेषज्ञ डॉ. विकास शर्मा के अनुसार, यह समस्या जूं और बाहरी परजीवियों के कारण होती है. गंदगी, नमी और पशुशाला के आसपास जमा गंदा पानी इसके फैलाव का कारण बन सकता है. परजीवी पशुओं का खून चूसते हैं, जिससे उनमें खून की कमी, कमजोरी और दूध उत्पादन में कमी हो सकती है. गंभीर स्थिति में निमोनिया और पशु की मौत का खतरा भी रहता है. पशुपालकों को पशुशाला की नियमित सफाई, गंदा पानी नहीं जमा होने देने और संक्रमित पशु को अलग रखने की सलाह दी गई है. लक्षण दिखने पर तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए.

पलामू: मानसून का मौसम अपने साथ हरियाली और ठंडक लेकर आता है. बारिश के कारण वातावरण में नमी बढ़ जाती है. इससे इंसानों को गर्मी से राहत मिलती है. लेकिन दुधारू पशुओं के लिए यह मौसम कई तरह की परेशानियां लेकर आता है. बरसात के दिनों में पशुओं में संक्रमण और बाहरी परजीवियों का खतरा बढ़ जाता है. इन्हीं समस्याओं में चमोकन बीमारी भी शामिल है. इन दिनों पशुपालकों के सामने चमोकन बीमारी की समस्या सामने आ रही है. पशु विशेषज्ञ डॉ. विकास शर्मा ने बताया कि यह बीमारी मुख्य रूप से जूं और दूसरे बाहरी परजीवियों के कारण होती है. गंदगी और नमी इसके फैलाव का प्रमुख कारण बन सकती है. पशुओं के आसपास लंबे समय तक गंदा पानी जमा रहने से भी बीमारी का खतरा बढ़ जाता है.

खून चूसकर पशु को बना देती है कमजोर
डॉ. विकास शर्मा के अनुसार, चमोकन होने पर बाहरी परजीवी पशु के शरीर से लगातार खून चूसते हैं. इससे धीरे-धीरे पशु के शरीर में खून की कमी होने लगती है. पशु कमजोर होता जाता है. इसका सीधा असर उसकी सेहत पर पड़ता है. दुधारू पशुओं में इसका असर दूध उत्पादन पर भी दिखाई दे सकता है. बीमारी बढ़ने पर पशु दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं की चपेट में आ सकता है. गंभीर स्थिति में निमोनिया जैसी परेशानी होने का खतरा रहता है. कुछ मामलों में बीमारी गंभीर होने पर पशु की मौत तक हो सकती है. इसलिए शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.

एक पशु से दूसरे पशु में फैल सकता है संक्रमण
पशु विशेषज्ञ ने बताया कि अगर किसी पशु में चमोकन के लक्षण दिखाई दें तो उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. संक्रमित पशु के संपर्क में रहने वाले दूसरे पशुओं तक भी बाहरी परजीवी पहुंच सकते हैं. इससे पशुशाला के दूसरे पशु भी प्रभावित हो सकते हैं. बीमारी की पहचान होते ही संक्रमित पशु को दूसरे पशुओं से अलग रखना जरूरी है. इसके साथ ही पूरे पशुशाला की साफ-सफाई करनी चाहिए. पशु के रहने और बैठने वाली जगह को भी अच्छी तरह साफ करना चाहिए.

तबेला साफ रखें, गंदा पानी जमा न होने दें
डॉ. विकास शर्मा ने बताया कि चमोकन से बचाव के लिए पशुओं के रहने वाले स्थान की नियमित सफाई सबसे जरूरी है. तबेले में गोबर, कूड़ा और गंदा पानी जमा नहीं होने देना चाहिए. बरसात के दौरान इस बात का खास ध्यान रखना जरूरी है. पशुशाला और उसके आसपास की जगह को जरूरत के अनुसार साफ किया जाना चाहिए. ब्लीचिंग पाउडर आदि का इस्तेमाल भी उचित तरीके से किया जा सकता है. पशुओं के बैठने और बांधने की जगह को सूखा रखने का प्रयास करें. नमी और गंदगी कम रहने से बाहरी परजीवियों के पनपने की संभावना भी कम होती है.

पशुओं की नियमित सफाई जरूरी
बरसात के मौसम में पशुओं की नियमित साफ-सफाई करना जरूरी है. संभव हो तो पशुओं को समय-समय पर स्नान भी कराएं. इससे शरीर पर जमा गंदगी और कुछ बाहरी परजीवियों को हटाने में मदद मिल सकती है. बाहरी परजीवियों से बचाव के लिए पशु चिकित्सक की सलाह लेना जरूरी है. डॉक्टर की सलाह के अनुसार उचित दवा, डिपिंग या स्प्रे का इस्तेमाल किया जा सकता है. पशुपालकों को खुद से दवा की मात्रा तय करके इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. गलत दवा या गलत मात्रा से पशु को नुकसान हो सकता है.

इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें
पशु विशेषज्ञ ने बताया कि पशु के शरीर पर अधिक संख्या में जूं या दूसरे परजीवी दिखाई देना एक महत्वपूर्ण संकेत है. इसके अलावा पशु का लगातार खुजली करना भी बीमारी का लक्षण हो सकता है. बाल झड़ना, शरीर का दुबला होना और कमजोरी भी चमोकन की ओर संकेत कर सकते हैं. दुधारू पशुओं में दूध उत्पादन कम होना भी एक संकेत हो सकता है. ऐसे लक्षण दिखाई देने पर पशुपालकों को सावधान हो जाना चाहिए.

पशुओं को बचाने का सबसे प्रभावी तरीका
वहीं, अगर बीमारी अधिक फैल रही है या पशु की हालत लगातार खराब हो रही है तो तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करें. समय पर जांच और उचित उपचार से पशु को गंभीर स्थिति में पहुंचने से बचाया जा सकता है. बरसात के मौसम में पशुओं की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देना जरूरी है. पशुशाला को सूखा रखना चाहिए. गंदा पानी जमा नहीं होने देना चाहिए. पशुओं के स्वास्थ्य की नियमित निगरानी भी करनी चाहिए. साफ-सफाई, सूखा वातावरण और समय पर उपचार ही चमोकन जैसी समस्या से पशुओं को बचाने का सबसे प्रभावी तरीका है.

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Amita kishor

न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…

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