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Success Story: परिवार की पिछड़ी सोच के बावजूद बनी डॉक्टर, आज RIMS...


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पलामू की डॉ. अमितु सिंह ने पारिवारिक झिझक और सीमित परिस्थितियों के बावजूद डॉक्टर बनने का सपना पूरा किया. उन्होंने BDS और MDS की पढ़ाई पूरी करने के बाद सीनियर लेक्चरर के रूप में काम किया. मेदिनीनगर में क्लिनिक चलाकर गरीब और जरूरतमंद मरीजों का कम खर्च में और कई बार मुफ्त इलाज भी किया. साल 2026 में उन्होंने RIMS के पेडोडॉन्टिक्स विभाग में सीनियर रेजिडेंट के रूप में कार्यभार संभाला.

पलामू: आज समाज तेजी से बदल रहा है. बेटियां हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं. इसके बावजूद ग्रामीण से लेकर शहरी समाज तक कई परिवारों में बेटियों को पढ़ाई के लिए घर से दूर भेजने को लेकर अब भी झिझक देखने को मिलती है. ऐसे माहौल में पलामू की डॉ. अमितु सिंह ने अपनी मेहनत, लगन और मजबूत इरादे से अलग पहचान बनाई है. मेदिनीनगर के वाले जयप्रकाश सिंह की बेटी अमितु आज रिम्स (RIMS) के पेडोडॉन्टिक्स विभाग में सीनियर रेजिडेंट के पद पर कार्यरत हैं. उन्होंने बिना किसी पारिवारिक डॉक्टर की पृष्ठभूमि के यह मुकाम हासिल किया है. बचपन से ही उनका सपना डॉक्टर बनने का था. इस सपने को पूरा करने में परिवार का भी सहयोग मिला. हालांकि, शुरुआत में उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा.

दादा की इच्छा को बनाया अपना लक्ष्य
डॉ. अमितु के पिता जयप्रकाश सिंह व्यवसायी और कॉन्ट्रैक्टर हैं. अमितु ने बताया कि बचपन से ही उनका सपना डॉक्टर बनने का था. हालांकि, उनके दादा के विचार काफी सख्त थे. परिवार में बेटियों के घर से बाहर जाकर पढ़ने को लेकर भी सहजता नहीं थी. इसके बावजूद अमितु ने अपने सपने को कमजोर नहीं पड़ने दिया. मेदिनीनगर से करीब 40 किलोमीटर दूर गढ़वा में डेंटल कॉलेज होने के कारण परिवार ने उन्हें वहां पढ़ाई करने की अनुमति दे दी. शुरुआत में परिवार की ओर से उनकी निगरानी भी रखी जाती थी. लेकिन अमितु ने इस अवसर को अपनी मंजिल की ओर पहला कदम माना. उन्होंने पढ़ाई पर पूरा ध्यान दिया. परिवार की सीमाओं और सामाजिक सोच के बीच उन्होंने अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए लगातार मेहनत की. धीरे-धीरे उनका आत्मविश्वास बढ़ता गया और डॉक्टर बनने का सपना मजबूत होता गया.

BDS से MDS तक तय किया लंबा सफर
अमितु ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2006 में मेदिनीनगर के चिल्ड्रन पैराडाइज स्कूल से मैट्रिक की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद उन्होंने महिला कॉलेज से इंटरमीडिएट की पढ़ाई की. वर्ष 2009-13 बैच में उन्होंने रेहला स्थित वनांचल डेंटल कॉलेज से BDS की पढ़ाई पूरी की. इसका परिणाम वर्ष 2014 में आया. इसके बाद उन्होंने वर्ष 2015 से 2018 तक MDS की पढ़ाई पूरी की. पढ़ाई पूरी करने के बाद भी अमितु का सफर रुका नहीं. उन्होंने उसी कॉलेज में सीनियर लेक्चरर के रूप में काम किया. इस दौरान उन्होंने पढ़ाने के साथ अपने पेशेवर अनुभव को भी मजबूत किया. लगातार सीखने और काम करने की वजह से उनका आत्मविश्वास बढ़ता गया. उन्होंने अपने क्षेत्र में बेहतर काम करने की कोशिश जारी रखी. इसी मेहनत ने उन्हें आगे बढ़ने का रास्ता दिया.

कम पैसे में गरीबों का इलाज किया
सीनियर लेक्चरर के रूप में काम करने के दौरान अमितु ने मेदिनीनगर में अपना क्लिनिक भी शुरू किया. उनके लिए डॉक्टर बनना सिर्फ कमाई का जरिया नहीं था. वह जरूरतमंद लोगों की मदद को भी अपनी जिम्मेदारी मानती थीं. उन्होंने गरीब और जरूरतमंद मरीजों को कम खर्च में इलाज उपलब्ध कराया. कई मरीजों का इलाज उन्होंने 500 से 2,000 रुपये तक में किया. जरूरतमंद लोगों का मुफ्त इलाज भी किया.

सिर्फ पैसे कमाने को प्राथमिकता नहीं
अमितु का कहना है कि उन्होंने कभी सिर्फ पैसे कमाने को प्राथमिकता नहीं दी. मरीजों को बेहतर इलाज देना उनके लिए ज्यादा महत्वपूर्ण रहा. आर्थिक रूप से कमजोर लोगों की मदद करने की कोशिश उन्होंने लगातार की. उनके अनुसार, डॉक्टर होने का मतलब सिर्फ इलाज करना नहीं है. जरूरतमंद मरीजों के प्रति संवेदनशील होना भी जरूरी है. इसी सोच के साथ उन्होंने अपने क्लिनिक में मरीजों का इलाज किया.

RIMS में सीनियर रेजिडेंट
लंबे संघर्ष और लगातार मेहनत के बाद डॉ. अमितु का सफर अब RIMS तक पहुंच चुका है. वर्ष 2026 में उन्होंने RIMS में सीनियर रेजिडेंट के रूप में कार्यभार संभाला. वर्तमान में वह पेडोडॉन्टिक्स विभाग में अपनी सेवाएं दे रही हैं. बचपन में परिवार की सीमित सोच और परिस्थितियों के बीच शुरू हुई उनकी पढ़ाई आज विशेषज्ञ डॉक्टर के मुकाम तक पहुंच गई है. उन्होंने साबित किया कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो तो मुश्किल परिस्थितियां भी रास्ते की बाधा नहीं बन सकतीं. डॉ. अमितु का कहना है कि BDS युवतियों के लिए एक अच्छा करियर विकल्प हो सकता है. NEET की परीक्षा पास करने के बाद इस क्षेत्र में करियर बनाया जा सकता है. उनके अनुसार, अगर छात्राएं मेहनत और सही दिशा में तैयारी करें तो डेंटल क्षेत्र में भी बेहतर भविष्य बनाया जा सकता है.

बेटियों के लिए प्रेरणा बनीं डॉ. अमितु
आज डॉ. अमितु सिंह की कहानी उन अभिभावकों और बेटियों के लिए प्रेरणा है, जो संसाधनों की कमी या सामाजिक सोच के कारण अपने सपनों को सीमित कर लेते हैं. अमितु ने परिवार की शुरुआती झिझक के बावजूद पढ़ाई जारी रखी. उन्होंने अपने सपने को लक्ष्य बनाया. BDS और MDS की पढ़ाई पूरी की. कॉलेज में सीनियर लेक्चरर के रूप में काम किया. गरीब और जरूरतमंद मरीजों का इलाज किया. इसके बाद RIMS में सीनियर रेजिडेंट के पद तक पहुंचीं. डॉ. अमितु ने अपनी सफलता से यह संदेश दिया है कि बेटियों को मौका दिया जाए तो वे परिवार और समाज का नाम रोशन कर सकती हैं.

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Amita kishor

न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…

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